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जाहरवीर गोगा माड़ी मेले की मंजूरी न देने से भक्त निराश
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रादौर स्थित जाहरवीर गोगा माड़ी की मजार। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। कस्बे में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध व ऐतिहासिक जाहरवीर गोगा माड़ी मेले को लेकर प्रशासन ने मंजूरी देने से साफ मना कर दिया है। श्रद्धालु जाहरवीर गोगा माड़ी की मजार पर केवल सामाजिक दूरी का नियम अपनाकर प्रसाद चढ़ा सकेंगे।
मेले के आयोजन को लेकर सोमवार को शहर के पार्षद एसडीएम सुरेंद्रपाल से मिले। एसडीएम ने मामले को लेकर जिला उपायुक्त से बात की। जिला उपायुक्त की ओर से मेले के आयोजन को लेकर मंजूरी नहीं दी गई। एसडीएम सुरेंद्रपाल ने बताया कि मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन की ओर से मंजूरी नहीं मिल पाई है। लोग केवल सामाजिक दूरी का पालन कर प्रसाद चढ़ा सकते हैं। प्रशासन द्वारा मेले के आयोजन को लेकर मंजूरी न दिए जाने से क्षेत्र के लोगों में निराशा छा गई है।
लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से राजनीतिक पार्टियों को जलसे व रैलियां आयोजित करने की अनुमति दी जा रही है। मेले को लेकर प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है, जिससे लोगों की आस्था को भारी ठेस पहुंची है। मेले के आयोजन से भारी संख्या में दुकानदार जुड़े हुए थे। जिनकी रोजी रोटी मेलों के आयोजन से चलती है।
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फैसले पर दोबारा गौर करे प्रशासन : डॉ. सैनी
मेले की मंजूरी न देने पर हलका रादौर विधायक डॉ. बीएल सैनी ने भी विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन का यह गलत फैसला है। एक राजनीतिक दल को बड़ी रैली आयोजित करने के लिए मंजूरी दी जा रही है। लेकिन मेले के आयोजन को मंजूरी नहीं दी जा रही। मेले से हजारों लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। क्षेत्र में काफी समय से महामारी का कोई मामला भी सामने नहीं आया है। वहीं क्षेत्र में अधिकतर लोगों को कोरोना के टीके भी लग चुके हैं। प्रशासन को अपने फैसले पर दोबारा गौर करना चाहिए और मेले के आयोजन को मंजूरी देनी चाहिए।
समाजसेवी मुकेश ने कहा कि जाहरवीर गोगा माड़ी मेले का आयोजन की मंजूरी न मिलने पर लोगों में भारी निराशा है। प्रशासन को मेले के आयोजन की अनुमति देनी चाहिए थी।
मनीष ने कहा कि प्रशासन ने कुरुक्षेत्र में आयोजित मेले को तो मंजूरी दे दी थी, जिसमें लाखों की संख्या में लोग पहुंचे थे। रादौर मेले को भी मंजूूरी देनी चाहिए थी।
अनिल ने कहा कि प्रशासन राजनीतिक पार्टियों को तो रैली करने की अनुमति दे रहा है। लोगों की आस्था का प्रतीक मेेले को मंजूरी नहीं दी गई। ये लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
सतीश सैनी ने कहा कि प्रशासन जब राजनीतिक पार्टियों को मंजूूूरी दे सकता है तो उसे मेले की मंजूरी देनी चाहिए। प्रशासन को कोविड के नियमों व समय निर्धारण के साथ मंजूरी अवश्य देनी चाहिए।
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रादौर। कस्बे में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध व ऐतिहासिक जाहरवीर गोगा माड़ी मेले को लेकर प्रशासन ने मंजूरी देने से साफ मना कर दिया है। श्रद्धालु जाहरवीर गोगा माड़ी की मजार पर केवल सामाजिक दूरी का नियम अपनाकर प्रसाद चढ़ा सकेंगे।
मेले के आयोजन को लेकर सोमवार को शहर के पार्षद एसडीएम सुरेंद्रपाल से मिले। एसडीएम ने मामले को लेकर जिला उपायुक्त से बात की। जिला उपायुक्त की ओर से मेले के आयोजन को लेकर मंजूरी नहीं दी गई। एसडीएम सुरेंद्रपाल ने बताया कि मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन की ओर से मंजूरी नहीं मिल पाई है। लोग केवल सामाजिक दूरी का पालन कर प्रसाद चढ़ा सकते हैं। प्रशासन द्वारा मेले के आयोजन को लेकर मंजूरी न दिए जाने से क्षेत्र के लोगों में निराशा छा गई है।
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लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से राजनीतिक पार्टियों को जलसे व रैलियां आयोजित करने की अनुमति दी जा रही है। मेले को लेकर प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है, जिससे लोगों की आस्था को भारी ठेस पहुंची है। मेले के आयोजन से भारी संख्या में दुकानदार जुड़े हुए थे। जिनकी रोजी रोटी मेलों के आयोजन से चलती है।
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फैसले पर दोबारा गौर करे प्रशासन : डॉ. सैनी
मेले की मंजूरी न देने पर हलका रादौर विधायक डॉ. बीएल सैनी ने भी विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन का यह गलत फैसला है। एक राजनीतिक दल को बड़ी रैली आयोजित करने के लिए मंजूरी दी जा रही है। लेकिन मेले के आयोजन को मंजूरी नहीं दी जा रही। मेले से हजारों लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। क्षेत्र में काफी समय से महामारी का कोई मामला भी सामने नहीं आया है। वहीं क्षेत्र में अधिकतर लोगों को कोरोना के टीके भी लग चुके हैं। प्रशासन को अपने फैसले पर दोबारा गौर करना चाहिए और मेले के आयोजन को मंजूरी देनी चाहिए।
समाजसेवी मुकेश ने कहा कि जाहरवीर गोगा माड़ी मेले का आयोजन की मंजूरी न मिलने पर लोगों में भारी निराशा है। प्रशासन को मेले के आयोजन की अनुमति देनी चाहिए थी।
मनीष ने कहा कि प्रशासन ने कुरुक्षेत्र में आयोजित मेले को तो मंजूरी दे दी थी, जिसमें लाखों की संख्या में लोग पहुंचे थे। रादौर मेले को भी मंजूूरी देनी चाहिए थी।
अनिल ने कहा कि प्रशासन राजनीतिक पार्टियों को तो रैली करने की अनुमति दे रहा है। लोगों की आस्था का प्रतीक मेेले को मंजूरी नहीं दी गई। ये लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
सतीश सैनी ने कहा कि प्रशासन जब राजनीतिक पार्टियों को मंजूूूरी दे सकता है तो उसे मेले की मंजूरी देनी चाहिए। प्रशासन को कोविड के नियमों व समय निर्धारण के साथ मंजूरी अवश्य देनी चाहिए।