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Yamuna Nagar News: बच्चे ही बने शिक्षक, सहपाठियों को पढ़ा रहे

Tue, 14 Apr 2026 03:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 14 Apr 2026 03:27 AM IST
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Children become teachers, teaching their classmates
कक्षा में अपने सहपाठियों को पढ़ाती छात्रा। स्वयं
अभय सिंह
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जगाधरी। राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिले के सवा सौ से ज्यादा विद्यालयों में स्थिति बेहद गंभीर है। शिक्षक न होने के कारण अभिभावक बच्चों का दाखिला राजकीय विद्यालयों में करवाने से कतरा रहे हैं। इस कारण हर वर्ष विद्यार्थियों की संख्या कम होती जा रही है। जिले में 91 स्कूल ऐसे हैं, जो एक ही शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। वहीं, 38 विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं है। इन विद्यालयों में डेपुटेशन से काम चलाया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले के शादीपुर के विद्यालय में 400 विद्यार्थियों पर एक ही शिक्षक है।

कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है और शिक्षक एक ही है। ऐसे विद्यालय में मेधावी विद्यार्थी स्वयं पढ़कर सहपाठियों को पढ़ा रहे हैं। वहीं, गुरु जी कमजोर विद्यार्थी पर ध्यान देने के साथ प्रवेश उत्सव, प्रशिक्षण व अन्य कागजी कामों में व्यस्त रहते हैं। जिले में पहले ही शिक्षकों की भारी कमी है। वहीं, अब लगभग सभी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और बीएलओ कार्य में लग गई है। इससे जिले के अधिकांश स्कूल खाली हो गए हैं। अभी शिक्षकों का तीन दिन का प्रशिक्षण चल रहा है। वहीं, जिन विद्यालयों में एक ही शिक्षक है, वहां तीन दिन कोई कक्षा ही नहीं लगी। यह स्कूल लगभग बंद ही रहे। कुछ विद्यालयों में बच्चे आए और कुछ देर बैठ कर घर लौट गए। शिक्षकों की कमी के कारण हर वर्ष विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि जिले में करीब 1200 शिक्षकों के पद रिक्त हैं और हर वर्ष रिक्त पदों की संख्या बढ़ती जा रही है, शिक्षकों की भर्ती नहीं मिल रही है। विभाग की ओर से निदेशालय को शिक्षकों की डिमांड भी लगातार भेजी जा रही है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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जिले में कार्यरत हैं इतने शिक्षक
जिले में कुल 916 राजकीय विद्यालय हैं। इसमें 592 प्राथमिक पाठशालाएं, 214 माध्यमिक विद्यालय, 29 उच्च विद्यालय और 82 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। इन सभी विद्यालयों में कुल 3,640 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें 80 प्राचार्य, तीन मुख्याध्यापक, 68 माध्यमिक विद्यालय मुख्याध्यापक, 38 प्राथमिक विद्यालयों में मुख्य शिक्षक हैं। इसके अलावा कुल 1,038 पीजीटी, टीजीटी 1,258 और 1,151 जेबीटी और सात वोकेशनल शिक्षक हैं। इनमें से 3,000 शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और बीएलओ कार्यों में लगाई गई है।
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शादीपुर गांव की राजकीय प्राथमिक पाठशाला में 400 बच्चों पर एक ही शिक्षक
जिले के कई विद्यालयों में स्थिति बेहद गंभीर है। शहर से सटे नगर निगम के गांव शादीपुर की राजकीय प्राथमिक पाठशाला में अभी 379 बच्चे पढ़ रहे हैं। अभी प्रवेश उत्सव चल रहा है और बच्चों की संख्या बढ़ रही है। पहली से पांचवीं तक पिछले वर्ष यहां 400 से ज्यादा बच्चे थे। इस बार भी 400 से अधिक बच्चे होने की संभावना है। यहां पर एक ही शिक्षक है। कभी-कभी डेपुटेशन से शिक्षक की व्यवस्था की जाती है, लेकिन यह कुछ दिन के लिए और अस्थायी होती है। जिले में ऐसे कई स्कूल हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या काफी है और शिक्षक एक है या एक भी नहीं है। संवाद


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वर्जन
जिले में शिक्षकों की कमी है। इसके लिए निदेशालय को डिमांड भी भेजी गई है। जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं है, वहां क्लस्टर स्तर पर व्यवस्था की जा रही है। किसी विद्यालय में प्रवेश उत्सव व पढ़ाई प्रभावित न हो इसकी जिलास्तर पर व्यवस्था की जा रही है।

अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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