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नदी में दबी मिली बाढ में बही ट्रैक्टर-ट्रालियां
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:49 PM IST
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बाढ़
- फोटो : amar ujala
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यमुना नदी में उफान शांत हुआ तो तल में बाढ़ की विभीषिका नजर आई। बाढ़ के दौरान नदी में बहे छह ट्रैक्टर-ट्राली कुछ दूरी पर मिल गए, लेकिन पानी व पत्थरों की मार से वे कबाड़ हो गए हैं। नदी में बने गड्ढों में फंसे ट्रैक्टर-ट्राली ऊपर तक पत्थरों व सिल्ट से अटे हुए थे, जिन्हें जेसीबी मशीनों से बड़ी मुश्किल से निकाला गया।
वीरवार को यमुना नदी में पानी कम हुआ तो नदी में ट्रैक्टर-ट्रालियों के मालिकों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। नदी में आई बाढ़ के दौरान पानी का बहाव इतना तेज था कि ट्रैक्टर-ट्रालियां सौ से दो सौ मीटर दूरी पर जमीन में धंसे मिलें। दो-तीन ट्रैक्टर नदी में अवैध खनन से बने गहरे गड्ढों में पूरी तरह धंसे हुए थे। इन्हें मजदूरों की मदद से निकाल पाना संभव नहीं था, इसलिए जेसीबी मशीन मंगवाकर बाहर निकाला गया। कई घंटों तक पानी में डूबे रहने व पत्थरों की मार से ट्रैक्टर-ट्रालियां कबाड़ हो गए हैं।
जेसीबी मशीन लगाने के बावजूद कई घंटों की मशक्कत के बाद गड्ढो में फंसे ट्रैक्टर-ट्रालियों को निकाला जा सका। गौरतलब है कि बुधवार को यमुना नदी में बाढ़ आने पर नदी में मौजूद छह ट्रैक्टर-ट्रालियां पानी में बह गई थी। ये ट्रैक्टर-ट्रालियां बल्लेवाला के पप्पू, भूरा व शिवकुमार, मांडेवाला के राजकुमार, भूड़कला के रामकिशन व गिरिजा की थी। इसके अलावा बल्लेवाला के ऋषि व सोनू की रेहड़ियां भी पानी में बह गई। वहीं, सात मजदूर नदी में बने टीले पर फंस गए थे, जिन्हें वायुसेना के हेलीकाप्टर की मदद से बाहर निकाला गया था।
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- बाढ़ के निशान से नीचे आई यमुना
बुधवार को इस मानसून में सबसे अधिक जलस्तर पर पहुंच चुकी यमुना नदी का पानी वीरवार को बाढ़ के स्तर से नीचे आ गया। इससे हथनीकुंड बैराज से हरियाणा की पश्चिमी यमुना नहर व उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर में पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई। इन दोनों नहरों की पानी की मांग पूरी होने के बाद शेष पानी यमुना नदी से गुजरा। सिंचाई विभाग के मुताबिक वीरवार को यमुना नदी में अधिकतम जलस्तर सुबह आठ व नौ बजे 36560 क्यूसिक रिकार्ड किया गया।
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वीरवार को यमुना नदी में पानी कम हुआ तो नदी में ट्रैक्टर-ट्रालियों के मालिकों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। नदी में आई बाढ़ के दौरान पानी का बहाव इतना तेज था कि ट्रैक्टर-ट्रालियां सौ से दो सौ मीटर दूरी पर जमीन में धंसे मिलें। दो-तीन ट्रैक्टर नदी में अवैध खनन से बने गहरे गड्ढों में पूरी तरह धंसे हुए थे। इन्हें मजदूरों की मदद से निकाल पाना संभव नहीं था, इसलिए जेसीबी मशीन मंगवाकर बाहर निकाला गया। कई घंटों तक पानी में डूबे रहने व पत्थरों की मार से ट्रैक्टर-ट्रालियां कबाड़ हो गए हैं।
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जेसीबी मशीन लगाने के बावजूद कई घंटों की मशक्कत के बाद गड्ढो में फंसे ट्रैक्टर-ट्रालियों को निकाला जा सका। गौरतलब है कि बुधवार को यमुना नदी में बाढ़ आने पर नदी में मौजूद छह ट्रैक्टर-ट्रालियां पानी में बह गई थी। ये ट्रैक्टर-ट्रालियां बल्लेवाला के पप्पू, भूरा व शिवकुमार, मांडेवाला के राजकुमार, भूड़कला के रामकिशन व गिरिजा की थी। इसके अलावा बल्लेवाला के ऋषि व सोनू की रेहड़ियां भी पानी में बह गई। वहीं, सात मजदूर नदी में बने टीले पर फंस गए थे, जिन्हें वायुसेना के हेलीकाप्टर की मदद से बाहर निकाला गया था।
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- बाढ़ के निशान से नीचे आई यमुना
बुधवार को इस मानसून में सबसे अधिक जलस्तर पर पहुंच चुकी यमुना नदी का पानी वीरवार को बाढ़ के स्तर से नीचे आ गया। इससे हथनीकुंड बैराज से हरियाणा की पश्चिमी यमुना नहर व उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर में पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई। इन दोनों नहरों की पानी की मांग पूरी होने के बाद शेष पानी यमुना नदी से गुजरा। सिंचाई विभाग के मुताबिक वीरवार को यमुना नदी में अधिकतम जलस्तर सुबह आठ व नौ बजे 36560 क्यूसिक रिकार्ड किया गया।