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Yamuna Nagar News: कलाकारों ने कलरीपायट्टू मार्शल आर्ट की प्रस्तुति से चौंकाया
Sun, 29 Sep 2024 03:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 29 Sep 2024 03:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। स्पिक मैके व डीएवी गर्ल्स कॉलेज के हेरिटेज क्लब के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केरल से आए कलरीपायट्टू वल्लभट्ट कलारी ग्रुप ने मार्शल आर्ट की हैरतअंगेज प्रस्तुति देकर दर्शकों को चौंका दिया।
ग्रुप लीडर राजीव केपी ने कहा कि कलरीपायट्टू को विश्व की सबसे प्राचीन व सर्वाधिक कुशल मार्शल आर्ट में से एक माना जाता है। कलरीपायट्टू व्यक्तिगत युद्ध की एक प्रणाली है, जिसमें निहत्थे युद्ध के लिए त्वरित सजगता विकसित करने, लाठी, खंजर, चाकू, भाले, तलवार, ढाल इत्यादि हथियारों पर कुशल महारत हासिल करने के उद्देश्य से परिकल्पित अभ्यास शामिल हैं।
कलरीपायट्टू के प्रशिक्षण की शुरुआत पूरे शरीर के तेल मालिश से की जाती है, ताकि शरीर ढीला और लचीला बने। चाट्टम (कूद), ओट्ट्म (दौड़) और मरिचिल (कलाबाजी) जैसी गतिविधियां भी इसके अभिन्न अंग हैं। साथ ही तलवार, कटार, भाला, मुग्दर व धनुष-बाण जैसे हथियारों का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाता है। सदस्यों ने तलवार से मसाज करके सभी को हैरान कर दिया।
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कार्यक्रम के दौरान थविल व चेंडा ड्रम के कलाकारों ने वाद्य यंत्र बजाकर समां बांध दिया। प्राचार्य डॉ. मीनू जैन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम संगीत विभाग अध्यक्ष डॉ. नीता द्विवेदी व पंजाबी विभाग अध्यक्ष डॉ. गुरशरण कौर की देखरेख में हुआ। डॉ. मीनू जैन ने कहा कि छात्राएं दूसरे राज्यों की कला व संस्कृति से रूबरू हों, इसलिए भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन कराए जाएंगे। आयोजन में स्पिक मैके के केंद्रीय एडवाइजर पंकज मल्होत्रा व स्टेट को-ऑर्डिनेटर चक्षु दत्ता ने सहयोग दिया।
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यमुनानगर। स्पिक मैके व डीएवी गर्ल्स कॉलेज के हेरिटेज क्लब के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केरल से आए कलरीपायट्टू वल्लभट्ट कलारी ग्रुप ने मार्शल आर्ट की हैरतअंगेज प्रस्तुति देकर दर्शकों को चौंका दिया।
ग्रुप लीडर राजीव केपी ने कहा कि कलरीपायट्टू को विश्व की सबसे प्राचीन व सर्वाधिक कुशल मार्शल आर्ट में से एक माना जाता है। कलरीपायट्टू व्यक्तिगत युद्ध की एक प्रणाली है, जिसमें निहत्थे युद्ध के लिए त्वरित सजगता विकसित करने, लाठी, खंजर, चाकू, भाले, तलवार, ढाल इत्यादि हथियारों पर कुशल महारत हासिल करने के उद्देश्य से परिकल्पित अभ्यास शामिल हैं।
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कलरीपायट्टू के प्रशिक्षण की शुरुआत पूरे शरीर के तेल मालिश से की जाती है, ताकि शरीर ढीला और लचीला बने। चाट्टम (कूद), ओट्ट्म (दौड़) और मरिचिल (कलाबाजी) जैसी गतिविधियां भी इसके अभिन्न अंग हैं। साथ ही तलवार, कटार, भाला, मुग्दर व धनुष-बाण जैसे हथियारों का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाता है। सदस्यों ने तलवार से मसाज करके सभी को हैरान कर दिया।
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कार्यक्रम के दौरान थविल व चेंडा ड्रम के कलाकारों ने वाद्य यंत्र बजाकर समां बांध दिया। प्राचार्य डॉ. मीनू जैन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम संगीत विभाग अध्यक्ष डॉ. नीता द्विवेदी व पंजाबी विभाग अध्यक्ष डॉ. गुरशरण कौर की देखरेख में हुआ। डॉ. मीनू जैन ने कहा कि छात्राएं दूसरे राज्यों की कला व संस्कृति से रूबरू हों, इसलिए भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन कराए जाएंगे। आयोजन में स्पिक मैके के केंद्रीय एडवाइजर पंकज मल्होत्रा व स्टेट को-ऑर्डिनेटर चक्षु दत्ता ने सहयोग दिया।