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Yamuna Nagar News: पांच एसटीपी लगे फिर भी पश्चिमी यमुना नहर में जा रहा दूषित पानी
Wed, 14 Jan 2026 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:02 AM IST
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एसटीपी का गंदा पानी नहर में गिरने से न दिखे लगाई गई झाड़ियां। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर में गंदे पानी के शोधन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तो लगाए गए, लेकिन इनका लाभ जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। वर्तमान में यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र में पांच एसटीपी संचालित हैं, इसके बावजूद शहर का गंदा पानी सीधे पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जा रहा है।
शहर में बाड़ी माजरा क्षेत्र में दो एसटीपी स्थापित हैं, जिनकी क्षमता 10-10 एमएलडी है। इसके अलावा जम्मू कॉलोनी में दो एसटीपी संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें एक की क्षमता 20 एमएलडी और दूसरे की 25 एमएलडी है। वहीं जगाधरी के परवालों क्षेत्र में साढ़े 24 एमएलडी क्षमता का एक एसटीपी लगाया गया है। कागजों में इन सभी प्लांटों की कुल क्षमता शहर के सीवरेज के शोधन के लिए पर्याप्त बताई जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि अशोधित गंदा पानी लगातार पश्चिमी यमुना नहर में मिल रहा है।
सबसे चिंताजनक हालात बाड़ी माजरा स्थित एसटीपी के हैं। लोगों का आरोप है कि यहां से निकलने वाले गंदे पानी को छिपाने के लिए नहर किनारे झाड़ियां लगा दी गई हैं, ताकि बाहर से देखने पर सीधा सीवेज नहर में गिरता हुआ नजर न आए। लेकिन झाड़ियों की आड़ में नहर में गंदा पानी बेरोकटोक छोड़ा जा रहा है। इससे नहर का पानी बुरी तरह दूषित हो चुका है, जिसका सीधा असर आगे चलकर यमुना नदी पर पड़ रहा है।
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यमुना नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्षेत्र के लोगों के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना किनारे पूजा-अर्चना करने और माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में नहर और नदी में सीवेज छोड़े जाने से लोगों की आस्था के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जिस जल को वे पवित्र मानते हैं, वही जल धीरे-धीरे विषैला बनता जा रहा है।
यमुना स्वच्छ अभियान चलाने वाले महेंद्र मित्तल का कहना है कि इस गंभीर समस्या की ओर संबंधित विभागों का कोई ध्यान नहीं है। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद न तो एसटीपी के संचालन में सुधार हुआ और न ही गंदे पानी के शोधन की प्रभावी निगरानी की जा रही है। यदि समय रहते इस ओर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका खामियाजा आने वाले समय में पर्यावरण के साथ-साथ आमजन के स्वास्थ्य को भी भुगतना पड़ सकता है।
हमारे सभी एसटीपी चल रहे हैं। बाड़ीमाजरा वाले में थोड़ी दिक्कत आ रही है। ऐसे में बाड़ी माजरा के दूसरे एसटीपी से पानी को डायवर्ट करने के बाद ही यमुना में डाला जा रहा है। -दिनेश गाबा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।
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यमुनानगर। शहर में गंदे पानी के शोधन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तो लगाए गए, लेकिन इनका लाभ जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। वर्तमान में यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र में पांच एसटीपी संचालित हैं, इसके बावजूद शहर का गंदा पानी सीधे पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जा रहा है।
शहर में बाड़ी माजरा क्षेत्र में दो एसटीपी स्थापित हैं, जिनकी क्षमता 10-10 एमएलडी है। इसके अलावा जम्मू कॉलोनी में दो एसटीपी संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें एक की क्षमता 20 एमएलडी और दूसरे की 25 एमएलडी है। वहीं जगाधरी के परवालों क्षेत्र में साढ़े 24 एमएलडी क्षमता का एक एसटीपी लगाया गया है। कागजों में इन सभी प्लांटों की कुल क्षमता शहर के सीवरेज के शोधन के लिए पर्याप्त बताई जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि अशोधित गंदा पानी लगातार पश्चिमी यमुना नहर में मिल रहा है।
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सबसे चिंताजनक हालात बाड़ी माजरा स्थित एसटीपी के हैं। लोगों का आरोप है कि यहां से निकलने वाले गंदे पानी को छिपाने के लिए नहर किनारे झाड़ियां लगा दी गई हैं, ताकि बाहर से देखने पर सीधा सीवेज नहर में गिरता हुआ नजर न आए। लेकिन झाड़ियों की आड़ में नहर में गंदा पानी बेरोकटोक छोड़ा जा रहा है। इससे नहर का पानी बुरी तरह दूषित हो चुका है, जिसका सीधा असर आगे चलकर यमुना नदी पर पड़ रहा है।
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यमुना नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्षेत्र के लोगों के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना किनारे पूजा-अर्चना करने और माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में नहर और नदी में सीवेज छोड़े जाने से लोगों की आस्था के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जिस जल को वे पवित्र मानते हैं, वही जल धीरे-धीरे विषैला बनता जा रहा है।
यमुना स्वच्छ अभियान चलाने वाले महेंद्र मित्तल का कहना है कि इस गंभीर समस्या की ओर संबंधित विभागों का कोई ध्यान नहीं है। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद न तो एसटीपी के संचालन में सुधार हुआ और न ही गंदे पानी के शोधन की प्रभावी निगरानी की जा रही है। यदि समय रहते इस ओर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका खामियाजा आने वाले समय में पर्यावरण के साथ-साथ आमजन के स्वास्थ्य को भी भुगतना पड़ सकता है।
हमारे सभी एसटीपी चल रहे हैं। बाड़ीमाजरा वाले में थोड़ी दिक्कत आ रही है। ऐसे में बाड़ी माजरा के दूसरे एसटीपी से पानी को डायवर्ट करने के बाद ही यमुना में डाला जा रहा है। -दिनेश गाबा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।

एसटीपी का गंदा पानी नहर में गिरने से न दिखे लगाई गई झाड़ियां। संवाद