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निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों ने की भूख हड़ताल
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यमुनानगर। निजी स्कूलों की मनमानी, फीस वृद्धि, निजी प्रकाशकों की पुस्तकें, वर्दी के नाम पर कथित लूट आदि मुद्दों पर अभिभावक सेवा मंच की ओर से रविवार को सांकेतिक भूख हड़ताल की गई। इसके लिए मंच के बैनर तले संगठन के पांच सदस्य सुबह से शाम तक भूख हड़ताल पर रहे। अभिभावक सेवा मंच ने शहर के नेहरू पार्क के बाहर टेंट लगाकर भूख हड़ताल की। इस दौरान अभिभावकों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि सरकार व प्रशासन निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों पर काम कर रही है। जिसके चलते निजी स्कूल अभिभावकों का आर्थिक व मानसिक शोषण कर रहे हैं। अनशनकारी संदीप कुमार, दीपक बडोला, सुमनलता ने बताया कि निजी स्कूल, अभिभावकों से नाजायज रूप से रुपये ऐंठ रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारी इन पर लगाम लगाने में असमर्थ हैं। फीस बढ़ाने को लेकर नियम तय हैं, लेकिन कोई स्कूल इनका अनुसरण नहीं कर रहा है। मनमानी तरीके से फीस बढ़ाई जा रही है। फार्म छह मात्र औपचारिकता बन कर रह गया है। इस सत्र में भी स्कूलों ने 20 से 30 प्रतिशत फीस बढ़ा दी है। वार्षिक शुल्क के अलावा, इमारत, विकास शुल्क सहित विभिन्न तरह के शुल्क लगाकर अभिभावकों की जेब काटी जा रही है। हर साल फीस के अतिरिक्त पब्लिक स्कूल शुल्क के नाम पर डेढ से चार करोड़ रुपये एकत्र करते हैं, इस धन का प्रयोग शिक्षा पर नहीं, बल्कि निजी विकास पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार व विभाग इसकी व्यवस्था करे।
इस दौरान अनशन में पहुंचे हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने कहा कि सरकार संगठन को न लाभ न हानि की नीति पर स्कूल चलाने की अनुमति देती है। नियमानुसार कोई भी स्कूल इसे व्यवसाय बनाकर धन नहीं कमा सकता है, लेकिन आज यही किया जा रहा है। तमाम स्कूलों के खिलाफ सैकड़ों अभिभावकों ने विभाग व सरकार को शिकायत दी है, परंतु किसी एक पर भी कार्रवाई नहीं की गई। जब भी अभिभावक इसका विरोध करते हैं, तो अधिकारी सख्त कार्रवाई करने की बात कहते हैं। उन्होंने बताया कि जगाधरी के दो नामी स्कूलों ने नियमों के विरूद्ध जाकर फीस व वार्षिक शुल्क वसूला। जिसकी शिकायत विभाग को दी गई, कार्रवाई करने के बजाए अभिभावकों को इसमें सहयोग करने के लिए कहा गया। जब शिकायत निदेशालय तक पहुंची तो फीस बढोतरी वापस ले ली गई, लेकिन स्कूल पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार व प्रशासन इस पर अंकुश नहीं लगाता तो अभिभावक आंदोलन करेंगे।
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सुनिश्चित न हो पुस्तक व वर्दी की दुकानें
व्यापारी नेता संजय मित्तल ने कहा कि निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले विद्यार्थियों को हर वस्तु उनके अनुसार ही खरीदनी होती है। इसके लिए सभी स्कूलों ने पहले से ही दुकानें तय की हुई हैं। अभिभावकों को वहीं से पुस्तकें, शिक्षण सामग्री, वर्दी सहित अन्य वस्तुएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इससे एक तरफ अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है, वहीं दुकानदारों को भी नुकसान हो रहा है। इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
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सरकारी स्कूलों की व्यवस्था हो मजबूत
इस दौरान अभिभावक मनोज, प्रदीप, दीपक, राखी, रेखा ने कहा कि सरकार को शिक्षा प्रणाली मजबूत करनी चाहिए। सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा, ताकि लोग बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने भेजें। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का अभाव होने के कारण पढ़ाई प्रभावित है, यदि सरकार इसे मजबूत करे तो यह विरोध समाप्त हो जाएगा।
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इस दौरान अनशन में पहुंचे हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने कहा कि सरकार संगठन को न लाभ न हानि की नीति पर स्कूल चलाने की अनुमति देती है। नियमानुसार कोई भी स्कूल इसे व्यवसाय बनाकर धन नहीं कमा सकता है, लेकिन आज यही किया जा रहा है। तमाम स्कूलों के खिलाफ सैकड़ों अभिभावकों ने विभाग व सरकार को शिकायत दी है, परंतु किसी एक पर भी कार्रवाई नहीं की गई। जब भी अभिभावक इसका विरोध करते हैं, तो अधिकारी सख्त कार्रवाई करने की बात कहते हैं। उन्होंने बताया कि जगाधरी के दो नामी स्कूलों ने नियमों के विरूद्ध जाकर फीस व वार्षिक शुल्क वसूला। जिसकी शिकायत विभाग को दी गई, कार्रवाई करने के बजाए अभिभावकों को इसमें सहयोग करने के लिए कहा गया। जब शिकायत निदेशालय तक पहुंची तो फीस बढोतरी वापस ले ली गई, लेकिन स्कूल पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार व प्रशासन इस पर अंकुश नहीं लगाता तो अभिभावक आंदोलन करेंगे।
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सुनिश्चित न हो पुस्तक व वर्दी की दुकानें
व्यापारी नेता संजय मित्तल ने कहा कि निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले विद्यार्थियों को हर वस्तु उनके अनुसार ही खरीदनी होती है। इसके लिए सभी स्कूलों ने पहले से ही दुकानें तय की हुई हैं। अभिभावकों को वहीं से पुस्तकें, शिक्षण सामग्री, वर्दी सहित अन्य वस्तुएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इससे एक तरफ अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है, वहीं दुकानदारों को भी नुकसान हो रहा है। इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
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सरकारी स्कूलों की व्यवस्था हो मजबूत
इस दौरान अभिभावक मनोज, प्रदीप, दीपक, राखी, रेखा ने कहा कि सरकार को शिक्षा प्रणाली मजबूत करनी चाहिए। सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा, ताकि लोग बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने भेजें। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का अभाव होने के कारण पढ़ाई प्रभावित है, यदि सरकार इसे मजबूत करे तो यह विरोध समाप्त हो जाएगा।