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एक दिन में एक हजार पीपीई किट बनाकर रेलवे वर्कशॉप ने बनाया रिकॉर्ड
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corona
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। कोविड 19 से जंग में रेलवे वर्कशॉप भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वर्कशॉप ने एक दिन में 1003 कवरऑल यानि पीपीई किट तैयार कर नया रिकॉर्ड बनाया है। रविवार को वर्कशॉप ने एक दिन में इतनी ज्यादा पीपीई किट तैयार की। देश में डॉक्टरों और अस्पतालों में काम कर रहे कर्मचारियों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए उत्तर रेलवे ने रोज लगभग 1000 कवरऑल बनाने का लक्ष्य रखा है। देश में इस समय बड़े पैमाने पर इनकी जरूरत है। रेलवे का ये प्रयास कोरोना से लड़ाई में काफी मददगार साबित होगा। डिप्टी सीपीओ राजीव बजाज के मुताबिक इस समय पूरी दुनिया में पीपीई किट की कमी है। ऐसे में उत्तर रेलवे की जगाधरी वर्कशॉप में बनाए जा रहे कवरऑल कोरोना से लड़ाई में काफी मददगार साबित होंगे। फिलहाल वर्कशॉप में रोज एक हजार किट बनाई जा रही है। मई तक इसे 2000 प्रतिदिन तक ले जाने का लक्ष्य है। इससे पहले जगाधरी वर्कशॉप कम समय में कोविड-19 आइसोलेशन ट्रेन, मोबाइल क्वारंटीन कोच बना चुका है।
डीआरडीओ प्रयोगशाला से मिल चुकी मंजूरी
उन्होंने बताया कि जगाधरी में बनाई जा रही प्रोटोटाइप कवरऑल का परीक्षण डीआरडीओ की ग्वालियर स्थित रक्षा अनुसंधान विकास प्रतिष्ठान प्रयोगशाला में किया गया था, जो इस प्रकार के परीक्षण करने के लिए अधिकृत है। तैयार कवरऑल के नमूनों ने डीआरडीई द्वारा किए गए सभी परीक्षण उच्चतम ग्रेड्स में पास किए। जिसके बाद जगाधरी कारखाना में बड़े लेवल पर पीपीई किट बनाने का काम शुरू किया गया।
देशभर की 50 जरूरत पूरा करने में सक्षम
-रेलवे अधिकारियों के मुुताबिक भारतीय रेलवे देशभर में पीपीई किट की 50 फीसदी आपूर्ति करने में सक्षम है। महामारी ज्यादा फैसले की स्थिति में कोरोना के इलाज में लगे देश के अन्य डॉक्टरों को भी 50 प्रतिशत पीपीई किट की आपूर्ति कर सकता है। फिलहाल काला आंब से सामग्री खरीदी जा रही है। जरूरत पड़ने कच्चे माल का स्रोत तय करने का निर्णय लिया गया है और इसे कपड़ा मंत्रालय ने मंजूरी भी दे दी है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में उत्पादन में और तेजी आ सकती है।
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सीमित संसाधनों में दिनरात काम कर रहे रेलवेकर्मी
देव शंकर सिंह ने बताया पीपीई कवरऑल का निर्माण करने के लिए आवश्यक कच्चे माल के साथ ही इनका निर्माण करने वाली मशीनरी की वैश्विक स्तर पर कमी होने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की है। इस प्रयास के पीछे समय की कसौटी पर खरी उतरने वाली भारतीय रेल की कार्यशालाएं और दुनिया के सबसे सुरक्षित इंजनों का विनिर्माण करने वाली प्रोडक्शन यूनिट्स की क्षमता है। डिब्बों के मेंटीनेंस और उपयोग के लिए सामान्य तौर पर जिन क्षमताओं, विशेषज्ञता, प्रोटोकॉल्स और प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है, फील्ड यूनिट्स और कार्यशालाओं को त्वरित रूप से उच्च गुणवत्ता के पीपीई कवरऑल उपलब्ध कराने में सक्षम बनाने के लिए उन्हीं का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए रेलमंत्री पीयूष गोयल, कारखाना अधिकारी और सभी रेलकर्मी साथी बधाई के पात्र हैं।
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डीआरडीओ प्रयोगशाला से मिल चुकी मंजूरी
उन्होंने बताया कि जगाधरी में बनाई जा रही प्रोटोटाइप कवरऑल का परीक्षण डीआरडीओ की ग्वालियर स्थित रक्षा अनुसंधान विकास प्रतिष्ठान प्रयोगशाला में किया गया था, जो इस प्रकार के परीक्षण करने के लिए अधिकृत है। तैयार कवरऑल के नमूनों ने डीआरडीई द्वारा किए गए सभी परीक्षण उच्चतम ग्रेड्स में पास किए। जिसके बाद जगाधरी कारखाना में बड़े लेवल पर पीपीई किट बनाने का काम शुरू किया गया।
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देशभर की 50 जरूरत पूरा करने में सक्षम
-रेलवे अधिकारियों के मुुताबिक भारतीय रेलवे देशभर में पीपीई किट की 50 फीसदी आपूर्ति करने में सक्षम है। महामारी ज्यादा फैसले की स्थिति में कोरोना के इलाज में लगे देश के अन्य डॉक्टरों को भी 50 प्रतिशत पीपीई किट की आपूर्ति कर सकता है। फिलहाल काला आंब से सामग्री खरीदी जा रही है। जरूरत पड़ने कच्चे माल का स्रोत तय करने का निर्णय लिया गया है और इसे कपड़ा मंत्रालय ने मंजूरी भी दे दी है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में उत्पादन में और तेजी आ सकती है।
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सीमित संसाधनों में दिनरात काम कर रहे रेलवेकर्मी
देव शंकर सिंह ने बताया पीपीई कवरऑल का निर्माण करने के लिए आवश्यक कच्चे माल के साथ ही इनका निर्माण करने वाली मशीनरी की वैश्विक स्तर पर कमी होने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की है। इस प्रयास के पीछे समय की कसौटी पर खरी उतरने वाली भारतीय रेल की कार्यशालाएं और दुनिया के सबसे सुरक्षित इंजनों का विनिर्माण करने वाली प्रोडक्शन यूनिट्स की क्षमता है। डिब्बों के मेंटीनेंस और उपयोग के लिए सामान्य तौर पर जिन क्षमताओं, विशेषज्ञता, प्रोटोकॉल्स और प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है, फील्ड यूनिट्स और कार्यशालाओं को त्वरित रूप से उच्च गुणवत्ता के पीपीई कवरऑल उपलब्ध कराने में सक्षम बनाने के लिए उन्हीं का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए रेलमंत्री पीयूष गोयल, कारखाना अधिकारी और सभी रेलकर्मी साथी बधाई के पात्र हैं।