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Yamuna Nagar News: एसीबी ने पटवारी को रिश्वत लेते पकड़ा
Wed, 11 Jun 2025 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 11 Jun 2025 12:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली (यमुनानगर)। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) तहसील छछरौली में पटवारी की ओर से भ्रष्टाचार फैलाने का मामला सामने आया है। पटवारी ने रिटायर्ड कर्मचारी व किसान से जमीन इंतकाल चढ़ाने के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग की थी। किसान तीन हजार रुपये पहले दे चुका था और 3000 देकर रंगे हाथ पकड़वाया गया है।
तहसील छछरौली के गांव चंगनोली निवासी महेंद्र सिंह हरियाणा रोडवेज से रिटायर्ड कर्मचारी व किसान ने बताया कि उनकी गांव में 142 कैनाल 6 मरले जमीन तक्सीम हुई थी। जिसका इंतकाल चढ़ाने के नाम पर पटवारी अशोक ने काफी समय तक इंतकाल को दर्ज न करके बार-बार चक्कर कटवाता रहा। जब उसको इंतकाल दर्ज करने के लिए आग्रह किया तो उसने कहा कि ऐसे इंतकाल दर्ज नहीं होगा। अगर इंतकाल दर्ज कराना है तो 10 हजार रुपये देने पड़ेंगे। मैंने कहा कि 10 हजार तो बहुत ज्यादा है और मेरी इतनी हैसियत नहीं है। पटवारी के साथ छह हजार में बात हो गई और तीन हजार रुपये उसको उसी समय दे दिए गए। उसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क किया गया। उसने बताया कि पटवारी उसको जायज काम के एवज में पैसों की मांग कर रहा है।
मंगलवार को वह एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम को साथ लेकर पटवारी को बकाया तीन हजार देने पहुंचा, जहां पर ब्यूरो की टीम ने उसे रुपये लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया है। महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि तहसील भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं। कोई भी पटवारी बिना पैसे लिए काम करने को तैयार नहीं है। ऐसे भ्रष्ट लोगों का इलाज जनता को ऐसे ही करना चाहिए।
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छछरौली (यमुनानगर)। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) तहसील छछरौली में पटवारी की ओर से भ्रष्टाचार फैलाने का मामला सामने आया है। पटवारी ने रिटायर्ड कर्मचारी व किसान से जमीन इंतकाल चढ़ाने के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग की थी। किसान तीन हजार रुपये पहले दे चुका था और 3000 देकर रंगे हाथ पकड़वाया गया है।
तहसील छछरौली के गांव चंगनोली निवासी महेंद्र सिंह हरियाणा रोडवेज से रिटायर्ड कर्मचारी व किसान ने बताया कि उनकी गांव में 142 कैनाल 6 मरले जमीन तक्सीम हुई थी। जिसका इंतकाल चढ़ाने के नाम पर पटवारी अशोक ने काफी समय तक इंतकाल को दर्ज न करके बार-बार चक्कर कटवाता रहा। जब उसको इंतकाल दर्ज करने के लिए आग्रह किया तो उसने कहा कि ऐसे इंतकाल दर्ज नहीं होगा। अगर इंतकाल दर्ज कराना है तो 10 हजार रुपये देने पड़ेंगे। मैंने कहा कि 10 हजार तो बहुत ज्यादा है और मेरी इतनी हैसियत नहीं है। पटवारी के साथ छह हजार में बात हो गई और तीन हजार रुपये उसको उसी समय दे दिए गए। उसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क किया गया। उसने बताया कि पटवारी उसको जायज काम के एवज में पैसों की मांग कर रहा है।
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मंगलवार को वह एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम को साथ लेकर पटवारी को बकाया तीन हजार देने पहुंचा, जहां पर ब्यूरो की टीम ने उसे रुपये लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया है। महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि तहसील भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं। कोई भी पटवारी बिना पैसे लिए काम करने को तैयार नहीं है। ऐसे भ्रष्ट लोगों का इलाज जनता को ऐसे ही करना चाहिए।
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