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अधिसूचित शहरी क्षेत्र में काट दी कॉलोनी, दो कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
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यमुनानगर। बिना लाइसेंस के अवैध रूप से कॉलोनी काटने के मामले में डीटीपी की तरफ से बड़ी कार्रवाई की गई है। जगाधरी शहर के करीब स्थित परवालों गांव में अनधिकृत कॉलोनी काटने वाले दो कॉलोनाइजरों के खिलाफ हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्र अधिनियम के उल्लंघन में मुकदमा दर्ज किया गया है। डीटीपी अमित मधोलिया की शिकायत पर बुडिया थाना पुलिस ने एफआईआर में पिंजौर की एचएमटी कॉलोनी निवासी गुरदास और गांव परवालों निवासी मंगतराम को नामजद किया है।
पुलिस को दी शिकायत में डीटीपी ने बताया है कि परवालों गांव की राजस्व संपत्ति यमुनागर-जगाधरी शहरी क्षेत्र के रूप में नोटिफाइड है। इसे हरियाणा विकास और विनियमन के शहरी क्षेत्र अधिनियम, 1975 की धारा 7-ए (1975 के अधिनियम संख्या 8) के तहत घोषित किया गया था। इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति लाइसेंस प्राप्त किए बिना एक अधिसूचित शहरी क्षेत्र में भूखंडों की खरीद-फरोख्त, प्लॉटिंग या किसी तरह का निर्माण नहीं कर सकता। इसके लिए परमीशन लेना जरूरी होता है। जबकि इस जमीन के लिए कोई लाइसेंस जारी नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने कृषि भूमि पर अनधिकृत निर्माण को बढ़ावा दिया और सड़कें तक बना दी। उनके कार्यालय ने कॉलोनी की नक्काशी के लिए सक्षम प्राधिकारी से मांगी गई किसी भी अनुमति के संबंध में संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बावजूद इसके उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। जब वे कारण बताओ नोटिस का जवाब देने में विफल रहे तो 9 अप्रैल 2019 को एक टीम द्वारा एक अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया और अनाधिकृत कॉलोनी की सड़कों और डीपीसी को ध्वस्त कर दिया गया।
कई और कॉलोनियां भी निशाने पर
अवैध कॉलोनियां काटने वालों पर डीपीटी ने नकेल कसनी शुरू कर दी है। अवैध कॉलोनियों पर ब्रेक लगाने के लिए कॉलोनाइजरों से पहले जमीन के मालिक को आइडेंटीफाई कर उसके खिलाफ भी एफआइआर दर्ज करवाने का फैसला लिया है। विभाग के अधिकारियों ने शहर के आसपास तेजी से काटी जा रही अवैध कॉलोनियों का रेवेन्यू रिकार्ड खंगालकर उनके जमीन के मालिकों ढूंढ़ना शुरू कर दिया है। वहीं जमीन मालिकों से कॉलोनाइजरों के बारे में पूछकर उनके नाम भी एफआईआर में शामिल करवाए जाएंगे।
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अपने नाम नहीं करवाते जमीन की रजिस्ट्री
दरअसल कॉलोनाइजर बिना अनुमति के कॉलोनी काट रहे हैं। कई मामलों में वे जमीदारों से जमीन तो खरीद लेते हैं, लेकिन रजिस्ट्री अपने नाम नहीं करवाते। बल्कि सीधे प्लॉट खरीदने वालों की रजिस्ट्री करवाते हैं। इससे जहां वह सरकार के रेवेन्यू को चूना लगाते हैं, वहीं ऐसा करने से वह कानूनी कार्रवाई से भी बच जाते हैं, क्योंकि रेवेन्यू विभाग के पास कॉलोनाइजर का कोई रिकार्ड नहीं होता।
हमने अवैध कॉलोनियों पर नकेल कसने के लिए एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू की है। परवालों में अनधिकृत रूप से कॉलोनी काटी जा रही थी। पहले उन्हें शोकॉज नोटिस दिया गया था, उन्होंने कोई जवाब नहीं तो अवैध निर्माण गिराएं गए थे। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस को करनी है।
-अमित मधोलिया, डीटीपी।
पुलिस को दी शिकायत में डीटीपी ने बताया है कि परवालों गांव की राजस्व संपत्ति यमुनागर-जगाधरी शहरी क्षेत्र के रूप में नोटिफाइड है। इसे हरियाणा विकास और विनियमन के शहरी क्षेत्र अधिनियम, 1975 की धारा 7-ए (1975 के अधिनियम संख्या 8) के तहत घोषित किया गया था। इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति लाइसेंस प्राप्त किए बिना एक अधिसूचित शहरी क्षेत्र में भूखंडों की खरीद-फरोख्त, प्लॉटिंग या किसी तरह का निर्माण नहीं कर सकता। इसके लिए परमीशन लेना जरूरी होता है। जबकि इस जमीन के लिए कोई लाइसेंस जारी नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने कृषि भूमि पर अनधिकृत निर्माण को बढ़ावा दिया और सड़कें तक बना दी। उनके कार्यालय ने कॉलोनी की नक्काशी के लिए सक्षम प्राधिकारी से मांगी गई किसी भी अनुमति के संबंध में संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बावजूद इसके उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। जब वे कारण बताओ नोटिस का जवाब देने में विफल रहे तो 9 अप्रैल 2019 को एक टीम द्वारा एक अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया और अनाधिकृत कॉलोनी की सड़कों और डीपीसी को ध्वस्त कर दिया गया।
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कई और कॉलोनियां भी निशाने पर
अवैध कॉलोनियां काटने वालों पर डीपीटी ने नकेल कसनी शुरू कर दी है। अवैध कॉलोनियों पर ब्रेक लगाने के लिए कॉलोनाइजरों से पहले जमीन के मालिक को आइडेंटीफाई कर उसके खिलाफ भी एफआइआर दर्ज करवाने का फैसला लिया है। विभाग के अधिकारियों ने शहर के आसपास तेजी से काटी जा रही अवैध कॉलोनियों का रेवेन्यू रिकार्ड खंगालकर उनके जमीन के मालिकों ढूंढ़ना शुरू कर दिया है। वहीं जमीन मालिकों से कॉलोनाइजरों के बारे में पूछकर उनके नाम भी एफआईआर में शामिल करवाए जाएंगे।
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अपने नाम नहीं करवाते जमीन की रजिस्ट्री
दरअसल कॉलोनाइजर बिना अनुमति के कॉलोनी काट रहे हैं। कई मामलों में वे जमीदारों से जमीन तो खरीद लेते हैं, लेकिन रजिस्ट्री अपने नाम नहीं करवाते। बल्कि सीधे प्लॉट खरीदने वालों की रजिस्ट्री करवाते हैं। इससे जहां वह सरकार के रेवेन्यू को चूना लगाते हैं, वहीं ऐसा करने से वह कानूनी कार्रवाई से भी बच जाते हैं, क्योंकि रेवेन्यू विभाग के पास कॉलोनाइजर का कोई रिकार्ड नहीं होता।
हमने अवैध कॉलोनियों पर नकेल कसने के लिए एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू की है। परवालों में अनधिकृत रूप से कॉलोनी काटी जा रही थी। पहले उन्हें शोकॉज नोटिस दिया गया था, उन्होंने कोई जवाब नहीं तो अवैध निर्माण गिराएं गए थे। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस को करनी है।
-अमित मधोलिया, डीटीपी।