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चरस तस्करी के दोषी को दस साल की कैद
यमुनानगर
Updated Fri, 15 Nov 2013 04:32 PM IST
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चरस की तस्करी के दोषी को दस साल की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा
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सुनाई गई है। यह सजा अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु गर्ग की अदालत
ने सुनाई।
जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। कोर्ट में करीब दो साल चली सुनवाई के दौरान ग्यारह लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वीरवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 21 अक्टूबर 2011 को उन्हें सूचना मिली थी कि शिव मंदिर के सामने बिलासपुर रोड पर एक व्यक्ति खड़ा हुआ है, जो नशीले पदार्थ की तस्करी करता है।
सूचना मिलने के बाद तुरंत एएसआई ओमप्रकाश के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने मुखबिर द्वारा बताई गई जगह पर पहुंच कर मामले की छानबीन शुरू कर दी।
पुलिस टीम को मौके पर पाकर एक व्यक्ति बिलासपुर रोड पर तेज कदमों से चलने लगा। पुलिस को उसे पकड़ने का इशारा किया। पुलिस ने दौड़कर उसे काबू कर लिया।
इसकी शिनाख्त गांव जड़ौदी निवासी मदन लाल के रूप में हुई। पुलिस ने उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत नोटिस थमाकर तलाशी देने को कहा। इसी बीच पुलिस ने तत्कालीन डीएसपी हेडक्वार्टर फूल कुमार को फोन के जरिये मामले की सूचना दी। सूचना मिलने के बाद डीएसपी मौके पर पहुंच गए। डीएसपी की मौजूदगी में मदन लाल की तलाशी ली गई, लेकिन उससे कुछ नहीं मिला।
जब पुलिस ने मदन लाल द्वारा पास में गिराए गए थैले की जांच की, तो उसमें से एक किलो 800 ग्राम चरस मिली। इसके बाद पुलिस ने उसे काबू कर लिया और उसके खिलाफ शहर थाना जगाधरी में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया।
जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। कोर्ट में करीब दो साल तक चली सुनवाई के दौरान ग्यारह लोगों की गवाही हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी मदन लाल को दोषी करार देते हुए उसे 10 साल की कैद तथा एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। कोर्ट में करीब दो साल चली सुनवाई के दौरान ग्यारह लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वीरवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 21 अक्टूबर 2011 को उन्हें सूचना मिली थी कि शिव मंदिर के सामने बिलासपुर रोड पर एक व्यक्ति खड़ा हुआ है, जो नशीले पदार्थ की तस्करी करता है।
सूचना मिलने के बाद तुरंत एएसआई ओमप्रकाश के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने मुखबिर द्वारा बताई गई जगह पर पहुंच कर मामले की छानबीन शुरू कर दी।
पुलिस टीम को मौके पर पाकर एक व्यक्ति बिलासपुर रोड पर तेज कदमों से चलने लगा। पुलिस को उसे पकड़ने का इशारा किया। पुलिस ने दौड़कर उसे काबू कर लिया।
इसकी शिनाख्त गांव जड़ौदी निवासी मदन लाल के रूप में हुई। पुलिस ने उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत नोटिस थमाकर तलाशी देने को कहा। इसी बीच पुलिस ने तत्कालीन डीएसपी हेडक्वार्टर फूल कुमार को फोन के जरिये मामले की सूचना दी। सूचना मिलने के बाद डीएसपी मौके पर पहुंच गए। डीएसपी की मौजूदगी में मदन लाल की तलाशी ली गई, लेकिन उससे कुछ नहीं मिला।
जब पुलिस ने मदन लाल द्वारा पास में गिराए गए थैले की जांच की, तो उसमें से एक किलो 800 ग्राम चरस मिली। इसके बाद पुलिस ने उसे काबू कर लिया और उसके खिलाफ शहर थाना जगाधरी में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया।
जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। कोर्ट में करीब दो साल तक चली सुनवाई के दौरान ग्यारह लोगों की गवाही हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी मदन लाल को दोषी करार देते हुए उसे 10 साल की कैद तथा एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।