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मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए आढ़ती, नहीं हुई खरीद
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जगाधरी मार्केट कमेटी कार्यालय में धरने पर बैठे आढ़ती।
- फोटो : Yamuna Nagar
जगाधरी। धान खरीद शुरू होने से पहले अनाज मंडी आढ़ती सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इस दौरान एसोसिएशन के बैनर तले आढ़तियों ने मार्केट कमेटी कार्यालय पर धरना दिया और नारेबाजी की।
इसके तहत सुबह ही सभी आढ़ती मंडी में एकत्र हुए और मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे। नारेबाजी करते हुए दरियां बिछाकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन की अध्यक्षता एसोसिएशन जगाधरी प्रधान मनीष कांबोज ने की।
आढ़तियों के हड़ताल पर चले जाने से खरीद नहीं हो पाई। हालांकि सरकार की ओर से अभी खरीद शुरू नहीं की गई, लेकिन जगाधरी, रादौर, जठलाना मंडियों में धान की अगेती किस्म की आवक शुरू हो गई है। आढ़तियों के हड़ताल पर होने से सोमवार को खरीद नहीं हो पाई।
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प्रधान मनीष कांबोज ने कहा कि मांगों को लेकर सरकार से कई बार बातचीत की गई। हर बार सरकार ने उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया, लेकिन पूरा नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ सरकार नित नए नियम लागू कर आढ़तियों व किसानों को परेशान कर रही है। जिससे प्रदेश के आढ़तियों में भारी रोष है। अधिकारों के लिए आढ़तियों को हड़ताल पर जाना पड़ा है। मनीष ने कहा कि मंगलवार को जिले के सभी आढ़ती शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर के आवास का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि यहां भी आढ़तियों की बात नहीं सुनी गई तो बुधवार को सभी आढ़ती करनाल पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेेराव करेंगे।
यह हैं आढ़तियों की मांगें
आढ़तियों की मांग है कि सरकार गेहूं, धान, मंगू, सरसों, कपास, सूरजमुखी इत्यादि सभी फसलें एमएसपी पर आढ़तियों के माध्यम से खरीदे। आढ़तियों को 2.5 प्रतिशत उनकी पूरी आढ़त दी जानी चाहिए। दो सीजन से गेहूं पर 46 रुपये और धान पर 45.80 रुपये दी गई है। जबकि आढ़त 51 रुपये बनती है। मार्केटिंग बोर्ड ने ई-नेम लागू करने के लिए आदेश दिए हैं। यह प्रक्रिया प्राइवेट बिकने वाली फसलों पर लागू नहीं हो सकती है। ई-ट्रेडिंग सिर्फ उत्पाद की हो सकती है, जबकि मंडियों में आने वाली फसलें कच्चा माल है। इसलिए इसे मंडियों में लागू न की जाए। सीमांत किसानों को ई-खरीद पोर्टल पर रजिस्टर्ड करने के बाद भी उनकी फसलें नहीं खरीदी गई।सीमांत किसान प्रदेश बनने के बाद से ही यहां की मंडियों से ही जुड़े हुए हैं। सरकार द्वारा धान न खरीदने के कारण किसानों व आढ़तियों को बहुत नुकसान हुआ है। आगामी सीजन में सभी सीमांत किसानों की फसलों की खरीदी जाए।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल
अनाज मंडी एसोसिएशन के जिला प्रधान शिव कुमार संधाला व जगाधरी प्रधान मनीष कांबोज ने कहा कि सरकार आढ़तियों से लगातार छलावा कर रही है। सरकार की नीतियों से आढ़तियों व किसानों में खाई बनती जा रही है। जबकि यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है। सरकार मंडियों व आढ़तियों को खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बार आढ़तियों ने आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हड़ताल जारी रहेगी।
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इसके तहत सुबह ही सभी आढ़ती मंडी में एकत्र हुए और मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे। नारेबाजी करते हुए दरियां बिछाकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन की अध्यक्षता एसोसिएशन जगाधरी प्रधान मनीष कांबोज ने की।
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आढ़तियों के हड़ताल पर चले जाने से खरीद नहीं हो पाई। हालांकि सरकार की ओर से अभी खरीद शुरू नहीं की गई, लेकिन जगाधरी, रादौर, जठलाना मंडियों में धान की अगेती किस्म की आवक शुरू हो गई है। आढ़तियों के हड़ताल पर होने से सोमवार को खरीद नहीं हो पाई।
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प्रधान मनीष कांबोज ने कहा कि मांगों को लेकर सरकार से कई बार बातचीत की गई। हर बार सरकार ने उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया, लेकिन पूरा नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ सरकार नित नए नियम लागू कर आढ़तियों व किसानों को परेशान कर रही है। जिससे प्रदेश के आढ़तियों में भारी रोष है। अधिकारों के लिए आढ़तियों को हड़ताल पर जाना पड़ा है। मनीष ने कहा कि मंगलवार को जिले के सभी आढ़ती शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर के आवास का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि यहां भी आढ़तियों की बात नहीं सुनी गई तो बुधवार को सभी आढ़ती करनाल पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेेराव करेंगे।
यह हैं आढ़तियों की मांगें
आढ़तियों की मांग है कि सरकार गेहूं, धान, मंगू, सरसों, कपास, सूरजमुखी इत्यादि सभी फसलें एमएसपी पर आढ़तियों के माध्यम से खरीदे। आढ़तियों को 2.5 प्रतिशत उनकी पूरी आढ़त दी जानी चाहिए। दो सीजन से गेहूं पर 46 रुपये और धान पर 45.80 रुपये दी गई है। जबकि आढ़त 51 रुपये बनती है। मार्केटिंग बोर्ड ने ई-नेम लागू करने के लिए आदेश दिए हैं। यह प्रक्रिया प्राइवेट बिकने वाली फसलों पर लागू नहीं हो सकती है। ई-ट्रेडिंग सिर्फ उत्पाद की हो सकती है, जबकि मंडियों में आने वाली फसलें कच्चा माल है। इसलिए इसे मंडियों में लागू न की जाए। सीमांत किसानों को ई-खरीद पोर्टल पर रजिस्टर्ड करने के बाद भी उनकी फसलें नहीं खरीदी गई।सीमांत किसान प्रदेश बनने के बाद से ही यहां की मंडियों से ही जुड़े हुए हैं। सरकार द्वारा धान न खरीदने के कारण किसानों व आढ़तियों को बहुत नुकसान हुआ है। आगामी सीजन में सभी सीमांत किसानों की फसलों की खरीदी जाए।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल
अनाज मंडी एसोसिएशन के जिला प्रधान शिव कुमार संधाला व जगाधरी प्रधान मनीष कांबोज ने कहा कि सरकार आढ़तियों से लगातार छलावा कर रही है। सरकार की नीतियों से आढ़तियों व किसानों में खाई बनती जा रही है। जबकि यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है। सरकार मंडियों व आढ़तियों को खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बार आढ़तियों ने आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हड़ताल जारी रहेगी।