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डॉक्टरों की हड़ताल से अस्पतालों में कराहते रहे मरीज
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ट्रामा सेंटर के जरनल वार्ड में भर्ती मरीज।
- फोटो : YAMUNA NAGAR
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सरकारी डॉक्टरों की एक दिन की हड़ताल के कारण वीरवार को जिले में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई। मरीज अस्पतालों में पहुंचकर डॉक्टरों का इंतजार करते रहे, लेकिन डॉक्टर हड़ताल पर बैठे रहे। यमुनानगर और जगाधरी के सिविल अस्पतालों में इमरजेंसी को छोड़कर अन्य ओपीडी ठप रही। यहां 18 में से 8 डॉक्टर स्ट्राइक में शामिल नहीं रहे और दो हजार की ओपीडी वाले अस्पताल में केवल 784 मरीजों को देखा गया। जबकि अधिकतर मरीज मायूस होकर लौट गए।
वहीं जिले की 7 सीएचसी और 13 पीएचसी में भी मरीजों का इलाज नहीं किया गया। अस्पतालों में मरीज कराहते रहे, लेकिन हड़ताल पर गए डॉक्टरों ने उनका मर्ज नहीं सुना। हालांकि आम दिनों की तुलना में वीरवार को पर्ची बनवाने वालों की संख्या काफी कम थी, लेकिन जो मरीज उपचार के लिए अस्पताल में पहुंचे, उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने हड़ताल को सफल बताते हुए सरकार को चेताया है कि तीन दिन में मांगों को पूरा नहीं किया गया तो नौ सितंबर को अनिश्चितकालीन बड़ी हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। हालांकि यह फैसला स्टेट बॉडी पर छोड़ा गया है। इससे पहले डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर 29 अगस्त को दो घंटे की हड़ताल रखी थी।
जल्द मांगे पूरी करें सरकार : हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ. विजय परमार की अध्यक्षता में डॉक्टरों की एक मीटिंग भी हुई। मीटिंग के बाद डॉ. विजय विवेक, डॉ. पुनीत कालरा, डॉ. अनूप, डॉ. विपुल, डॉ. विकास, डॉ. कपिल, डॉ. विपिन, डॉ. सुनील, डॉ. शिवेंद्र, डॉ. वीपीएस दहिया आदि ने बताया कि चिकित्सकों को मुख्य रूप से दो मांगों को लेकर यह कदम उठाना पड़ रहा है। इसमें विशेषज्ञता भत्ता तथा 4, 9, 13, 20 साल की सेवाकाल पर एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रमोशन) का लाभ देना है। मुख्यमंत्री भी इन मांगों को सही मानते हुए पूरा कराने का आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी है। इतने कम संख्या में हर साल बढ़ रहे मरीजों की संख्या का बेहतर इलाज करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने आमजन को हो रही परेशानियों के लिए खेद प्रकट करते हुए सरकार के उदासीन रवैये को जिम्मेदार बताया।
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भटकते रहे मरीज
मेरा टीबी का इलाज चल रहा है और 40 किमी दूर से दवा लेने आया था। हड़ताल के कारण डॉक्टर ओपीडी में नहीं थे। अब शुक्रवार को बुलाया है। हड़ताल के बारे में मुझे जानकारी नहीं थी। अगर पहले से ही जानकारी होती, तो अस्पताल नहीं आता।
- मोहम्मद इकराम, मरीज
मेरे कान में दर्द होने कारण इलाज के लिए आई थी। हड़ताल होने कारण डॉक्टर नहीं मिले हैं। इमरजेंसी में दिखाया है तो डॉक्टर ने कुछ दवा लिखी है और शुक्रवार को बुलाया है ताकि विशेषज्ञ को दिखाया जा सके।
- रोशनी, मरीज
मैं बच्चे को वायरल की शिकायत पर उपचार के लिए आई हूं, हड़ताल के बारे में पहले पता नहीं था। यदि पता होता तो नहीं आती। आने जाने में किराया, मानसिक परेशानी और उपचार कराए बिना जाना परेशानियां और बढ़ाने वाली स्थिति है।
- पूनम, तीमारदार
- मैं अपने रिश्तेदार को उपचार के लिए लेकर आया था। यहां आने के बाद चिकित्सक के हड़ताल पर होने की जानकारी मिली। कभी चिकित्सक तो कभी फार्मासिस्ट और कभी कोई और हड़ताल कर रहे हैं। इससे आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए।
-सोनू राम, तीमारदार
दंत चिकित्सक नहीं थे हड़ताल में शामिल : दूसरी ओर दंत चिकित्सक इस हड़ताल से दूर रहे। वे आम दिनों की तरह दंत रोगियों की जांच करते रहे। एचसीएमएस चिकित्सकों की हड़ताल को देखते हरियाणा सिविल डेंटल सर्जन एसोसिएशन ने प्रदेश के सभी अस्पतालों में डेंटल ओपीडी सुचारू रूप से चलाई।
स्टाफ ने खूब की मनमानी : स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गर्भवती महिलाओं, आपात स्थिति, एसएनसीयू, पोस्टमॉर्टम आदि सुविधाएं हड़ताल में शामिल नहीं होने का दावा कर रहे थे, लेकिन चिकित्सकों के नहीं होने के कारण स्टाफकर्मी भी मनमानी करते रहे। परेशान मरीजों को बजाय सांत्वना देने या मार्गदर्शन करने के उन्हें अन्यत्र जाने को कह रहे थे।
अधिकारी करते रहे मॉनिटरिंग : चिकित्सा अधिकारी अस्पताल परिसर की प्रत्येक घटना की मॉनिटरिंग करते रहे, लेकिन मरीजों की परेशानियां दूर नहीं करा पाए। अब चिकित्सक 9 सितंबर को ओपीडी, आपातकालीन, एसएनसीयू सहित समस्त सेवाएं ठप रखने की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में स्थिति और बिगड़ सकती है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के सभी डॉक्टर हड़ताल में शामिल रहे। सरकार अगर जल्द कदम नहीं उठाती तो 9 सितंबर को ओपीडी व पोस्टमार्टम की सेवाएं नहीं दी जाएंगी और 10 सितंबर को ओपीडी, पोस्टमार्टम, इमरजेंसी समेत तमाम सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।
- डॉ. विजय परमार, प्रेसिडेंट, हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन
डॉक्टरों की हड़ताल का जिले में कोई खास असर नहीं रहा। जिले भर में केवल 20 डॉक्टर हड़ताल पर रहे। यमुनानगर सिविल अस्पताल में 784 ओपीडी की गई। जबकि जगाधरी अस्पताल में कोई भी डॉक्टर हड़ताल पर नहीं रहा।
- डॉ. विजय दहिया, मेडिकल सुप्रीटेंडेंट
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वहीं जिले की 7 सीएचसी और 13 पीएचसी में भी मरीजों का इलाज नहीं किया गया। अस्पतालों में मरीज कराहते रहे, लेकिन हड़ताल पर गए डॉक्टरों ने उनका मर्ज नहीं सुना। हालांकि आम दिनों की तुलना में वीरवार को पर्ची बनवाने वालों की संख्या काफी कम थी, लेकिन जो मरीज उपचार के लिए अस्पताल में पहुंचे, उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने हड़ताल को सफल बताते हुए सरकार को चेताया है कि तीन दिन में मांगों को पूरा नहीं किया गया तो नौ सितंबर को अनिश्चितकालीन बड़ी हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। हालांकि यह फैसला स्टेट बॉडी पर छोड़ा गया है। इससे पहले डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर 29 अगस्त को दो घंटे की हड़ताल रखी थी।
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जल्द मांगे पूरी करें सरकार : हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ. विजय परमार की अध्यक्षता में डॉक्टरों की एक मीटिंग भी हुई। मीटिंग के बाद डॉ. विजय विवेक, डॉ. पुनीत कालरा, डॉ. अनूप, डॉ. विपुल, डॉ. विकास, डॉ. कपिल, डॉ. विपिन, डॉ. सुनील, डॉ. शिवेंद्र, डॉ. वीपीएस दहिया आदि ने बताया कि चिकित्सकों को मुख्य रूप से दो मांगों को लेकर यह कदम उठाना पड़ रहा है। इसमें विशेषज्ञता भत्ता तथा 4, 9, 13, 20 साल की सेवाकाल पर एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रमोशन) का लाभ देना है। मुख्यमंत्री भी इन मांगों को सही मानते हुए पूरा कराने का आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी है। इतने कम संख्या में हर साल बढ़ रहे मरीजों की संख्या का बेहतर इलाज करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने आमजन को हो रही परेशानियों के लिए खेद प्रकट करते हुए सरकार के उदासीन रवैये को जिम्मेदार बताया।
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भटकते रहे मरीज
मेरा टीबी का इलाज चल रहा है और 40 किमी दूर से दवा लेने आया था। हड़ताल के कारण डॉक्टर ओपीडी में नहीं थे। अब शुक्रवार को बुलाया है। हड़ताल के बारे में मुझे जानकारी नहीं थी। अगर पहले से ही जानकारी होती, तो अस्पताल नहीं आता।
- मोहम्मद इकराम, मरीज
मेरे कान में दर्द होने कारण इलाज के लिए आई थी। हड़ताल होने कारण डॉक्टर नहीं मिले हैं। इमरजेंसी में दिखाया है तो डॉक्टर ने कुछ दवा लिखी है और शुक्रवार को बुलाया है ताकि विशेषज्ञ को दिखाया जा सके।
- रोशनी, मरीज
मैं बच्चे को वायरल की शिकायत पर उपचार के लिए आई हूं, हड़ताल के बारे में पहले पता नहीं था। यदि पता होता तो नहीं आती। आने जाने में किराया, मानसिक परेशानी और उपचार कराए बिना जाना परेशानियां और बढ़ाने वाली स्थिति है।
- पूनम, तीमारदार
- मैं अपने रिश्तेदार को उपचार के लिए लेकर आया था। यहां आने के बाद चिकित्सक के हड़ताल पर होने की जानकारी मिली। कभी चिकित्सक तो कभी फार्मासिस्ट और कभी कोई और हड़ताल कर रहे हैं। इससे आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए।
-सोनू राम, तीमारदार
दंत चिकित्सक नहीं थे हड़ताल में शामिल : दूसरी ओर दंत चिकित्सक इस हड़ताल से दूर रहे। वे आम दिनों की तरह दंत रोगियों की जांच करते रहे। एचसीएमएस चिकित्सकों की हड़ताल को देखते हरियाणा सिविल डेंटल सर्जन एसोसिएशन ने प्रदेश के सभी अस्पतालों में डेंटल ओपीडी सुचारू रूप से चलाई।
स्टाफ ने खूब की मनमानी : स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गर्भवती महिलाओं, आपात स्थिति, एसएनसीयू, पोस्टमॉर्टम आदि सुविधाएं हड़ताल में शामिल नहीं होने का दावा कर रहे थे, लेकिन चिकित्सकों के नहीं होने के कारण स्टाफकर्मी भी मनमानी करते रहे। परेशान मरीजों को बजाय सांत्वना देने या मार्गदर्शन करने के उन्हें अन्यत्र जाने को कह रहे थे।
अधिकारी करते रहे मॉनिटरिंग : चिकित्सा अधिकारी अस्पताल परिसर की प्रत्येक घटना की मॉनिटरिंग करते रहे, लेकिन मरीजों की परेशानियां दूर नहीं करा पाए। अब चिकित्सक 9 सितंबर को ओपीडी, आपातकालीन, एसएनसीयू सहित समस्त सेवाएं ठप रखने की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में स्थिति और बिगड़ सकती है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के सभी डॉक्टर हड़ताल में शामिल रहे। सरकार अगर जल्द कदम नहीं उठाती तो 9 सितंबर को ओपीडी व पोस्टमार्टम की सेवाएं नहीं दी जाएंगी और 10 सितंबर को ओपीडी, पोस्टमार्टम, इमरजेंसी समेत तमाम सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।
- डॉ. विजय परमार, प्रेसिडेंट, हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन
डॉक्टरों की हड़ताल का जिले में कोई खास असर नहीं रहा। जिले भर में केवल 20 डॉक्टर हड़ताल पर रहे। यमुनानगर सिविल अस्पताल में 784 ओपीडी की गई। जबकि जगाधरी अस्पताल में कोई भी डॉक्टर हड़ताल पर नहीं रहा।
- डॉ. विजय दहिया, मेडिकल सुप्रीटेंडेंट

इलाज के अभाव में भटकते मरीज- फोटो : YAMUNA NAGAR