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अंबाला-शामली एक्सप्रेस-वे बनने से पहले किसानों ने प्रशासन को सौंपी मांगों की लंबी-चौड़ी लिस्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 02:01 AM IST
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ambaala-shaamalee eksapres-ve banane se pahale kisaanon ne prashaasan ko saumpee maangon kee lambee-chaudee list
यमुनानगर। अंबाला से शामली एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि को लेकर सोमवार को किसानों ने भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले अनाज मंडी जगाधरी में बैठक की। किसानों ने कहा जिन किसानों की 50 प्रतिशत से ज्यादा जमीन अधिग्रहीत की जाए उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। यूनियन के सदस्यों ने सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम सुशील कुमार को सौंपा।
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भाकियू के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने कहा कि अंबाला-शामली एक्सप्रेस-वे बनने से किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इसलिए इसके निर्माण से पहले किसानों की मांगों को पूरा किया जाना जरूरी है। यह एक्सप्रेस-वे 110 किलोमीटर लंबा है। जिले के 11 गांव की 250 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जानी है। बैठक को प्रदेश संगठन सचिव हरपाल सुढल, युवा जिलाध्यक्ष संदीप टोपरा, सरदार गुरवीर सिंह, समय सिंह खुर्दबन, जरनैल सिंह पोटली, सतपाल राणा, चरण सिंह, कुलदीप सिंह, तेजिंद्र सिंह, हरविंद्र सिंह, रोशन लाल ने किसान को संबोधित किया।
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किसान नेता बोले पहले इन मांगों को करें पूरा
हरपाल सुढल ने कहा कि जिन किसानों की 50 प्रतिशत से ज्यादा जमीन अधिग्रहीत की जाएगी, उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। जो रास्ते खेतों में आने आने-जाने के हैं, वे बंद न किए जाएं। सड़क के दोनों ओर सर्विस लेन का प्रावधान किया जाए। पश्चिमी यमुना नहर के पास गांव पोटली, खुर्दबन की तरफ यू-टर्न दिया जाए। जमीन का मुआवजा बाजार भाव से कम से कम चार गुणा दिया जाए। नक्शे के अनुसार इस सड़क के दोनों ओर पतंग नुमा आकार के छोटे-छोटे टुकड़े या कम जमीन बचे तो उनका उचित मुआवजा इसी दर से दिया जाए। जिन किसानों के ट्यूबवेल सड़क के एक तरफ आ जाएंगे और जमीन दूसरी तरफ रह जाएगी उनको खेतों में सिचाई के लिए रास्ता दिया जाए। पश्चिमी यमुना नहर के कारण बारिश के दिनों में समस्या रहती है। इसकी निकासी के लिए सरकारी ड्रेन बनी हुई है। वह बाधित न हो। इंद्री से आगे पश्चिमी यमुना नहर के साथ-साथ पीडब्ल्यूडी ने सड़क बनाई हुई है। खुर्दबन, पोटली व ठसका सहित अन्य 25-30 गांवों में प्रवेश या निकासी के लिए सड़क का रास्ता बनाया जाए।
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