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Yamuna Nagar News: तपिश से कम हुआ पशुओं का दूध, पिला रहे सरसों का तेल

Tue, 21 May 2024 04:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 21 May 2024 04:54 AM IST
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Animal milk reduced due to heat, people are feeding mustard oil
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। इस वक्त गर्मी अपने चरम पर है। जिले में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। लू के थपेड़ों का आमजन के साथ-साथ पशुओं पर भी बुरा असर पड़ रहा है। तापमान में वृद्धि के चलते दुधारू पशुओं का दूध 25 से 30 प्रतिशत तक कम होने लगा है।
हालात यह हैं कि जो भैंस 10 लीटर दूध देती थी, गर्मी की वजह से उसका दूध सात किलोग्राम रह गया है। वहीं गर्मी के मौसम में धूप और लू लगने से पशुओं में तनाव देखा जा रहा है। इसका भी सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ रहा है। जिले में कुल 252477 पशु हैं। जिनमें 107296 गाय, 126188 भैंस, 8213 भेड़, 6073 बकरी, 583 घोड़े, 66 खच्चर, 15 गधे, 2626 सुअर, 1389 कुत्ते, 13 खरगोश व 4 हाथी हैं।
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वहीं गर्मी के कारण खेतों में पशु चारे का भी संकट है। काफी समय से जिले में बारिश नहीं हुई। इससे खेतों में पशु चारा न के बराबर है। केवल उन्हीं खेतों में चेरी खड़ी है जिसे किसान बाजार में बेचते हैं। वहीं चेरी भी अभी साइज में छोटी है। इसलिए दुकानों पर चेरी से ज्यादा मक्की बिक रही है।
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पशुपालकों के अनुसार मक्की पशुओं को नुकसान करती है। इससे पशुओं का दूध सूखता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में तो पशुपालक गन्ने के खेतों व ढोल आदि से रोजाना हरा चारा काट कर अपने पशुओं को खिलाते हैं। बारिश न होने से खेताें में हरे चारे का संकट हो गया है। वहीं किसान खेतों में खरपतवार नाशक का इस्तेमाल करते हैं। इससे हरे चारे का संकट है।
डेयरी कांप्लेक्स दड़वा के प्रधान जितेंद्र लांबा, संजय पाहवा, कुलदीप मेहता, मामराज, पवन कुमार, राहुल ने बताया कि गर्मी की वजह से पशुओं का दूध काफी कम हो गया है। गर्मी से बचाव के लिए पशुओं को रोजाना सरसों का तेल पिला रहे हैं। सरसों के तेल की तासीर ठंडी होती है। एक भैंस को रोजाना औसतन 200 ग्राम सरसों तेल दे रहे हैं।
इससे पशुओं के रखरखाव का खर्च तो बढ़ा ही है, साथ में दूध भी घट रहा है। वैसे भी खेतों में पशु चारा अभी पर्याप्त नहीं है। बारिश होने के बाद ही हालात सुधर सकते हैं। पशुओं को गर्मी न लगे इसलिए उन पर पंखे व कूलर लगा रहे है। गाय पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इसे भैंस की तुलना में ज्यादा गर्मी लगती है। वहीं गर्मी के कारण पशुओं को सीधे 105 डिग्री बुखार होता है।

एडवाइजरी जारी की : डीसी
डीसी कैप्टन मनोज कुमार के मुताबिक जब तापमान में वृद्धि या गिरावट तो इंसानों के साथ साथ पशुओं पर इसका प्रभाव पड़ता है। पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। दूध उत्पादन में कमी को रोकने के लिए सभी पशुपालकों को अपने पशुओं का विशेष ख्याल रखना होगा। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पशु को छायादार स्थान पर बांधें। चारागाह में न छोड़ें, बांधने के स्थान पर विशेष साफ सफाई होनी चाहिए। पशुओं में पानी की कमी न होने दें। दिन में दो से तीन बार पशुओं को ताजे पानी से नहलाएं। साथ ही उनको संतुलित आहार दें। बंद कमरों में भी पशुओं को खिड़की के पास न बांधें।
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