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हथनीकुंड बैराज और आसपास के क्षेत्र में पहुंचे विदेशी पक्षी
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Sat, 12 Nov 2016 12:37 AM IST
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हथनीकुंड बैराज पर विदेशी पक्षियों की अठखेलियां शुरू हो गई है। कुछ दिनों में हथनीकुंड बैराज समेत अन्य स्थानीय नदियों में भी विदेशी पक्षियों का झुंड लगने लग जाएगा।
बता दें कि हर वर्ष की तरह विदेशी पक्षियों के आने से हथनीकुंड बैराज का दृश्य और सुहावना बन गया है। विदेशी पक्षियों के साथ स्थानीय पक्षियों ने भी बैराज और आसपास यमुनानदी में डेरा जमा लिया है। इन पक्षियों में साइबेरिया, चीन और दक्षिण यूरोप के पक्षी शामिल हैं। इस समय इन देशों में अधिक ठंड होती है। पक्षी ठंड से बचने के लिए मैदानी इलाकों की झीलों की ओर रुख करने लगते हैं। हर रोज सुबह होते ही हथनीकुंड बैराज, ताजेवाला, अराईयांवाला की नदियों पर झुंड बनाकर अपना डेरा जमाने लगे हैं। हथनीकुंड बैराज पर विदेशी पक्षियों की चहल कदमी और चहचहाट से नेशनल पार्क की शाल वैली खूबसूरत दिखने लगती है। वैसे भी शाम के समय तो यहां का वातावरण सहज ही सुंदर घाटियों से घिरी झील को मनमोहक बना देता है।
ये पक्षी हैं यहां आते
हथनीकुंड बैराज, ताजेवला और अराईयांवाला के आसपास पक्षियों में साइबेरियन सारस, धोबिन चिड़िया, मुर्गाबी, पिनटेल, कामनक्रेन, किंगफिशर, पैटेंड, वुडसैंड, पाइपर, ग्रेलेगगूज, घनेर आदि शामिल हैं। यह पक्षी पानी में अठखेलियां करते हुए बहुत ही सुंदर दिखाई देते हैं और सुबह शाम होने वाली इनकी कलकल से पूरे नेशनल पार्क का वातावरण और दृश्य को मनोहर बना देते हैं। यह पक्षी कई हजार किलोमीटर का सफर तय कर यहां आते हैं। इनमें से कई पक्षी तो ऐसे होते हैं जो ठंडे इलाकों में ही अंडे देकर आते हैं और वापस जाकर ही इनमें से बच्चे निकालते हैं।
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पक्षियों की अठखेलियां करती हैं आकर्षित
शिवालिक की तलहटी में बसे गांव अराईयांवाला, ताजेवाला से लेकर कलेसर तक की यमुनानदी में इन प्रवासी पक्षियों को अठखेलियां करते हुए देखा जा सकता है। इनकी अठखेलियां सहज ही किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। ये पक्षी भोजन की तलाश में कभी तो पानी में डुबकी लगाते हैं तो कभी धूप में बैठकर अपने पंखों को सुखाने लग जाते हैं। इस प्रकार ये प्रवासी पक्षी अपने दिन व्यतीत करते हैं। ठंड समाप्त होने पर वापस अपने-अपने देश लौट जाते हैं। यह पक्षी ठंडे देशों की भीषण ठंड से बचने के लिए नवंबर और दिसंबर में गर्म देशों में आते हैं। सर्दी के कम होते ही मार्च अप्रैल तक लौट जाते हैं।
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बता दें कि हर वर्ष की तरह विदेशी पक्षियों के आने से हथनीकुंड बैराज का दृश्य और सुहावना बन गया है। विदेशी पक्षियों के साथ स्थानीय पक्षियों ने भी बैराज और आसपास यमुनानदी में डेरा जमा लिया है। इन पक्षियों में साइबेरिया, चीन और दक्षिण यूरोप के पक्षी शामिल हैं। इस समय इन देशों में अधिक ठंड होती है। पक्षी ठंड से बचने के लिए मैदानी इलाकों की झीलों की ओर रुख करने लगते हैं। हर रोज सुबह होते ही हथनीकुंड बैराज, ताजेवाला, अराईयांवाला की नदियों पर झुंड बनाकर अपना डेरा जमाने लगे हैं। हथनीकुंड बैराज पर विदेशी पक्षियों की चहल कदमी और चहचहाट से नेशनल पार्क की शाल वैली खूबसूरत दिखने लगती है। वैसे भी शाम के समय तो यहां का वातावरण सहज ही सुंदर घाटियों से घिरी झील को मनमोहक बना देता है।
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ये पक्षी हैं यहां आते
हथनीकुंड बैराज, ताजेवला और अराईयांवाला के आसपास पक्षियों में साइबेरियन सारस, धोबिन चिड़िया, मुर्गाबी, पिनटेल, कामनक्रेन, किंगफिशर, पैटेंड, वुडसैंड, पाइपर, ग्रेलेगगूज, घनेर आदि शामिल हैं। यह पक्षी पानी में अठखेलियां करते हुए बहुत ही सुंदर दिखाई देते हैं और सुबह शाम होने वाली इनकी कलकल से पूरे नेशनल पार्क का वातावरण और दृश्य को मनोहर बना देते हैं। यह पक्षी कई हजार किलोमीटर का सफर तय कर यहां आते हैं। इनमें से कई पक्षी तो ऐसे होते हैं जो ठंडे इलाकों में ही अंडे देकर आते हैं और वापस जाकर ही इनमें से बच्चे निकालते हैं।
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पक्षियों की अठखेलियां करती हैं आकर्षित
शिवालिक की तलहटी में बसे गांव अराईयांवाला, ताजेवाला से लेकर कलेसर तक की यमुनानदी में इन प्रवासी पक्षियों को अठखेलियां करते हुए देखा जा सकता है। इनकी अठखेलियां सहज ही किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। ये पक्षी भोजन की तलाश में कभी तो पानी में डुबकी लगाते हैं तो कभी धूप में बैठकर अपने पंखों को सुखाने लग जाते हैं। इस प्रकार ये प्रवासी पक्षी अपने दिन व्यतीत करते हैं। ठंड समाप्त होने पर वापस अपने-अपने देश लौट जाते हैं। यह पक्षी ठंडे देशों की भीषण ठंड से बचने के लिए नवंबर और दिसंबर में गर्म देशों में आते हैं। सर्दी के कम होते ही मार्च अप्रैल तक लौट जाते हैं।