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Yamuna Nagar News: गुरु तेग बहादुर जी की शहादत पर की चर्चा
Wed, 16 Sep 2026 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 16 Sep 2026 01:29 AM IST
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राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान मौजूद साहित्य अकादमी के पदाधिकारी। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। साहित्य अकादमी नई दिल्ली और गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को गुरु नानक खालसा कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस की स्मृति में आयोजित संगोष्ठी में देशभर से आए विद्वानों, लेखकों और शिक्षाविदों ने उनके जीवन, दर्शन, बलिदान और साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान पर विचार रखे।
कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के चांसलर प्रो. हरमोहिंद्र सिंह बेदी मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का जीवन मानव मूल्यों के संरक्षण और आस्था एवं अंतरात्मा की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए किए गए असाधारण बलिदान का प्रतीक है। भारतीय सभ्यतागत इतिहास में गुरु जी की शहादत का विशिष्ट स्थान है।
साहित्य अकादमी के उप सचिव डॉ. एन सुरेश बाबू ने कहा कि साहित्यिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक चर्चाओं के माध्यम से गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ना आवश्यक है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्री का संदेश भी प्रस्तुत किया गया।
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साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने अध्यक्षीय संबोधन में गुरु तेग बहादुर जी की साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। गुरु नानक खालसा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद्र सिंह भल्ला ने अतिथियों और विद्वानों का आभार जताया।
शोध पत्रों में गुरु जी के विचारों पर मंथन:
संगोष्ठी के अकादमिक सत्रों में विद्वानों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. अरविंद्र सिंह भल्ला ने की। इसमें एस अवतार सिंह, एस मजिंदर सिंह और डॉ. लेजिया लखवीर ने गुरु जी के जीवन, विचारों, साहित्यिक योगदान और ऐतिहासिक महत्व पर विचार रखे। दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध पंजाबी लेखक रविंद्र सिंह ने की। डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. अनुराग सिंह और डॉ. दलविंद्र सिंह ग्रेवाल ने गुरु जी की शिक्षाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर चर्चा की।
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यमुनानगर। साहित्य अकादमी नई दिल्ली और गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को गुरु नानक खालसा कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस की स्मृति में आयोजित संगोष्ठी में देशभर से आए विद्वानों, लेखकों और शिक्षाविदों ने उनके जीवन, दर्शन, बलिदान और साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान पर विचार रखे।
कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के चांसलर प्रो. हरमोहिंद्र सिंह बेदी मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का जीवन मानव मूल्यों के संरक्षण और आस्था एवं अंतरात्मा की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए किए गए असाधारण बलिदान का प्रतीक है। भारतीय सभ्यतागत इतिहास में गुरु जी की शहादत का विशिष्ट स्थान है।
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साहित्य अकादमी के उप सचिव डॉ. एन सुरेश बाबू ने कहा कि साहित्यिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक चर्चाओं के माध्यम से गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ना आवश्यक है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्री का संदेश भी प्रस्तुत किया गया।
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साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने अध्यक्षीय संबोधन में गुरु तेग बहादुर जी की साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। गुरु नानक खालसा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद्र सिंह भल्ला ने अतिथियों और विद्वानों का आभार जताया।
शोध पत्रों में गुरु जी के विचारों पर मंथन:
संगोष्ठी के अकादमिक सत्रों में विद्वानों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. अरविंद्र सिंह भल्ला ने की। इसमें एस अवतार सिंह, एस मजिंदर सिंह और डॉ. लेजिया लखवीर ने गुरु जी के जीवन, विचारों, साहित्यिक योगदान और ऐतिहासिक महत्व पर विचार रखे। दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध पंजाबी लेखक रविंद्र सिंह ने की। डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. अनुराग सिंह और डॉ. दलविंद्र सिंह ग्रेवाल ने गुरु जी की शिक्षाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर चर्चा की।