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किसानों से जमीन छीनकर सरकार कंपनियों को लीज पर चाहती है देना: चढूनी
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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर अनाजमंडी में एकत्र हुए किसान।
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। किसानों की मुश्तरका मालिकान जमीन पर सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले के विरोध में सोमवार को किसान अनाजमंडी में जमा हुए। यहां पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के गुरनाम सिंह चढूनी पहुंचे। यहां गुरनाम सिंह ने कहा कि मुश्तरका मालिकान जमीनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसानों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों के खातों से छूटी कई लाखों एकड़ जमीन है। हर गांव में कई एकड़ जमीन खाली है, जो सरकार को जा रही है। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। उस पर किसान खेती करते आया है। कई किसानों ने जमीन को बेच दिया है। कई जगह जमीनों को अपने नाम कर लिया गया है। कई जमीनों पर कॉलोनियां काटकर बेच दी गई है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दो वर्ष से सरकार भूमि बैंक बना रही है। सरकार किसानों की इन जमीनों को लेकर बड़ी कंपनियों को लीज पर दे देगी। इस तरह से कंपनियों की खेती में एंट्री हो जाएगी और किसान को 5-10 एकड़ में ही अपनी खेती करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब में भी विभाजन से पहले जमीनों की मुरब्बाबंदी की गई थी। जिसमें कुछ जमीनें साझा खाते में थी, जिसे बाद में बांट लिया गया था। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार उन मुश्तरका मालिकान जमीन पर हक किसानों को ही मिले। इसे लेकर 25 जुलाई को प्रदेश में तहसील स्तर पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए जाएंगे। 25 अगस्त को पीपली अनाज मंडी में किसानों की रैली होगी। यहीं सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजेगा। इस दौरान जिला प्रधान संजू गुंदियाना, निदेशक मंदीप रोडछप्पर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों के खातों से छूटी कई लाखों एकड़ जमीन है। हर गांव में कई एकड़ जमीन खाली है, जो सरकार को जा रही है। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। उस पर किसान खेती करते आया है। कई किसानों ने जमीन को बेच दिया है। कई जगह जमीनों को अपने नाम कर लिया गया है। कई जमीनों पर कॉलोनियां काटकर बेच दी गई है।
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उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दो वर्ष से सरकार भूमि बैंक बना रही है। सरकार किसानों की इन जमीनों को लेकर बड़ी कंपनियों को लीज पर दे देगी। इस तरह से कंपनियों की खेती में एंट्री हो जाएगी और किसान को 5-10 एकड़ में ही अपनी खेती करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब में भी विभाजन से पहले जमीनों की मुरब्बाबंदी की गई थी। जिसमें कुछ जमीनें साझा खाते में थी, जिसे बाद में बांट लिया गया था। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार उन मुश्तरका मालिकान जमीन पर हक किसानों को ही मिले। इसे लेकर 25 जुलाई को प्रदेश में तहसील स्तर पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए जाएंगे। 25 अगस्त को पीपली अनाज मंडी में किसानों की रैली होगी। यहीं सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजेगा। इस दौरान जिला प्रधान संजू गुंदियाना, निदेशक मंदीप रोडछप्पर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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