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नहाय-खाय से छठ की शुरुआत, आज खरना व्रत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Nov 2021 12:33 AM IST
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Chhath begins with bathing, today Kharna fast, Yamunanagar
छठ पूजन के लिए यमुना घाट पर वेदी बनाते श्रद्धालु। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। छठ महापर्व की शुरुआत सोमवार को नहाय-खाय के साथ हो गई। पर्व को लेकर लोगों में भारी उत्साह है। दो दिन पश्चिमी यमुना घाट पर पूजा की जाएगी। पूजा के लिए लोगों ने घाटों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। घाटों पर लोगों ने छठ पूजा के लिए पिंडी (वेदी) निर्माण व सजावट शुरू कर दी है। घाटों पर पहुंचकर लोग अपने परिवार के नाम की वेदियों का निर्माण शुरू कर रहे हैं।
बाडी माजरा पुल स्थित दोनों तरफ के घाटों पर दिन भर लोगों की भीड़ लगी रही। पूजन को लेकर लोगों ने वेदियों का निर्माण शुरू कर दिया है। यही नहीं जल्द और आसानी से काम निपटाने के लिए लोग रात में भी घाट पहुंचकर परिवार के नाम से वेदी बना रहे हैं। श्री मानव सेवा समिति सदस्यों ने घाट पर पहुंच कर निर्माण का जायजा लिया।
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ट्रस्ट संस्थापक जयप्रकाश ने बताया कि इस दौरान लोगों से छठ पूजन के दौरान किए जाने वाले जरूरी प्रबंधों के बारे में लोगों से बातचीत की और सुझाव मांगें। वहीं पूर्वांचल महासभा के सदस्य एवं पार्षद रामआसरा भारद्वाज ने भी घाट पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। यहां सबसे ज्यादा लोगों ने सफाई व्यवस्था के लिए पार्षद से शिकायत की। लोगों ने कहा कि छठ तक यहां पर नियमित सुबह शाम सफाई करवाई जाए ताकि यहां आने वाले लोगों की आस्था को ठेस न पहुंचे।
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पार्षद ने कहा कि नगर निगम अधिकारियों से यहां पर सफाई कर्मचारी लगाने के लिए कहा गया है। वहीं मेयर मदन चौहान से भी छठ तक नियमित रूप से सफाई कर्मचारी तैनात करने की मांग रखी है। पार्षद रामआसरा ने कहा कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए सभी बंदोबस्त किए जा रहे हैं।
छठ महापर्व का उपवास सभी पूजन में सबसे लंबा होता है। यह उपवास 36 घंटे का होता है। इस दौरान महिलाएं अपनी संतान की सुख समृद्धि और दीर्घायु के लिए पूजा करती हैं इस दौरान भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। छठ पर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस व्रत में आखिरी दिन सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर उपवास का समापन किया जाता है।
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि छठ पर गन्ना, सेब, अनार, ठेकुआ, अंकुरित चना सहित अन्य मौसमी फल सहित तमाम सब्जियों से पूजा की जाती है। सूर्योदय होने तक जल में खड़े होकर दूध, गंगाजल और पानी से सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद निर्जला उपवास रखने वाले व्रती घर पहुंचकर व्रत का पूर्ण करतीं हैं।

खरना व्रत में महिलाएं करती हैं निर्जला उपवास
खरना व्रत में व्रत धारी महिलाएं दिन भर निर्जला उपवास करती हैं। शाम को नए चावल और गुड़ की खीर, व्रत के अनुसार रोटी फल अपने कुल देवी, देवता पर चढ़ाया जाता है। वही प्रसाद व्रतधारी ग्रहण करते हैं। इसके बाद अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
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