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Yamuna Nagar News: बिगड़ने लगी हवा की सेहत, 8 दिन में 69 से 164 पर पहुंचा एक्यूआई
Wed, 21 Oct 2026 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 21 Oct 2026 12:56 AM IST
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शहर में व्यासपुर मार्ग पर कूड़े में आग लगाने से उठता धुआं। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ठंड की आहट और कूड़ा जलाने से शहर की हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। शहर में मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 164 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है। वहीं 12 अक्तूबर को शहर का एक्यूआई 69 था। इसके मुकाबले 20 अक्तूबर को इसमें 95 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, तीन अक्तूबर को शहर का एक्यूआई 228 तक पहुंच गया था। इसके बाद 12 अक्तूबर को यह घटकर 69 रह गया। 13 अक्तूबर को एक्यूआई 113, 14 को 185, 15 को 127, 16 को 99, 17 को 200, 18 को 162, 19 को 137 और 20 अक्तूबर को 164 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहर में वायु गुणवत्ता में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
मौसम ठंडा होने के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। जिले में पराली जलाने का अब तक एक मामला सामने आया है। इस मामले में थाना छप्पर में एफआईआर दर्ज की गई थी।
हालांकि, शहर में कचरा जलाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। खुले में कचरा जलने से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कचरा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना जरूरी है।
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स्वास्थ्य पर पड़ सकता विपरीत असर : डॉ. भारद्वाज
शहर के पर्यावरणविद् डाॅ. केआर भारद्वाज का कहना है कि एक्यूआई 164 होने का मतलब है कि हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है। इस स्तर पर संवेदनशील लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषण बढ़ने पर खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचना और धुएं के संपर्क को कम करना फायदेमंद हो सकता है।
एक्यूआई के स्तर का स्वास्थ्य पर प्रभाव
0-50 (अच्छा) : हवा की गुणवत्ता अच्छी रहती है। स्वास्थ्य पर बहुत कम असर पड़ता है।
51-100 (संतोषजनक) : सामान्य लोगों पर खास असर नहीं पड़ता, लेकिन संवेदनशील लोगों को हल्की परेशानी हो सकती है।
101-200 (मध्यम) : अस्थमा और सांस के मरीजों को परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क से संवेदनशील लोगों पर असर पड़ सकता है।
201-300 (खराब) : लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अधिक खतरा रहता है।
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यमुनानगर। ठंड की आहट और कूड़ा जलाने से शहर की हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। शहर में मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 164 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है। वहीं 12 अक्तूबर को शहर का एक्यूआई 69 था। इसके मुकाबले 20 अक्तूबर को इसमें 95 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, तीन अक्तूबर को शहर का एक्यूआई 228 तक पहुंच गया था। इसके बाद 12 अक्तूबर को यह घटकर 69 रह गया। 13 अक्तूबर को एक्यूआई 113, 14 को 185, 15 को 127, 16 को 99, 17 को 200, 18 को 162, 19 को 137 और 20 अक्तूबर को 164 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहर में वायु गुणवत्ता में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
मौसम ठंडा होने के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। जिले में पराली जलाने का अब तक एक मामला सामने आया है। इस मामले में थाना छप्पर में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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हालांकि, शहर में कचरा जलाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। खुले में कचरा जलने से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कचरा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना जरूरी है।
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स्वास्थ्य पर पड़ सकता विपरीत असर : डॉ. भारद्वाज
शहर के पर्यावरणविद् डाॅ. केआर भारद्वाज का कहना है कि एक्यूआई 164 होने का मतलब है कि हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है। इस स्तर पर संवेदनशील लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषण बढ़ने पर खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचना और धुएं के संपर्क को कम करना फायदेमंद हो सकता है।
एक्यूआई के स्तर का स्वास्थ्य पर प्रभाव
0-50 (अच्छा) : हवा की गुणवत्ता अच्छी रहती है। स्वास्थ्य पर बहुत कम असर पड़ता है।
51-100 (संतोषजनक) : सामान्य लोगों पर खास असर नहीं पड़ता, लेकिन संवेदनशील लोगों को हल्की परेशानी हो सकती है।
101-200 (मध्यम) : अस्थमा और सांस के मरीजों को परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क से संवेदनशील लोगों पर असर पड़ सकता है।
201-300 (खराब) : लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अधिक खतरा रहता है।