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आधा दर्जन कॉलोनियों में डायरिया फैला, उल्टी दस्त के 95 और मरीज मिले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Aug 2021 01:30 AM IST
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Diarrhea spread in half a dozen colonies, 95 more patients of vomiting diarrhea found
यमुनानगर। वार्ड 21 और 22 की आधा दर्जन कॉलोनियों को डायरिया ने अपनी चपेट में ले लिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने बुधवार को उल्टी-दस्त के 95 नए मरीजों की पहचान की। आसपास के प्राइवेट अस्पतालों में उल्टी दस्त के मरीजों के आने का सिलसिला जारी है। डॉक्टरों ने डायरिया फैलने की मुख्य वजह खराब पेयजल बताया है। इस पर इन कॉलोनियों में जनस्वास्थ्य विभाग ने पेयजल की आपूर्ति रोक दी है और टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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लोगों ने डायरिया से तीन लोगों मौत होने की भी बात कही है। इनमें मायापुरी कॉलोनी की लजोदेवी (55), राजपाल (60) और एक डेढ़ साल का बच्चा शामिल है। वहीं कार्यवाहक सीएमओ डॉ. दीपिका गुप्ता ने किसी की मौत होने की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि एक मरीज की मौत के बारे में जानकारी मिली है। उस मरीज की मौत की वजह का पता किया जा रहा है। डायरिया की चपेट में आई मायापुरी, राजीव गार्डन, बैंक कॉलोनी, सुंदर विहार कॉलोनी और कांसापुर में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं।
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डायरिया फैलने की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। डीसी गिरीश अरोड़ा ने कार्यवाहक सिविल सर्जन डॉ. दीपिका गुप्ता की अध्यक्षता में डॉक्टरों की 18 टीमें बनाई गई। इनमें से 6 टीमों ने राजीव गार्डन, बैंक कालोनी, सुंदर विहार कालोनी, मायापुरी कॉलोनी, कांसापुर में 378 घरों का सर्वे कर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस दौरान उल्टी-दस्त के 21 मरीज मिले। इनमें से 3 मरीज अस्पताल में दाखिल हुए हैं। यहां पानी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए क्लोरीन टेबलेट व ओआरएस के पैकेट बांटे गए। वहीं बुडिया पीएचसी के डॉक्टर रमीता व डॉ. सुदेश की टीम ने 380 घरों का सर्वे किया और 210 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस दौरान उल्टी-दस्त के 74 मरीज मिले। इनमें से केवल एक मरीज अस्पताल में दाखिल है।
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डॉक्टरों ने जन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को डायरिया फैलने की मुख्य वजह बताया है। डॉक्टरों का कहना है कि जब उन्होंने जांच शुरू की तो अधिकतर घरों में बिना क्लोरीन के पानी मिला। कई घरों में दूषित और बदबूदार पेयजल पाया गया। यह पानी जन स्वास्थ्य विभाग की पाइपलाइन से सप्लाई किया गया है। कार्यवाहक सीएमओ ने इस संबंध में जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा है।
जनस्वास्थ्य विभाग ने अवैध कनेक्शन को जिम्मेदार बताया
जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता सुमित गर्ग का कहना है कि जितनी जगह से लीकेज मिली हैं, उनको ठीक किया जा रहा है। इसके अलावा कई ऐसे अवैध कनेक्शन भी पता चले हैं, जिनके चलते दूषित पानी मुख्य लाइन में चला गया। पूरी लाइन चेक की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में पेयजल की सप्लाई अस्थायी पर रोकी गई है और टैंकरों के माध्यम से पानी दिया जा रहा है।
कार्यवाहक सिविल सर्जन डॉ. दीपिका गुप्ता ने बताया कि अभी तक केवल एक व्यक्ति की डायरिया से मौत होने की जानकारी मिली है। जब तक मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक इसे डायरिया से मौत नहीं कह सकते। क्षेत्र में क्लोरीन टेबलेट और ओआरएस के पैकेट बांटे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन चार दिन तक सर्वे किया जाएगा। साफ पानी की सप्लाई के लिए जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है।

डीसी गिरीश अरोड़ा ने बताया कि डॉक्टरों ने रिपोर्ट दी है कि दूषित पानी के कारण क्षेत्र में डायरिया फैला है। संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। साथ ही प्रभावित कालोनियों में जल्द से जल्द लीकेज ठीक करने के निर्देश दिए हैं। पेयजल आपूर्ति में अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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