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Yamuna Nagar News: डेंगू का बढ़ रहा दायरा, 613 में से 265 गांवों ने ही ली फॉगिंग की दवाई
Sat, 23 Nov 2024 05:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 23 Nov 2024 05:20 AM IST
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यमुनानगर। डेंगू का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। जिले में डेंगू के रोजाना पांच से सात केस मिल रहे हैं। तीन दिनों में ही डेंगू के 19 केस मिल चुके हैं। इसके बावजूद ग्राम पंचायतें फॉगिंग कराने से किनारा कर रही हैं। जबकि जिले में कुल गांवों की संख्या 655 है। इनमें से 42 गांव नगर निगम में शामिल हैं। इस तरह शेष 613 गांव बचते हैं। स्वास्थ्य विभाग से केवल 265 लीटर दवाई ही फॉगिंग के लिए सरपंच लेकर गई हैं। 348 गांव ऐसे हैं जिनमें फॉगिंग हुई भी या नहीं इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। जिस कारण गांवों में भी डेंगू का मच्छर लगातार लोगों को डंक मार रहा है। जिले में अब तक डेंगू के कुल 149 केस मिल चुके हैं। फॉगिंग न होने से यह भी पता चलता है कि जिला प्रशासन व पंचायत विभाग बीमारियों की रोकथाम को लेकर कितना गंभीर है। इसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। डेंगू से ग्रस्त होकर मरीज अपना उपचार निजी अस्पतालों में कराने को मजबूर हो गए हैं।
अभी तक डेंगू के जो 149 केस आए हैं उनमें शहरी क्षेत्र में 72 केस शहरी क्षेत्र से मिले हैं। जबकि गांवों में इससे ज्यादा 77 केस मिले हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में फॉगिंग कराने के नाम पर लापरवाही बरती जा रही है। जिला प्रशासन का पूरा ध्यान केवल शहरी क्षेत्र पर है। इतना ही नहीं 265 गांवों के प्रतिनिधि स्वास्थ्य विभाग से जो दवाई लेकर गए हैं उससे फॉगिंग हुई भी है या नहीं यह भी तय नहीं है। क्योंकि सरपंच इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी नहीं देते। कुछ जागरूक सरपंच हैं जो फॉगिंग की फोटो खींच कर उसे अधिकारियों के साथ ग्रुप में शेयर कर रहे हैं। फॉगिंग कराने का कोई रिकॉर्ड स्वास्थ्य और पंचायत विभाग के पास मौजूद नहीं हैं।
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पांच लीटर डीजल में मिलाई जाती है 250 एमएल दवा:
कहीं भी फॉगिंग करने के लिए एक बार में मशीन में पांच लीटर डीजल का इस्तेमाल होता है। पांच लीटर डीजल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई 250 एमएल दवा मिलाई जाती है। विभाग के अनुसार मशीन एक बार स्टार्ट होने के बाद केवल 30 मिनट ही चलती है। यदि कोई गांव बड़ा है तो उसमें दो से तीन बार भी मशीन चलानी पड़ जाती है। इस तरह से यदि एक लीटर दवा एक गांव को भी दी जाए गई तो 265 गांव ही फॉगिंग में कवर हुए हैं। एक लीटर दवा से पूरे गांव में दो से तीन बार ही फॉगिंग हो पाती है।
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615 लीटर दवा दे चुके हैं: सुशीला सैनी
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग 615 लीटर दवा दे चुका है। इसमें से 350 लीटर दवा नगर निगम व 265 लीटर ग्राम पंचायतों को दी है। पंचायत विभाग को भी अपने स्तर पर फॉगिंग के लिए दवाई खरीदनी थी। जहां भी डेंगू का केस मिलता है वहां पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फॉगिंग कराई जाती है। स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त दवाई मौजूद है। जब हम मुफ्त में दवाई दे रहे हैं तो बाहर से खरीदने की जरूरत नहीं है।
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डीडीपीओ का सभी गांवों में फॉगिंग का दावा
डीडीपीओ नरेंद्र सिंह का कहना है कि पंचायत विभाग ने इस बार फॉगिंग के लिए कोई दवाई नहीं खरीदी है। स्वास्थ्य विभाग से दवाई ली गई थी। पंचायतों को बोला गया था कि यदि उन्हें दवाई नहीं मिलती तो वह बाहर दुकान से खरीद सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी गांवों में दो से तीन बार फॉगिंग हो चुकी है।
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अभी तक डेंगू के जो 149 केस आए हैं उनमें शहरी क्षेत्र में 72 केस शहरी क्षेत्र से मिले हैं। जबकि गांवों में इससे ज्यादा 77 केस मिले हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में फॉगिंग कराने के नाम पर लापरवाही बरती जा रही है। जिला प्रशासन का पूरा ध्यान केवल शहरी क्षेत्र पर है। इतना ही नहीं 265 गांवों के प्रतिनिधि स्वास्थ्य विभाग से जो दवाई लेकर गए हैं उससे फॉगिंग हुई भी है या नहीं यह भी तय नहीं है। क्योंकि सरपंच इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी नहीं देते। कुछ जागरूक सरपंच हैं जो फॉगिंग की फोटो खींच कर उसे अधिकारियों के साथ ग्रुप में शेयर कर रहे हैं। फॉगिंग कराने का कोई रिकॉर्ड स्वास्थ्य और पंचायत विभाग के पास मौजूद नहीं हैं।
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पांच लीटर डीजल में मिलाई जाती है 250 एमएल दवा:
कहीं भी फॉगिंग करने के लिए एक बार में मशीन में पांच लीटर डीजल का इस्तेमाल होता है। पांच लीटर डीजल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई 250 एमएल दवा मिलाई जाती है। विभाग के अनुसार मशीन एक बार स्टार्ट होने के बाद केवल 30 मिनट ही चलती है। यदि कोई गांव बड़ा है तो उसमें दो से तीन बार भी मशीन चलानी पड़ जाती है। इस तरह से यदि एक लीटर दवा एक गांव को भी दी जाए गई तो 265 गांव ही फॉगिंग में कवर हुए हैं। एक लीटर दवा से पूरे गांव में दो से तीन बार ही फॉगिंग हो पाती है।
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615 लीटर दवा दे चुके हैं: सुशीला सैनी
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग 615 लीटर दवा दे चुका है। इसमें से 350 लीटर दवा नगर निगम व 265 लीटर ग्राम पंचायतों को दी है। पंचायत विभाग को भी अपने स्तर पर फॉगिंग के लिए दवाई खरीदनी थी। जहां भी डेंगू का केस मिलता है वहां पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फॉगिंग कराई जाती है। स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त दवाई मौजूद है। जब हम मुफ्त में दवाई दे रहे हैं तो बाहर से खरीदने की जरूरत नहीं है।
डीडीपीओ का सभी गांवों में फॉगिंग का दावा
डीडीपीओ नरेंद्र सिंह का कहना है कि पंचायत विभाग ने इस बार फॉगिंग के लिए कोई दवाई नहीं खरीदी है। स्वास्थ्य विभाग से दवाई ली गई थी। पंचायतों को बोला गया था कि यदि उन्हें दवाई नहीं मिलती तो वह बाहर दुकान से खरीद सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी गांवों में दो से तीन बार फॉगिंग हो चुकी है।