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सड़कों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बढ़ रहे हादसे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Oct 2021 01:03 AM IST
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Accidents increasing due to ignoring the safety standard on the roads, Yamunanagar
जगाधरी-पावंटा नेशनल हाईवे पर गायब सफेद पट्टी और गुजरते वाहन सवार। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ पिछले तीन माह में तेजी से बढ़ा है। इस दौरान हुए हुए सड़क हादसों में 32 लोगों की जानें जा चुकी है। सर्दी के आगाज के साथ सड़कों पर हल्की धुंध पसरने लगी है। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा की घोर अनदेखी की जा रही है।
शहर के बीच से गुजरने वाले दोनों पुराने नेशनल हाइवों (जगाधरी-पावंटा नेशनल हाईवे, चंडीगढ़-रुड़की नेशनल हाईवे) पर हादसों को रोकने के लिए जरूरी इंतजाम नदारद है। दोनों सड़कों पर अधिकतर स्थानों पर जहां सड़क और बर्म के बीच छह इंच से एक फुट तक अंतर बना हुआ है। वहीं, कई जगह पूर्व संकेतक व सफेद पट्टी गायब है।
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इसी तरह जिले की अधिकतर सड़कों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। यहीं कारण है कि सड़कों पर हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। यदि संबंधित विभाग व जिला प्रशासन न चेता तो आने वाले दिनों मे जानलेवा सड़क हादसों की संख्या काफी अधिक बढ़ सकती है। धुंध के दौरान सड़कों पर हादसे रोकने के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं, अधिकतर मानक हाइवे पर कही नजर नहीं आए।
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शहर के बीच से गुजर रहा पुराना नेशनल हाईवे कैल से कलानौर तक अब पीडब्ल्यूडी के अंडर आ चुका है। अब इस सड़क को फोरलेन किया जा रहा है। शहर के बीच कमानी चौक से कन्हैया साहिब चौक तक डिवाइडर बनाया जा रहा है। लेकिन इसके बाद सड़कों के दोनों तरफ बर्म और सड़क का अंतर काफी बड़ा हुआ है।
नए हाईवे से कैल तक, कैल से कचरा प्लांट तक व रक्षक विहार नाके तक बर्म का अंतर काफी बढ़ा हुआ है। उधर, बाईपास पुल के ऊपर बरम और सड़क के बीच काफी अंतर है। पुल पर भी कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। इसके अलावा सेक्टर 17 के मोड से लघु सचिवालय तक व संत निश्चल सिंह स्कूल के आसपास भी यहीं स्थिति है। जो हादसों का कारण बनती है।
नहीं है संकेतक बोर्ड
जिले की सड़कों पर अधिकतर स्थानों पर पूर्व सूचना के बोर्ड नहीं है। रात के समय सड़कों पर केवल वाहनों की हेड लाइट की रोशनी से ही वाहन गुजरते हैं। ऐसे में पूर्व सूचना बोर्ड होना बहुत जरूरी है। जगाधरी-पावंटा नेशनल हाईवे पर छछरौली से लेकर ताजेवाला तक कई तीव्र मोड है। जहां पर हादसे होते है। इनमें कई स्थानों पर पूर्व संकेतक चिन्ह नहीं लगे हुए है। इसी तरह शहर की कॉलोनियों से पुराने हाइवे पर निकल रहे मार्गों से संबंधित कोई संकेतक नहीं है। यहीं हालात जिले की अन्य सड़कों की भी है।

जीरो होना चाहिए सड़क व बर्म के बीच का अंतर
स्टेट रोड सेफ्टी काऊंसिल के सदस्य एडवोकेट सुशील आर्य के अनुसार सड़क किनारे बने बर्म और सड़क का अंतर जीरो होना चाहिए, लेकिन शहर के बीच से गुजर रहे पुराने हाइवे जगाधरी-पावंटा पर सड़क और बर्म के बीच काफी अंतर है। कहीं-कहीं पर यह अंतर एक फुट तक है। बर्म और सड़क का लेवल एक न होने पर धुंध के दौरान वाहन चालकों खासकर दुपहिया वाहन चालकों को यह अंतर नजर नहीं आएगा, जिससे वाहन दुर्घटनाग्रस्त होना तय है।
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