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दो हजार की रिश्वत लेते पकड़े शिक्षा विभाग के सेक्शन ऑफिसर को चार साल की कैद
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश राजिद्र पाल सिंह की कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद महिला प्राध्यापिका से पेंशन लगवाने की एवज में दो हजार की रिश्वत लेने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सेक्शन आफिसर (एसओ) सेक्टर 18 निवासी श्रवण कुमार को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी को चार साल की कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। राज्य चौकसी ब्यूरो पंचकूला थाना ने 21 जुलाई 2017 को सेवानिवृत प्राध्यापिका के पति सरस्वती नगर निवासी बलदेव राज की शिकायत पर केस दर्ज किया था। तब पुलिस ने श्रवण कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तब से मामला कोर्ट में चल रहा था।
सरस्वती नगर निवासी बलदेव राज ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी पत्नी राजरानी जनता सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पंजाबी की प्राध्यापिका थी। उसकी पत्नी 31 मार्च 2017 को स्कूल से सेवानिवृत हो गई थी। सेवानिवृत होने के बाद उसकी पत्नी से पेंशन लगवाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सेक्शन आफिसर श्रवण कुमार ने पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसके बाद उन्हें पहले 3 हजार रुपये दिए थे। बलदेव ने बताया कि उनपर दो हजार रुपये देने के लिए अधिकारी ने बार-बार फोन करने शुरू कर दिए। जिससे परेशान होकर उन्होंने उसे रंगे हाथों पकड़वाने की योजना बनाई और इसकी शिकायत राज्य चौकसी ब्यूरो के उपक्रम कार्यालय में निरीक्षक राजेश कुमार को दी और उन्हें पूरी घटना के बारे में अवगत कराया। तब मामले की सूचना उपायुक्त व अन्य अधिकारियों को दी गई। उपायुक्त के निर्देश पर 21 जुलाई 2017 को तहसीलदार दर्शन कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया और टीम का गठन कर सेक्शन ऑफिसर को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। योजना के अनुसार बलदेव राज को पांच-पांच सौ के चार नोटों के नंबर नोट किए गए। इसके बाद बलदेव राज को रुपये देकर भेजा गया। बलदेव राज ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में श्रवण कुमार को दो हजार रुपये दिए और टीम को इशारा कर दिया। इशारा मिलने पर टीम ने दबिश देकर श्रवण कुमार की जेब से रिश्वत के दो हजार रुपये बरामद किए। अब अदालत ने इस मामले में सेक्शन ऑफिसर श्रवण कुमार को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
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सरस्वती नगर निवासी बलदेव राज ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी पत्नी राजरानी जनता सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पंजाबी की प्राध्यापिका थी। उसकी पत्नी 31 मार्च 2017 को स्कूल से सेवानिवृत हो गई थी। सेवानिवृत होने के बाद उसकी पत्नी से पेंशन लगवाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सेक्शन आफिसर श्रवण कुमार ने पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसके बाद उन्हें पहले 3 हजार रुपये दिए थे। बलदेव ने बताया कि उनपर दो हजार रुपये देने के लिए अधिकारी ने बार-बार फोन करने शुरू कर दिए। जिससे परेशान होकर उन्होंने उसे रंगे हाथों पकड़वाने की योजना बनाई और इसकी शिकायत राज्य चौकसी ब्यूरो के उपक्रम कार्यालय में निरीक्षक राजेश कुमार को दी और उन्हें पूरी घटना के बारे में अवगत कराया। तब मामले की सूचना उपायुक्त व अन्य अधिकारियों को दी गई। उपायुक्त के निर्देश पर 21 जुलाई 2017 को तहसीलदार दर्शन कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया और टीम का गठन कर सेक्शन ऑफिसर को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। योजना के अनुसार बलदेव राज को पांच-पांच सौ के चार नोटों के नंबर नोट किए गए। इसके बाद बलदेव राज को रुपये देकर भेजा गया। बलदेव राज ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में श्रवण कुमार को दो हजार रुपये दिए और टीम को इशारा कर दिया। इशारा मिलने पर टीम ने दबिश देकर श्रवण कुमार की जेब से रिश्वत के दो हजार रुपये बरामद किए। अब अदालत ने इस मामले में सेक्शन ऑफिसर श्रवण कुमार को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
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