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Yamuna Nagar News: पराली प्रबंधन करने पर मिलेगी सहायता राशि
Tue, 17 Sep 2024 03:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 17 Sep 2024 03:52 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। किसानों को धान की फसल अवशेषों का प्रबंधन करने पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जाएगी। यह जानकारी विभाग के उप कृषि निदेशक आदित्य प्रताप ने दी।
उन्होंने बताया कि बताया कि इस वर्ष भी स्ट्रा बेलर द्वारा फसल अवशेषों की गांठ बनवाने पर या फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्र जैसे कि सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लो, जिरो टिल सीड डील मशीन की मदद से फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाए जाने पर सहायता राशि विभाग मिलेगी सहायक कृषि अभियंता डॉ. विनीत कुमार जैन ने बताया कि धान की फसल की कटाई का सीजन नजदीक है।
किसान इन कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हैं। इससे न केवल धरती की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है बल्कि मित्र कीट व पोषक तत्वों को भी कोई नुकसान नहीं होता है व रासायनिक खादों पर होने वाले खर्च में भी कमी आती है। उन्होंने बताया कि किसान बैलर द्वारा पराली की गांठ बनाकर अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि जिले में स्थित गोशालाओं को धान की पराली उठाने के लिये यातायात खर्च की एवज में 500 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि भी प्रदान की जायेगी। एक गोशाला के लिये अधिकतम सहायता राशि 15 हजार रुपये होगी। गोशाला का गो सेवा आयोग के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है। अधिक जानकारी के लिए किसान उप कृषि निदेशक, यमुनानगर अथवा सहायक कृषि अभियन्ता, यमुनानगर के कार्यालय में अथवा दूरभाष नंबर 01732-298096 पर संपर्क कर सकते है।
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यमुनानगर। किसानों को धान की फसल अवशेषों का प्रबंधन करने पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जाएगी। यह जानकारी विभाग के उप कृषि निदेशक आदित्य प्रताप ने दी।
उन्होंने बताया कि बताया कि इस वर्ष भी स्ट्रा बेलर द्वारा फसल अवशेषों की गांठ बनवाने पर या फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्र जैसे कि सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लो, जिरो टिल सीड डील मशीन की मदद से फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाए जाने पर सहायता राशि विभाग मिलेगी सहायक कृषि अभियंता डॉ. विनीत कुमार जैन ने बताया कि धान की फसल की कटाई का सीजन नजदीक है।
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किसान इन कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हैं। इससे न केवल धरती की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है बल्कि मित्र कीट व पोषक तत्वों को भी कोई नुकसान नहीं होता है व रासायनिक खादों पर होने वाले खर्च में भी कमी आती है। उन्होंने बताया कि किसान बैलर द्वारा पराली की गांठ बनाकर अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि जिले में स्थित गोशालाओं को धान की पराली उठाने के लिये यातायात खर्च की एवज में 500 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि भी प्रदान की जायेगी। एक गोशाला के लिये अधिकतम सहायता राशि 15 हजार रुपये होगी। गोशाला का गो सेवा आयोग के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है। अधिक जानकारी के लिए किसान उप कृषि निदेशक, यमुनानगर अथवा सहायक कृषि अभियन्ता, यमुनानगर के कार्यालय में अथवा दूरभाष नंबर 01732-298096 पर संपर्क कर सकते है।