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Yamuna Nagar News: महंगे चारे और बढ़ते खर्च से डेयरी कारोबार पर संकट
Sun, 21 Jun 2026 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 21 Jun 2026 01:20 AM IST
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दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में पशुओं को नहलाते संचालक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर।
पशुओं के चारे, भूसे और फीड की लगातार बढ़ती कीमतों ने डेयरी संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती महंगाई के कारण कारोबार चलाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। चारा, भूसा और फीड के महंगे होने के साथ-साथ बिजली बिल, मजदूरी और पशुओं के रखरखाव पर बढ़ता खर्च सीधे तौर पर दूध उत्पादन लागत को प्रभावित कर रहा है।
शहर के सबसे बड़े दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में 162 डेयरी संचालक हैं। डेयरी संचालकों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल के लिए फर्राटा पंखे, पानी की फुहार और अन्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। इसके बावजूद गर्मी के कारण दूध उत्पादन क्षमता में कमी आ जाती है। कुछ समय पहले दूध के दाम बढ़े जरूर थे, लेकिन बढ़ती लागत के कारण इसका अपेक्षित लाभ डेयरी संचालकों को नहीं मिल पाया।
प्रधान जितेंद्र लांबा, कुलदीप मेहता ने कहा कि खल की बोरी 2100 रुपये से बढ़कर 2250 रुपये, चने की चुरी 3200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 3600 रुपये तथा फीड 1610 रुपये से बढ़कर 1740 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है। भूसे का दाम 450 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 950 रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में भूसे के दाम 1100 से 1200 रुपये तक पहुंचने से कई डेयरियां बंद हो गई थीं और 162 में से केवल 98 डेयरियां ही बची थीं। हालांकि प्रशासन और नगर निगम के सहयोग से वर्तमान में आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर हैं।
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पशुओं के चारे और भूसे की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। खल, फीड और चने की चुरी के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। अगर समय रहते राहत नहीं मिली तो छोटे डेयरी संचालकों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। - जितेंद्र लांबा, दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स।
बिजली बिल, मजदूरी और पशुओं के रखरखाव पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। पहले की तुलना में मुनाफा कम हो गया है। सरकार को डेयरी क्षेत्र के लिए विशेष राहत योजनाएं लागू करनी चाहिए ताकि छोटे पशुपालकों को सहारा मिल सके। - संजय पाहवा, डेयरी संचालक।
गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। पंखे, पानी की फुहार और बिजली पर खर्च बढ़ जाता है। इसके बावजूद दूध उत्पादन कम हो जाता है, जिससे आय और खर्च के बीच संतुलन बनाना कठिन हो रहा है। - कुलदीप मेहता, डेयरी संचालक।
दूध के दाम बढ़ने के बावजूद उसका फायदा डेयरी संचालकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। चारा और फीड की बढ़ती कीमतें सारा लाभ खत्म कर देती हैं। ऐसे हालात में कारोबार को बनाए रखना चुनौती बन गया है। - मिंटू महना, डेयरी संचालक।
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यमुनानगर।
पशुओं के चारे, भूसे और फीड की लगातार बढ़ती कीमतों ने डेयरी संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती महंगाई के कारण कारोबार चलाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। चारा, भूसा और फीड के महंगे होने के साथ-साथ बिजली बिल, मजदूरी और पशुओं के रखरखाव पर बढ़ता खर्च सीधे तौर पर दूध उत्पादन लागत को प्रभावित कर रहा है।
शहर के सबसे बड़े दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में 162 डेयरी संचालक हैं। डेयरी संचालकों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल के लिए फर्राटा पंखे, पानी की फुहार और अन्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। इसके बावजूद गर्मी के कारण दूध उत्पादन क्षमता में कमी आ जाती है। कुछ समय पहले दूध के दाम बढ़े जरूर थे, लेकिन बढ़ती लागत के कारण इसका अपेक्षित लाभ डेयरी संचालकों को नहीं मिल पाया।
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प्रधान जितेंद्र लांबा, कुलदीप मेहता ने कहा कि खल की बोरी 2100 रुपये से बढ़कर 2250 रुपये, चने की चुरी 3200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 3600 रुपये तथा फीड 1610 रुपये से बढ़कर 1740 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है। भूसे का दाम 450 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 950 रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में भूसे के दाम 1100 से 1200 रुपये तक पहुंचने से कई डेयरियां बंद हो गई थीं और 162 में से केवल 98 डेयरियां ही बची थीं। हालांकि प्रशासन और नगर निगम के सहयोग से वर्तमान में आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर हैं।
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पशुओं के चारे और भूसे की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। खल, फीड और चने की चुरी के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। अगर समय रहते राहत नहीं मिली तो छोटे डेयरी संचालकों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। - जितेंद्र लांबा, दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स।
बिजली बिल, मजदूरी और पशुओं के रखरखाव पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। पहले की तुलना में मुनाफा कम हो गया है। सरकार को डेयरी क्षेत्र के लिए विशेष राहत योजनाएं लागू करनी चाहिए ताकि छोटे पशुपालकों को सहारा मिल सके। - संजय पाहवा, डेयरी संचालक।
गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। पंखे, पानी की फुहार और बिजली पर खर्च बढ़ जाता है। इसके बावजूद दूध उत्पादन कम हो जाता है, जिससे आय और खर्च के बीच संतुलन बनाना कठिन हो रहा है। - कुलदीप मेहता, डेयरी संचालक।
दूध के दाम बढ़ने के बावजूद उसका फायदा डेयरी संचालकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। चारा और फीड की बढ़ती कीमतें सारा लाभ खत्म कर देती हैं। ऐसे हालात में कारोबार को बनाए रखना चुनौती बन गया है। - मिंटू महना, डेयरी संचालक।

दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में पशुओं को नहलाते संचालक। संवाद

दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में पशुओं को नहलाते संचालक। संवाद

दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में पशुओं को नहलाते संचालक। संवाद

दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में पशुओं को नहलाते संचालक। संवाद