{"_id":"67046bbd6f7d0845280257c7","slug":"do-not-forget-god-in-happiness-dr-swati-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-126525-2024-10-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुख में भगवान को न भूलें : डॉ. स्वाति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुख में भगवान को न भूलें : डॉ. स्वाति
Tue, 08 Oct 2024 04:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 08 Oct 2024 04:46 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 79 वें दिन महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने 27 दिवसीय तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ के जाप शृंखला में सोमवार को जाप संपन्न करवाया। उन्होंने प्रवचन करते हुए कहा कि प्रभु पार्श्वनाथ का नाम दुख,संकट, कष्टों को हरने वाला है।
उन्होंने कहा कि आज के व्यक्ति की यह स्थिति बन गई है कि वह प्रभु का नाम तब जपता है जब उस पर कोई विपत्ति आती है। सुख में व्यक्ति अक्सर भगवान को भूल जाता है। जैसा कि कहा भी गया है दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई जो सुख में सुमिरन करे दुख काहे का होई अगर व्यक्ति सुख में ही प्रभु का नाम जपे तो दुख कभी आ ही नहीं सकता क्योंकि जहां प्रभु नाम का सिमरन किया जाता है वहां कभी रोग, शोक, दुख, दरिद्रता आ ही नहीं सकते।
उन्होंने कहा कि कैसी भी परिस्थिति हो फिर भी व्यक्ति सांस लेना नहीं छोड़ता ऐसे ही हर सांस में प्रभु का सिमरन कीजिए।
साध्वी ने श्रावकों को बताया कि चातुर्मास आधे से ज्यादा हो चुका है अपने परिवार में सुख शांति और मंगलमय वातावरण पाने के लिए यदि आप एक से डेढ़ घंटा स्थानक में आकर तप और तपस्या करते हैं तो इससे बढ़िया कुछ भी नहीं है। ा
विज्ञापन
विज्ञापन
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 79 वें दिन महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने 27 दिवसीय तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ के जाप शृंखला में सोमवार को जाप संपन्न करवाया। उन्होंने प्रवचन करते हुए कहा कि प्रभु पार्श्वनाथ का नाम दुख,संकट, कष्टों को हरने वाला है।
उन्होंने कहा कि आज के व्यक्ति की यह स्थिति बन गई है कि वह प्रभु का नाम तब जपता है जब उस पर कोई विपत्ति आती है। सुख में व्यक्ति अक्सर भगवान को भूल जाता है। जैसा कि कहा भी गया है दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई जो सुख में सुमिरन करे दुख काहे का होई अगर व्यक्ति सुख में ही प्रभु का नाम जपे तो दुख कभी आ ही नहीं सकता क्योंकि जहां प्रभु नाम का सिमरन किया जाता है वहां कभी रोग, शोक, दुख, दरिद्रता आ ही नहीं सकते।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कैसी भी परिस्थिति हो फिर भी व्यक्ति सांस लेना नहीं छोड़ता ऐसे ही हर सांस में प्रभु का सिमरन कीजिए।
साध्वी ने श्रावकों को बताया कि चातुर्मास आधे से ज्यादा हो चुका है अपने परिवार में सुख शांति और मंगलमय वातावरण पाने के लिए यदि आप एक से डेढ़ घंटा स्थानक में आकर तप और तपस्या करते हैं तो इससे बढ़िया कुछ भी नहीं है। ा
विज्ञापन