Yamuna Nagar News: यमुना के पानी में डूबी फसलें, आंखों में कटी रात
यमुनानगर। पहाड़ों से निकल कर मैदानी क्षेत्र में बह रही यमुना नदी तटवर्ती क्षेत्रों में लगातार भूमि कटाव कर रही है। कलेसर व टापू कमालपुर में 100 एकड़ से ज्यादा भूमि में खड़ी फसलें पानी के बहाव से तबाह हो चुकी। ऐसा ही कुछ हाल शहर से सटे गांव छोटा लापरा का भी है। यहां यमुना का पानी आबादी में कम है, लेकिन ओवरफ्लो होकर गांव की मुख्य सड़क व खेतों में घुस चुका है। वहीं लोगों की रात जागते हुए कटी।
जिले में में 150 एकड़ से ज्यादा फसलें पूरी तरह जलमग्न है। लापरा गांव के दूसरी छोर जाने का रास्ता भी पूरी तरह से बंद हो चुका। सड़क पर डेढ़ से दो फीट तक पानी जमा है। पानी के कारण पशुओं का चारा खराब हो गया। वहीं, लापरा गांव के कई ग्रामीणों का राशन खत्म हो चुका। गांव के मुहाने से गुजर रही यमुना के तेज बहाव को देख लोग रातभर सोये नहीं।
ग्रामीण यमुना को शांत करने के लिए गांव लापरा के ग्रामीण किनारे पर पहुंच कर प्रार्थना कर रहे हैं। ग्रामीण महबूब, सुरेंद्र, सींटू का कहना है हर साल उन्हें यमुना के बाढ़ के पानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वे कहां जाएं। संवाद
टापू कमालपुर गांव भूमि कटाव से डेढ़ एकड़ दूर
इस वक्त सबसे ज्यादा खतरा टापू कमालपुर गांव को है। यहां यमुना नदी गांव से मात्र डेढ़ एकड़ दूरी से बह रही है और इसी एरिया में इस वक्त सबसे ज्यादा भूमि कटाव हो रहा है। पिछले साल सिंचाई विभाग की तरफ से भूमि कटाव को रोकने के लिए 9.70 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए 13 बांध भी पानी के बहाव को रोक नहीं पाए। वे भी बह गए। ऐसे में पानी भूमि कटाव करते हुए गांव की तरफ बढ़ रहा हे। लोग पानी के बहाव को अपनी तरफ बढ़ता देख रात भर से सोये नहीं। लोगों ने पिछले साल की तरह अपना सामान को समेटना शुरू कर दिया है। उधर, ग्रामीण विकास राणा ने बताया कि हर साल यमुना के बहाव से भूमि कटाव होता है, लेकिन प्रशासन देरी से जागता है।
बचाने के लिए पॉपुलर के पेड़ काट रहे किसान
टापू कमालपुर में यमुना के पानी हो रहे तेजी से भूमि कटाव के कारण पॉपुलर की खेती समा रही है। ऐसे में अपने बचे पॉपुलर के पेड़ों को बचाने के लिए किसान उन्हें खुद ही काटने लगे हैं। उधर, भूमि कटाव की सूचना मिलते ही डीसी पार्थ गुप्ता, एसपी कमलदीप गोयल सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। कटाव को लेकर ग्रामीणों में काफी गुस्सा देखा गया। उन्होंने बातों-बातों में अधिकारियों को जमकर सुनाई। इसके बाद प्रशासन द्वारा मौके पर कट्टे लेकर कर्मचारियों को भेजा गया। लेकिन जो भी कट्टे मिट्टी से भरे यमुना में डाले जा रहे, वहीं भी किनारों पर टीक नहीं पा रहे। कलेसर में प्रस्तावित इस्कान मंदिर की सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवार को बाढ का पानी क्रॉस कर खेतों में घुस गया है।
बाढ़ पीड़ित लोग नियंत्रण कक्षों से लें मदद
जिला सचिवालय में जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। इस बाढ़ नियंत्रण कक्ष में लगे टेलीफोन नंबर 01732-237801 पर, सब डिवीजन कार्यालय रादौर में स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष के इंचार्ज एसडीएम कार्यालय के अधीक्षक को बनाया गया है व इस बाढ़ नियंत्रण कक्ष का टेलीफोन नंबर 01732-283899 है। सब डिवीजन व्यासपुर के बाढ़ नियंत्रण कक्ष का टेलीफोन नंबर 01735-297588 है। उपमंडल छछरौली के कार्यालय में स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर 01735-293400 है। नगर निगम में स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर 01732-237841 व मोबाइल नम्बर 9810336887 पर बाढ़ संबंधी जानकारी देकर मदद ले सकते है।

टापू कमालपुर के मुहाने से बह रही यमुना नदी उफान पर है जिसकी वजह से ग्रामीणों में दहशत का माहौल

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