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रोजाना अंग्रेजी के दो शब्द-अर्थ सीख रहे बच्चे, बढ़ने लगी स्मरण शक्ति
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यमुनानगर। राजकीय स्कूलों के बच्चे अब स्कूली काम से अलग ज्ञानवर्धक किताबों को पढ़कर परंपरागत शिक्षा से ऊपर उठकर अपने कौशल को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले दिनों डीसी पार्थ गुप्ता व सीएमजीजीए विपुल फ्लोर ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बात की थी कि राजकीय स्कूलों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में कैसे और उन्नत किया जा सकता है। इसके बाद डीसी ने राजकीय स्कूलों में पठन कौशल कार्यक्रम की शुरुआत करने का निर्णय लिया था।
उल्लेखनीय है कि एक महीने में ही बच्चों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी से आठवीं तक के सभी बच्चों को लाइब्रेरी में प्रतिदिन आधा या एक घंटा किताब पढ़ने के लिए दी जा रही है। जिसे बच्चे अध्यापक के मार्गदर्शन में पढ़ते हैं। कुछ बच्चे कविता, कहानियां या अन्य किताबों में रुचि दिखा रहे हैं। बच्चे किताबें पढ़ने के बाद अपनी कहानियों को सुबह प्रार्थना सभा में सुनाते हैं । इसके साथ-साथ सुबह की प्रार्थना सभा में हिंदी व इंग्लिश के दो-दो शब्द-अर्थ, आज का विचार, सामान्य ज्ञान के दो प्रश्न, आज के समाचार प्रतिदिन शिक्षा विभाग के जिला कार्यालय से सभी क्लस्टर ग्रुप्स में भेजे जा रहे हैं। जिन्हें अध्यापक ब्लैक बोर्ड पर लिखवा कर बच्चों से याद करवाते हैं। इस कार्यक्रम का बच्चों में काफी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। अब बच्चों में सामान्य ज्ञान, हिंदी व अंग्रेजी के शब्द-अर्थ याद करने की क्षमता बढ़ रही है।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रामदिया गागट ने बताया कि अब इस कार्यक्रम को कुछ समय तक सीमित न रखकर पूरे सत्र के लिए रखा जाएगा। इतना ही नही डीसी ने टाइम टेबल में भी इसका एक पीरियड रखे जाने कि सिफारिश की है ताकि स्कूलों के बच्चों में पाठन करने की क्षमता बढ़ती रहे। अभी यह शुरुआत है। आने वाले समय मे इसका बहुत ही सकारात्मक प्रभाव बच्चों में देखने को मिलेगा। इस कार्यक्रम से बच्चों में स्वयं लिखने व पढ़ने की प्रतिभा भी उजागर हो रही है।
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उल्लेखनीय है कि एक महीने में ही बच्चों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी से आठवीं तक के सभी बच्चों को लाइब्रेरी में प्रतिदिन आधा या एक घंटा किताब पढ़ने के लिए दी जा रही है। जिसे बच्चे अध्यापक के मार्गदर्शन में पढ़ते हैं। कुछ बच्चे कविता, कहानियां या अन्य किताबों में रुचि दिखा रहे हैं। बच्चे किताबें पढ़ने के बाद अपनी कहानियों को सुबह प्रार्थना सभा में सुनाते हैं । इसके साथ-साथ सुबह की प्रार्थना सभा में हिंदी व इंग्लिश के दो-दो शब्द-अर्थ, आज का विचार, सामान्य ज्ञान के दो प्रश्न, आज के समाचार प्रतिदिन शिक्षा विभाग के जिला कार्यालय से सभी क्लस्टर ग्रुप्स में भेजे जा रहे हैं। जिन्हें अध्यापक ब्लैक बोर्ड पर लिखवा कर बच्चों से याद करवाते हैं। इस कार्यक्रम का बच्चों में काफी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। अब बच्चों में सामान्य ज्ञान, हिंदी व अंग्रेजी के शब्द-अर्थ याद करने की क्षमता बढ़ रही है।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रामदिया गागट ने बताया कि अब इस कार्यक्रम को कुछ समय तक सीमित न रखकर पूरे सत्र के लिए रखा जाएगा। इतना ही नही डीसी ने टाइम टेबल में भी इसका एक पीरियड रखे जाने कि सिफारिश की है ताकि स्कूलों के बच्चों में पाठन करने की क्षमता बढ़ती रहे। अभी यह शुरुआत है। आने वाले समय मे इसका बहुत ही सकारात्मक प्रभाव बच्चों में देखने को मिलेगा। इस कार्यक्रम से बच्चों में स्वयं लिखने व पढ़ने की प्रतिभा भी उजागर हो रही है।
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