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सरस्वती नदी के लिए भूमि दान देने को आगे आए बलविंद्र
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पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने टीम के साथ गांव संधाए में सरस्वती नदी किनारे मिले प्राचीन सिक्कों व बर्तनों की जांच की। वहीं गांव संधाए के बलविंद्र कुमार ने सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह को सरस्वती नदी के लिए जमीन देने की पेशकश की है। बलविंद्र ने कहा कि गांव संधाए के पास से प्राचीन सरस्वती प्रवाहित होती थी। सरस्वती नदी के नक्शे के अनुसार यदि उनकी भूमि का अधिग्रहण किया जाता है, तो वे निशुल्क भूमि देने का तैयार हैं। इसके लिए वह सरकार से किसी प्रकार का कोई मुआवजा या अतिरिक्त भूमि नहीं लेंगे। वहीं इस कार्य में किसी प्रकार का भी सहयोग होगा, वे देने को तैयार रहेंगे।
बोर्ड उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने कहा कि गांव संधाए में कुषाण काल के सिक्कों व सामान मिलने के बाद जल्द ही पुरातत्व विभाग निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगा। तीन हजार साल पुरानी सभ्यता का सामान मिलने के बाद ऐतिहासिक दृष्टि से क्षेत्र का नाम विश्व में प्रसिद्ध होगा। पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक बनानी भट्टाचार्य की टीम ने कहा कि खोदाई के दौरान निकले सामान की सफाई व जांच करके ही इनके काल का पता चल पाएगा। उन्होंने कहा कि सिक्कों को देखने से पता चलता है कि ये तीन हजार साल से भी पुराने हैं। भट्टाचार्य ने कहा कि गांव से मिला प्राचीन सामान कुषाण काल या गुर्जर प्रतिहार से संबंधित होगा। जो सामान मिला है उसकी जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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जिसके पास हैं सिक्के, विभाग को दें
किरमिच ने कहा यहां सरस्वती नदी प्राचीन है और इसके आसपास लोग बसते थे। विलुप्त नदी के पास ही प्राचीन किला है। इसके पास से ही यह प्राचीन सभ्यता का सामान मिला है। ग्रामीणों को पहले भी यहां से इस प्रकार के सिक्के व दुर्लभ सामग्री मिली चुकी है। किरमिच ने लोगों से अनुरोध किया कि यदि किसी कोई इस प्रकार की वस्तु, सिक्के व अन्य सामान मिला है तो वह पुरातत्व विभाग को सौंप दें। ताकि सामान की जांच करके कार्य की दिशा निर्धारित की जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सरकार की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा।
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विश्व धरोहर बनाने का प्रयास
सरस्वती हेरिटेज बोर्ड का गठन सरस्वती धारा को पुन धरा पर लाने के लिए किया गया है। जिसे लेकर बोर्ड दिन रात कार्य कर रहा है। सरस्वती नदी के किनारे आदिबद्री से हरियाणा राजस्थान की सीमा तक दर्जनों प्राचीन क्षेत्र हैं। जिनमें भगवानपुर, पिहोवा, कपिल मुनि मंदिर कैथल, राखीगढ़ी, बनावाली प्राचीन क्षेत्र शामिल हैं। सरस्वती की धारा के लिए कुछ गांवों में भूमि नहीं मिल रही थी, लेकिन अब साइट स्पष्ट की जा चुकी है। यह बहुत ही प्राचीन व ऐतिहासिक क्षेत्र है। सरस्वती नदी से जुड़ा होने के कारण क्षेत्र विश्व धरोहर बनाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पर्यटक के रूप में विकसित किया जाए। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक यहां पहुंचे।
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बोर्ड उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने कहा कि गांव संधाए में कुषाण काल के सिक्कों व सामान मिलने के बाद जल्द ही पुरातत्व विभाग निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगा। तीन हजार साल पुरानी सभ्यता का सामान मिलने के बाद ऐतिहासिक दृष्टि से क्षेत्र का नाम विश्व में प्रसिद्ध होगा। पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक बनानी भट्टाचार्य की टीम ने कहा कि खोदाई के दौरान निकले सामान की सफाई व जांच करके ही इनके काल का पता चल पाएगा। उन्होंने कहा कि सिक्कों को देखने से पता चलता है कि ये तीन हजार साल से भी पुराने हैं। भट्टाचार्य ने कहा कि गांव से मिला प्राचीन सामान कुषाण काल या गुर्जर प्रतिहार से संबंधित होगा। जो सामान मिला है उसकी जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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जिसके पास हैं सिक्के, विभाग को दें
किरमिच ने कहा यहां सरस्वती नदी प्राचीन है और इसके आसपास लोग बसते थे। विलुप्त नदी के पास ही प्राचीन किला है। इसके पास से ही यह प्राचीन सभ्यता का सामान मिला है। ग्रामीणों को पहले भी यहां से इस प्रकार के सिक्के व दुर्लभ सामग्री मिली चुकी है। किरमिच ने लोगों से अनुरोध किया कि यदि किसी कोई इस प्रकार की वस्तु, सिक्के व अन्य सामान मिला है तो वह पुरातत्व विभाग को सौंप दें। ताकि सामान की जांच करके कार्य की दिशा निर्धारित की जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सरकार की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा।
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विश्व धरोहर बनाने का प्रयास
सरस्वती हेरिटेज बोर्ड का गठन सरस्वती धारा को पुन धरा पर लाने के लिए किया गया है। जिसे लेकर बोर्ड दिन रात कार्य कर रहा है। सरस्वती नदी के किनारे आदिबद्री से हरियाणा राजस्थान की सीमा तक दर्जनों प्राचीन क्षेत्र हैं। जिनमें भगवानपुर, पिहोवा, कपिल मुनि मंदिर कैथल, राखीगढ़ी, बनावाली प्राचीन क्षेत्र शामिल हैं। सरस्वती की धारा के लिए कुछ गांवों में भूमि नहीं मिल रही थी, लेकिन अब साइट स्पष्ट की जा चुकी है। यह बहुत ही प्राचीन व ऐतिहासिक क्षेत्र है। सरस्वती नदी से जुड़ा होने के कारण क्षेत्र विश्व धरोहर बनाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पर्यटक के रूप में विकसित किया जाए। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक यहां पहुंचे।