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Yamuna Nagar News: शिक्षित कर निरक्षरों के जीवन में भरेंगे उल्लास
Sun, 22 Dec 2024 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 22 Dec 2024 11:57 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के 25 हजार निरक्षर खुद को साक्षर बनाने की राह में कदम बढ़ा रहे हैं, जो घर पर क-ख-ग सहित हिंदी के अक्षरों व शब्दों और गणित की संख्याओं का ज्ञान ले रहे हैं। ऐसा शिक्षा विभाग के उल्लास कार्यक्रम के जरिये हो रहा है।
इसके तहत सर्वे में 15 से अधिक आयु के मिले 25 हजार निरक्षर लोगों की घर के पास स्थित सरकारी स्कूलों के शिक्षक या परिवार-पड़ोस के पढ़े-लिखे किशोर व युवा हिंदी व गणित की कक्षाएं ले रहे हैं। इससे अक्षर व संख्यात्मक ज्ञान होने पर मार्च-2025 में परीक्षा भी होगी, जिसे पास करने पर उन्हें प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे।
जिले में कराए सर्वे में 15 से अधिक आयु के 25 हजार लोग सामने आए, जो पढ़ाई से बिल्कुल वंचित रहे या जिन्होंने शुरुआती कक्षाओं में स्कूल छोड़ना पड़ा। इनमें अधिकांश महिलाएं या अधिक उम्र के लोग शामिल हैं, जो अभी हिंदी के अक्षर व गणित के संख्यात्मक ज्ञान के लिए स्कूल जाने में असमर्थ हैं।
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ऐसे वर्ग को साक्षर बनाने के मकसद से उल्लास कार्यक्रम के तहत हिंदी के अक्षर व शब्द और गणित की संख्या लिखना-पढ़ना व बोलना सिखाया जा रहा है। सर्वे में मिले 25 हजार लोगों को पढ़ाने की जिम्मेदारी पास के सरकारी स्कूल से शिक्षक या उसी के परिवार या पड़ोस के आठवीं कक्षा पास किशोर-युवा की लगाई गई है। प्रति व्यक्ति पर एक शिक्षक या वालंटियर की जिम्मेदारी है, जो ऑफ लाइन के साथ ऑनलाइन माध्यम से भी हिंदी व गणित की कक्षाएं ले रहे हैं।
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यमुनानगर। जिले के 25 हजार निरक्षर खुद को साक्षर बनाने की राह में कदम बढ़ा रहे हैं, जो घर पर क-ख-ग सहित हिंदी के अक्षरों व शब्दों और गणित की संख्याओं का ज्ञान ले रहे हैं। ऐसा शिक्षा विभाग के उल्लास कार्यक्रम के जरिये हो रहा है।
इसके तहत सर्वे में 15 से अधिक आयु के मिले 25 हजार निरक्षर लोगों की घर के पास स्थित सरकारी स्कूलों के शिक्षक या परिवार-पड़ोस के पढ़े-लिखे किशोर व युवा हिंदी व गणित की कक्षाएं ले रहे हैं। इससे अक्षर व संख्यात्मक ज्ञान होने पर मार्च-2025 में परीक्षा भी होगी, जिसे पास करने पर उन्हें प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे।
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जिले में कराए सर्वे में 15 से अधिक आयु के 25 हजार लोग सामने आए, जो पढ़ाई से बिल्कुल वंचित रहे या जिन्होंने शुरुआती कक्षाओं में स्कूल छोड़ना पड़ा। इनमें अधिकांश महिलाएं या अधिक उम्र के लोग शामिल हैं, जो अभी हिंदी के अक्षर व गणित के संख्यात्मक ज्ञान के लिए स्कूल जाने में असमर्थ हैं।
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ऐसे वर्ग को साक्षर बनाने के मकसद से उल्लास कार्यक्रम के तहत हिंदी के अक्षर व शब्द और गणित की संख्या लिखना-पढ़ना व बोलना सिखाया जा रहा है। सर्वे में मिले 25 हजार लोगों को पढ़ाने की जिम्मेदारी पास के सरकारी स्कूल से शिक्षक या उसी के परिवार या पड़ोस के आठवीं कक्षा पास किशोर-युवा की लगाई गई है। प्रति व्यक्ति पर एक शिक्षक या वालंटियर की जिम्मेदारी है, जो ऑफ लाइन के साथ ऑनलाइन माध्यम से भी हिंदी व गणित की कक्षाएं ले रहे हैं।