{"_id":"03799af188ae0aa05eea0ea9b3de2914","slug":"bank-news-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंकों पर शोषण का आरोप, पीएम को लिखी चिट्ठी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंकों पर शोषण का आरोप, पीएम को लिखी चिट्ठी
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Sat, 10 Oct 2015 12:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आल इंडिया उद्योग व्यापारमंडल के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्तल अध्यक्षता में डीसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का ज्ञापन दिया। इसमें मुख्य रूप से बैंकों द्वारा किए जा रहे शोषण को रोकने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि आरबीआई और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर ब्याज की दर घटाई जाती है, लेकिन बैंकों द्वारा आम व्यक्ति को इसका लाभ नही दिया जाता है। सभी बैंक केंद्र व आरबीआई के अंतर्गत आते हैं। जब आरबीआई व केंद्र सरकार द्वारा किसी बैंक से भेदभाव नहीं किया जा रहा तो अलग-अलग बैंकों द्वारा अलग अलग ब्याज दर लगाना कैसे उचित है।
बैंकों का लाभ 3-4 प्रतिशत होता है। हमारी मांग है कि केंद्र सरकार बैंकों को निर्देशित करे कि बैंक मंदी के दौर में अपना लाभ एक प्रतिशत तक करें जिसका फायदा आम जनमानस को होगा। मंदी के समय में ब्याज दर में कटौती से व्यापारी व आम वर्ग को राहत मिलेगी।
विज्ञापन
ज्ञापन में सरफेसी एक्ट को भी खत्म करने की भी मांग की गई, जिससे की बैंक मैनेजरों द्वारा की जा रही मनमर्जी को विराम लग सके। बैंकों को ये निर्देश दिया जाए की ब्याज की दर, नियम व शर्तें, सरकारी योजनाओं की जानकारी के बड़े-बड़े इश्तहार लगा कर बैंकों के मुख्य द्वार पर लगाए जाएं।
खाता खोलने की शर्तें भी दीवार पर इश्तहार लगा कर दिखाईं जाएं। इस मौके पर सन्नी गोयल, गगन कटोच, रमेश सिंधी, हैप्पी, हिमांशु मखीजा, अश्वनी तायल, आशु बंसल, घनश्याम शर्मा, सुशील ढल, विक्रम चौहान, संजय मित्तल, राकेश वर्मा, सुभाष गुप्ता, बलविंद्र सिंह नामधारी, सुखदेव सिंह नामधारी, संजीव कुमार काला, डॉ. आरके शर्मा, डॉ. राठौर मौजूद रहे।
विज्ञापन
ज्ञापन में कहा गया कि आरबीआई और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर ब्याज की दर घटाई जाती है, लेकिन बैंकों द्वारा आम व्यक्ति को इसका लाभ नही दिया जाता है। सभी बैंक केंद्र व आरबीआई के अंतर्गत आते हैं। जब आरबीआई व केंद्र सरकार द्वारा किसी बैंक से भेदभाव नहीं किया जा रहा तो अलग-अलग बैंकों द्वारा अलग अलग ब्याज दर लगाना कैसे उचित है।
विज्ञापन
बैंकों का लाभ 3-4 प्रतिशत होता है। हमारी मांग है कि केंद्र सरकार बैंकों को निर्देशित करे कि बैंक मंदी के दौर में अपना लाभ एक प्रतिशत तक करें जिसका फायदा आम जनमानस को होगा। मंदी के समय में ब्याज दर में कटौती से व्यापारी व आम वर्ग को राहत मिलेगी।
विज्ञापन
ज्ञापन में सरफेसी एक्ट को भी खत्म करने की भी मांग की गई, जिससे की बैंक मैनेजरों द्वारा की जा रही मनमर्जी को विराम लग सके। बैंकों को ये निर्देश दिया जाए की ब्याज की दर, नियम व शर्तें, सरकारी योजनाओं की जानकारी के बड़े-बड़े इश्तहार लगा कर बैंकों के मुख्य द्वार पर लगाए जाएं।
खाता खोलने की शर्तें भी दीवार पर इश्तहार लगा कर दिखाईं जाएं। इस मौके पर सन्नी गोयल, गगन कटोच, रमेश सिंधी, हैप्पी, हिमांशु मखीजा, अश्वनी तायल, आशु बंसल, घनश्याम शर्मा, सुशील ढल, विक्रम चौहान, संजय मित्तल, राकेश वर्मा, सुभाष गुप्ता, बलविंद्र सिंह नामधारी, सुखदेव सिंह नामधारी, संजीव कुमार काला, डॉ. आरके शर्मा, डॉ. राठौर मौजूद रहे।