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Yamuna Nagar News: शहर के पार्कों में कुत्तों का बसेरा, खेलने के लिए कहां जाएं बच्चे
Wed, 12 Nov 2025 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 12 Nov 2025 01:16 AM IST
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नेहरू पार्क में घूमता लावारिस कुत्ता। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सर्दियों की शुरुआत होते ही दिन में गुनगुनी धूप निकल रही है। लोग धूप का आनंद लेने के लिए पार्कों में आ रहे हैं। इसके बावजूद पार्कों में बच्चों के लिए लगाए गए झूले वीरान हैं। इसकी वजह सर्दी नहीं बल्कि पार्कों में लावारिस कुत्तों का आतंक है। पार्कों में लगाए गए झूलों के पास सारा दिन लावारिस कुत्ते अपना डेरा लगाए रहते हैं।
बच्चों को कुत्तों के काटने का खौफ रहता है, इसलिए अभिभावक अपने बच्चों को न के बराबर ही पार्कों में लेकर जा रहे हैं। बच्चों को उनकी पसंद के झूलों से दूर करने की बड़ी वजह कुत्तों के अलावा नगर निगम के अधिकारी भी हैं। कुत्तों की नसबंदी करने के लिए जो टेंडर अब लगाया है, यदि वह कुछ साल पहले लगा दिया होता तो शायद आज इनकी संख्या इतनी नहीं बढ़ती।
करीब पांच लाख की आबादी वाले शहर की लगभग सभी कॉलोनियों में क्षेत्रफल के हिसाब से पार्क हैं। शहर में नेहरू पार्क, ओपी जिंदल पार्क, भगत सिंह पार्क, महाराणा प्रताप पार्क, वीर हकीकत राय समेत अन्य पार्क ऐसे हैं जो बहुत बड़े हैं। पार्कों में शहरवासी दिनभर अपने बच्चों के साथ घूमने के लिए आते हैं। वहीं बच्चों के लिए नगर निगम ने पार्कों में झूले भी लगा रखे हैं। ताकि वह इन पर खेल कर अपना तनाव दूर कर सकें।
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सर्दी में अच्छी खासी धूप होने के बावजूद बच्चे पार्कों में बच्चों के झूले खाली पड़े रहते हैं। बच्चे अपने घर के आंगन व छतों पर ही खेलने को मजबूर हो गए हैं। प्रोफेसर कॉलोनी के सचिन का कहना है कि शहर में लावारिस कुत्तों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि कई बार तो गलियों में इंसानों से ज्यादा कुत्ते ही नजर आते हैं। घर से न तो पैदल निकल सकते हैं और न ही बाइक पर। पता नहीं गली में खड़े कुत्ते कब पीछे दौड़ पड़ें।
उन्होंने कहा कि यदि आप कार के अंदर बैठे हैं तो कुत्तों से सुरक्षित हैं। तिलक नगर के संजीव का कहना है कि कई बार तो ऐसा देखा गया है जब कुत्ते गली में आराम से बैठे रहते हैं। परंतु जैसे ही उनके पास से कोई निकलता है तो कुत्ते अचानक पीछे दौड़ पड़ते हैं। इससे बाइक सवार भी हड़बड़ा कर नीचे गिर जाते हैं या फिर दूसरे वाहन से टकरा जाते हैं। नगर निगम के अधिकारी कुत्तों को न तो पकड़ते हैं और न ही इन्हें रखने का प्रबंध करते हैं।
शहर में लावारिस कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर प्रकिया पूरी कर एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। जल्द ही एजेंसी नसबंदी व व टीकाकरण कार्य शुरू कर देगी। इससे कुत्तों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगेगा। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। सर्दियों की शुरुआत होते ही दिन में गुनगुनी धूप निकल रही है। लोग धूप का आनंद लेने के लिए पार्कों में आ रहे हैं। इसके बावजूद पार्कों में बच्चों के लिए लगाए गए झूले वीरान हैं। इसकी वजह सर्दी नहीं बल्कि पार्कों में लावारिस कुत्तों का आतंक है। पार्कों में लगाए गए झूलों के पास सारा दिन लावारिस कुत्ते अपना डेरा लगाए रहते हैं।
बच्चों को कुत्तों के काटने का खौफ रहता है, इसलिए अभिभावक अपने बच्चों को न के बराबर ही पार्कों में लेकर जा रहे हैं। बच्चों को उनकी पसंद के झूलों से दूर करने की बड़ी वजह कुत्तों के अलावा नगर निगम के अधिकारी भी हैं। कुत्तों की नसबंदी करने के लिए जो टेंडर अब लगाया है, यदि वह कुछ साल पहले लगा दिया होता तो शायद आज इनकी संख्या इतनी नहीं बढ़ती।
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करीब पांच लाख की आबादी वाले शहर की लगभग सभी कॉलोनियों में क्षेत्रफल के हिसाब से पार्क हैं। शहर में नेहरू पार्क, ओपी जिंदल पार्क, भगत सिंह पार्क, महाराणा प्रताप पार्क, वीर हकीकत राय समेत अन्य पार्क ऐसे हैं जो बहुत बड़े हैं। पार्कों में शहरवासी दिनभर अपने बच्चों के साथ घूमने के लिए आते हैं। वहीं बच्चों के लिए नगर निगम ने पार्कों में झूले भी लगा रखे हैं। ताकि वह इन पर खेल कर अपना तनाव दूर कर सकें।
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सर्दी में अच्छी खासी धूप होने के बावजूद बच्चे पार्कों में बच्चों के झूले खाली पड़े रहते हैं। बच्चे अपने घर के आंगन व छतों पर ही खेलने को मजबूर हो गए हैं। प्रोफेसर कॉलोनी के सचिन का कहना है कि शहर में लावारिस कुत्तों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि कई बार तो गलियों में इंसानों से ज्यादा कुत्ते ही नजर आते हैं। घर से न तो पैदल निकल सकते हैं और न ही बाइक पर। पता नहीं गली में खड़े कुत्ते कब पीछे दौड़ पड़ें।
उन्होंने कहा कि यदि आप कार के अंदर बैठे हैं तो कुत्तों से सुरक्षित हैं। तिलक नगर के संजीव का कहना है कि कई बार तो ऐसा देखा गया है जब कुत्ते गली में आराम से बैठे रहते हैं। परंतु जैसे ही उनके पास से कोई निकलता है तो कुत्ते अचानक पीछे दौड़ पड़ते हैं। इससे बाइक सवार भी हड़बड़ा कर नीचे गिर जाते हैं या फिर दूसरे वाहन से टकरा जाते हैं। नगर निगम के अधिकारी कुत्तों को न तो पकड़ते हैं और न ही इन्हें रखने का प्रबंध करते हैं।
शहर में लावारिस कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर प्रकिया पूरी कर एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। जल्द ही एजेंसी नसबंदी व व टीकाकरण कार्य शुरू कर देगी। इससे कुत्तों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगेगा। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।

नेहरू पार्क में घूमता लावारिस कुत्ता। संवाद

नेहरू पार्क में घूमता लावारिस कुत्ता। संवाद