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Yamuna Nagar News: एक देश-एक किताब व समान फीस के लिए निकाली पदयात्रा
Mon, 25 May 2026 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 25 May 2026 12:56 AM IST
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शहर में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करते अभिभावक। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। निजी स्कूलों में किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर हो रही कथित मनमानी वसूली के विरोध में रविवार को अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा निकाली। पदयात्रा में एक देश एक किताब एक समान फीस की मांग की गई।
पदयात्रा शहर के शहीद भगत सिंह चौक से शुरू होकर स्टेशन चौक तक पहुंची। इस दौरान अभिभावक अर्धनग्न हो गए।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल शिक्षा को सेवा के बजाय व्यापार बना रहे हैं। किताबों, वर्दी व अन्य खर्चों के नाम पर अभिभावकों पर लगातार आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। इससे आम आदमी के लिए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलवाना कठिन होता जा रहा है।
उनका कहना था कि शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिस कारण अभिभावकों को सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है। पदयात्रा में शामिल अभिभावकों ने कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर न तो कोई जनप्रतिनिधि खुलकर सामने आ रहा है और न ही राजनीतिक दल आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस नियम बनाने की मांग की।
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अभिभावकों ने सुझाव दिया कि यदि सरकारी स्कूलों को प्रभावी ढंग से संचालित नहीं किया जा पा रहा है तो सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करे। मांग रखी कि सरकारी खजाने से वेतन लेने वाले सभी कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों की शिक्षा सरकारी स्कूलों में अनिवार्य की जाए।
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जगाधरी। निजी स्कूलों में किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर हो रही कथित मनमानी वसूली के विरोध में रविवार को अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा निकाली। पदयात्रा में एक देश एक किताब एक समान फीस की मांग की गई।
पदयात्रा शहर के शहीद भगत सिंह चौक से शुरू होकर स्टेशन चौक तक पहुंची। इस दौरान अभिभावक अर्धनग्न हो गए।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल शिक्षा को सेवा के बजाय व्यापार बना रहे हैं। किताबों, वर्दी व अन्य खर्चों के नाम पर अभिभावकों पर लगातार आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। इससे आम आदमी के लिए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलवाना कठिन होता जा रहा है।
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उनका कहना था कि शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिस कारण अभिभावकों को सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है। पदयात्रा में शामिल अभिभावकों ने कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर न तो कोई जनप्रतिनिधि खुलकर सामने आ रहा है और न ही राजनीतिक दल आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस नियम बनाने की मांग की।
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अभिभावकों ने सुझाव दिया कि यदि सरकारी स्कूलों को प्रभावी ढंग से संचालित नहीं किया जा पा रहा है तो सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करे। मांग रखी कि सरकारी खजाने से वेतन लेने वाले सभी कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों की शिक्षा सरकारी स्कूलों में अनिवार्य की जाए।