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डिच ड्रेन में बिना ट्रीट किए छोड़ा जा रहा केमिकल युक्त पानी, भूजलन पर पड़ रहा बुरा असर
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जठलाना। पश्चिमी यमुना नहर के साथ गंदे पानी की निकासी के लिए बनाई गई डिच ड्रेन किसानों के लिए अभिशाप बन गई है। किसानों का कहना है कि डिच ड्रेन में बह रहे गंदे व केमिकलयुक्त पानी से भूजल प्रभावित हो रहा है। साथ ही उनके फसलें भी खराब होती हैं। बीमारियां बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में किसानों ने प्रशासन से डिच ड्रेन में पानी को साफ कर छोड़ने की मांग की है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी जल्द ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर समस्या के समाधान की बात कह रहे है।
सिंचाई विभाग ने पश्चमी यमुना नहर के साथ-साथ डिच ड्रेन बनाई थी। इसमें शहर व फैक्ट्रियो का गंदा एवं केमिकल युक्त पानी छोड़ा जाता है। अब यह डिच ड्रेन किसानों के लिए मुसीबत बन गई हैं। ड्रेन के साथ लगती जमीन पर खेती करने वाले किसान समय सिंह, सुखदेव, रामलाल, अमरनाथ ने बताया कि ड्रेन में लगातार गंदा पानी बहने से यह भूमि के जलस्तर को भी प्रभावित कर रहा है। उनके ट्यूबवेल भी गंदा व केमिकल युक्त पानी देने लगे हैं। इसका असर फसल के साथ-साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में किसानों ने प्रशासन से इस ड्रेन में गंदे पानी को साफ़ कर छोड़ने की मांग की है।
बाक्स
टीटमेंट प्लांट लगने के बाद हो जाएगा समाधान: निर्मल कश्यप
इस बारे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी निर्मल कश्यप ने बताया कि यह समस्या उनके संज्ञान में है। इस ड्रेन की क्षमता 60 क्यूसेक पानी की है। इसके लिए 45 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट रादौर रोड पर जलापूर्ति विभाग द्वारा लगाया गया है। करीब दो वर्ष पहले जल शक्ति मंत्रालय ने भी यह मुद्दा उठाया था कि ट्रीटमेंट प्लांट लग जाने के बाद भी इसमें साफ़ पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा। जांच की गई तो पाया कि अभी भी शहर का 66 एमएलडी पानी बिना साफ़ हुए इस ड्रेन में जा रहा है। जिसके लिए यमुनानगर में एक और 66 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। जिसके लिए मुख्यमंत्री ने भी हरी झंडी दे दी है।
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सिंचाई विभाग ने पश्चमी यमुना नहर के साथ-साथ डिच ड्रेन बनाई थी। इसमें शहर व फैक्ट्रियो का गंदा एवं केमिकल युक्त पानी छोड़ा जाता है। अब यह डिच ड्रेन किसानों के लिए मुसीबत बन गई हैं। ड्रेन के साथ लगती जमीन पर खेती करने वाले किसान समय सिंह, सुखदेव, रामलाल, अमरनाथ ने बताया कि ड्रेन में लगातार गंदा पानी बहने से यह भूमि के जलस्तर को भी प्रभावित कर रहा है। उनके ट्यूबवेल भी गंदा व केमिकल युक्त पानी देने लगे हैं। इसका असर फसल के साथ-साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में किसानों ने प्रशासन से इस ड्रेन में गंदे पानी को साफ़ कर छोड़ने की मांग की है।
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टीटमेंट प्लांट लगने के बाद हो जाएगा समाधान: निर्मल कश्यप
इस बारे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी निर्मल कश्यप ने बताया कि यह समस्या उनके संज्ञान में है। इस ड्रेन की क्षमता 60 क्यूसेक पानी की है। इसके लिए 45 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट रादौर रोड पर जलापूर्ति विभाग द्वारा लगाया गया है। करीब दो वर्ष पहले जल शक्ति मंत्रालय ने भी यह मुद्दा उठाया था कि ट्रीटमेंट प्लांट लग जाने के बाद भी इसमें साफ़ पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा। जांच की गई तो पाया कि अभी भी शहर का 66 एमएलडी पानी बिना साफ़ हुए इस ड्रेन में जा रहा है। जिसके लिए यमुनानगर में एक और 66 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। जिसके लिए मुख्यमंत्री ने भी हरी झंडी दे दी है।
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