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दहेज प्रताडना के दोषी वकील व उसकी मां को दो साल कैद
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Wed, 03 Feb 2016 12:23 AM IST
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विवाहिता के साथ मारपीट करने व दहेज के लिए प्रताड़ित करने के दोषी करनाल के सेक्टर-14 निवासी वकील राजन गुप्ता (पीड़िता का पति ) व उसकी मां कृष्णा (पीड़िता की सास) को कोर्ट ने दो साल कैद तथा 2500-2500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश डॉ. नरेश सिंहल की कोर्ट ने सुनाया है। ध्यान रहे कि उपरोक्त मामला हाई कोर्ट के आदेश पर करनाल कोर्ट से ट्रांसफर होकर स्थानीय कोर्ट में आया था। कोर्ट में करीब चार साल चली सुनवाई के दौरान दर्जन भर लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत कोर्ट ने 30 जनवरी को उपरोक्त फैसला सुनाया।
करनाल के सेक्टर 13 निवासी रजनी ने 20 सितंबर 2011 को करनाल पुलिस को शिकायत दी थी कि 12 सितंबर 2010 को उसकी शादी शहर के एक होटल में सेक्टर 14 निवासी राजन गुप्ता से हुई थी। शादी में उसके परिजनों ने हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। पीड़िता का आरोप था कि शादी के कुछ समय बाद उसके पति राजन व सास कृष्णा ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
साथ ही सास ने उसके घरेलू काम में कमी निकाली शुरू कर दी। पुलिस को दी शिकायत में रजनी ने कहा कि अक्टूबर में पति ने उससे दो लाख रुपए की मांग की। जिसे वह पूरा नहीं कर पाई। पति व सास द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने की बात को उसने अपने परिजनों को बताया। जिसके उपरांत उसकी मां ने उसके ससुरालियों को समझाया। जिसके उपरांत वे कुछ दिनों तक ठीक रहे। पीड़िता के मुताबिक उसकी मां ने उसके ससुराल पक्ष के लोगों को एक लाख रुपये भी दिए। इसके बाद भी उसके ससुराल पक्ष के लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। पीड़िता के मुताबिक उसके पति व सास ने उसके साथ मारपीट की और उसे घर से निकाल दिया। करनाल पुलिस ने उपरोक्त दोनों के खिलाफ दहेज प्रताडना का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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एडवोकेट की दूसरी पत्नी थी रजनी
शिकायकर्ता के मुताबिक वह एडवोकेट राजन गुप्ता की दूसरी पत्नी थी। पति व सास द्वारा जब उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, तो उसने उनका विरोध किया। पीड़िता के मुताबिक उसे घर में डरा धमका कर रखा जाता था। साथ ही उसे बड़े रसूखदार लोगों से जानकारी होने की बात कहकर शिकायत न करने का दबाव भी बनाया जाता था।
करनाल से ट्रांसफर होकर जगाधरी आया था केस
सरकारी वकील बलजीत सिंह के मुताबिक करनाल के एडवोकेट राजन गुप्ता से संबंधित केस करनाल कोर्ट से ट्रांसफर होकर जगाधरी कोर्ट में आया था। एडवोकेट राजन गुप्ता में हाई कोर्ट में अर्जी दी थी कि उसे करनाल कोर्ट में इंसाफ नहीं मिल सकता। इसलिए उसके केस को ट्रांसफर कर दिया जाए। सरकारी वकील के मुताबिक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश डॉ. नरेश कुमार सिंहल की कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए करनाल के सेक्टर 14 निवासी एडवोकेट राजन गुप्ता व उसकी मां कृष्णा को भादंसं की धारा 498 ए के तहत दोषी करार देते हुए दो साल कैद तथा 2000-2000 रुपये जुर्माने की सजा सुना दी तथा भादंसं की धारा 323 में तीन माह की सजा तथा 500-500 रुपये जुर्माना किया है।
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करनाल के सेक्टर 13 निवासी रजनी ने 20 सितंबर 2011 को करनाल पुलिस को शिकायत दी थी कि 12 सितंबर 2010 को उसकी शादी शहर के एक होटल में सेक्टर 14 निवासी राजन गुप्ता से हुई थी। शादी में उसके परिजनों ने हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। पीड़िता का आरोप था कि शादी के कुछ समय बाद उसके पति राजन व सास कृष्णा ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
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साथ ही सास ने उसके घरेलू काम में कमी निकाली शुरू कर दी। पुलिस को दी शिकायत में रजनी ने कहा कि अक्टूबर में पति ने उससे दो लाख रुपए की मांग की। जिसे वह पूरा नहीं कर पाई। पति व सास द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने की बात को उसने अपने परिजनों को बताया। जिसके उपरांत उसकी मां ने उसके ससुरालियों को समझाया। जिसके उपरांत वे कुछ दिनों तक ठीक रहे। पीड़िता के मुताबिक उसकी मां ने उसके ससुराल पक्ष के लोगों को एक लाख रुपये भी दिए। इसके बाद भी उसके ससुराल पक्ष के लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। पीड़िता के मुताबिक उसके पति व सास ने उसके साथ मारपीट की और उसे घर से निकाल दिया। करनाल पुलिस ने उपरोक्त दोनों के खिलाफ दहेज प्रताडना का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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एडवोकेट की दूसरी पत्नी थी रजनी
शिकायकर्ता के मुताबिक वह एडवोकेट राजन गुप्ता की दूसरी पत्नी थी। पति व सास द्वारा जब उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, तो उसने उनका विरोध किया। पीड़िता के मुताबिक उसे घर में डरा धमका कर रखा जाता था। साथ ही उसे बड़े रसूखदार लोगों से जानकारी होने की बात कहकर शिकायत न करने का दबाव भी बनाया जाता था।
करनाल से ट्रांसफर होकर जगाधरी आया था केस
सरकारी वकील बलजीत सिंह के मुताबिक करनाल के एडवोकेट राजन गुप्ता से संबंधित केस करनाल कोर्ट से ट्रांसफर होकर जगाधरी कोर्ट में आया था। एडवोकेट राजन गुप्ता में हाई कोर्ट में अर्जी दी थी कि उसे करनाल कोर्ट में इंसाफ नहीं मिल सकता। इसलिए उसके केस को ट्रांसफर कर दिया जाए। सरकारी वकील के मुताबिक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश डॉ. नरेश कुमार सिंहल की कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए करनाल के सेक्टर 14 निवासी एडवोकेट राजन गुप्ता व उसकी मां कृष्णा को भादंसं की धारा 498 ए के तहत दोषी करार देते हुए दो साल कैद तथा 2000-2000 रुपये जुर्माने की सजा सुना दी तथा भादंसं की धारा 323 में तीन माह की सजा तथा 500-500 रुपये जुर्माना किया है।