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Yamuna Nagar News: यूजीसी समता विनियम 2026 पर बढ़ा विवाद, कॉलेजों में कमेटियों के गठन के लिए मंथन तेज

Thu, 29 Jan 2026 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 29 Jan 2026 01:40 AM IST
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Controversy escalates over UGC Equity Regulations 2026, with college brainstorming intensifying to form committees
पानीपत। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से 13 जनवरी को अधिसूचित यूजीसी समता विनियम 2026 इन दिनों देशभर में बहस का विषय बना हुआ है। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। यह नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बनाए गए हैं, जो रोहित वेमुला और पायल तड़वी मामलों के बाद आए थे।
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नए नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समान अवसर केंद्र, समता समिति और समता समूह (इक्विटी स्क्वॉड) गठित करना अनिवार्य होगा, इसके अलावा 24/7 समता हेल्पलाइन, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल, विभागीय समता दूतों की नियुक्ति और प्रवेश के समय छात्रों से भेदभाव न करने का घोषणा-पत्र भी जरूरी किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर अनुदान रोकने, डिग्री देने से मना करने या मान्यता रद्द करने तक का प्रावधान है। हालांकि, इन नियमों का विरोध मुख्य रूप से सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों द्वारा किया जा रहा है। उनका तर्क है कि नियमों का दुरुपयोग कर झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं और शिकायत निवारण व्यवस्था एकतरफा हो सकती है।
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इसी आधार पर मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है। याचिका में विनियम 3(सी) को गैर-समावेशी बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 के उल्लंघन का दावा किया गया है, वहीं, यूजीसी और समर्थकों का कहना है कि ये नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप हैं और वंचित वर्गों को भयमुक्त शैक्षणिक वातावरण देने के लिए जरूरी हैं। इस संबंध में अलग-अलग कॉलेज से प्राचार्यों व नोडल अधिकारी से बात की तो उन्होंने विश्वविद्यालय के निर्देश का पालन करने की बात कही।
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कॉलेज में कमेटी की व्यवस्था पहले से मौजूद है। पहले यह केवल एससी-एसटी छात्रों के लिए थी, अब इसमें ओबीसी को भी शामिल किया गया है। निष्पक्षता के लिए कमेटी में सामान्य वर्ग के सदस्य को भी शामिल किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और विश्वविद्यालय के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- प्रोफेसर पंकज चौधरी, नोडल अधिकारी, आर्य पीजी कॉलेज।



कॉलेज में यूजीसी के अनुरूप व्यवस्था पहले से लागू है। विश्वविद्यालय की ओर से जो भी दिशा-निर्देश जारी होंगे, उनका पालन किया जाएगा। निष्पक्ष निर्णय के लिए कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि की उपस्थिति आवश्यक है।

- डॉ. शशि प्रभा मलिक, प्राचार्या, आईबी पीजी कॉलेज।



फिलहाल विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से कोई औपचारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, जैसे ही निर्देश मिलेंगे, नियमों के अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- डॉ. सुभाष जागलान, प्राचार्य, देशबंधु गुप्ता राजकीय महाविद्यालय।
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