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ट्विनसिटी में 288 लोगों को नोटिस
Yamuna Nagar
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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अंबाला। नगर निगम शहर और छावनी की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर से सवालिया निशान खड़ा हो गया है। कब्जेधारी लगातार अवैध निर्माण और कब्जा करते जा रहे हैं, मगर निगम अफसर इन्हें देखते हुए भी अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं। लेकिन अब डीसी अंबाला एवं कमिश्नर नगर निगम के हस्तक्षेप के बाद निगम अफसरों की नींद टूटी है।
इसके चलते नगर निगम ने पिछले कुछ दिनों में ऐसे लोगों व कारोबारियों को चिह्नित किया है, जिन्होंने बिना निगम की अनुमति के ही अवैध रूप से भवन खड़े कर लिए। निगम ने ऐसे 288 अवैध कब्जे चिह्नित किए हैं, जिन्हें अब डोर-टू-डोर जाकर निगम कर्मियों द्वारा नोटिस थमाया जा रहा है।
इन लोगों को पर्सनल सुनवाई के लिए अलग-अलग तिथियों पर निगम में बुलाया जाएगा और खुद ज्वाइंट कमिश्नर, एसडीएम और ईओ इनको सुनकर अवैध निर्माणों और कब्जों का भविष्य तय करेंगे।
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लापरवाही से हो रहे कब्जे
ट्विनसिटी में 288 लोगों ने बिना नक्शा पास कराए न केवल अवैध रिहायशी और व्यवसायिक प्रतिष्ठान कर लिए, बल्कि सरकारी जमीनों और नालों पर भी कब्जे कर लिए। जबकि नगर निगम के तमाम सफाईकर्मी, रिकवरी स्टाफ और खुद अफसर भी कार्य दिवस में से काफी समय फील्ड में भी गुजरते हैं। जब ये अवैध निर्माण हो रहे थे तो निगम के अफसरों ने उसी वक्त इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया। अब जब इतने ज्यादा अवैध कब्जे हो गए हैं, तो यही कब्जे अब सरकार के लिए सिरदर्द बन चुके हैं।
सरकार को करोड़ों की चपत
शहर और छावनी में अवैध भवन खडे़ हो गए, इन अवैध भवनों में कई अवैध भवन तो बहुमंजिला है। लेकिन अब जब निगम ने इन्हें चिह्नित किया तो पाया कि 288 के करीब कब्जे ऐसे हैं, जिन्होंने बिना नक्शा पास कराए अपने भवन खड़े कर लिए या फिर सरकारी जमीन (सड़कों और नालों) तक अपने पक्के कब्जे कर लिए। इनमें से जो भवन लोगों व कारोबारियों ने अपनी जमीनों पर खड़े किए हैं, उन्हें निगम द्वारा बाकायदा विकास शुल्क लेकर पूरे नियमानुसार बनवाया जाता तो विकास शुल्क के रूप में ही निगम एवं सरकार को करोड़ों की आमदनी नहीं होती।
लोगों में रोष
उधर, सांझा मोर्चा के सदस्यों ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। समाज सेवी कमल किशोर जैन, सुरेश गर्ग, गगन डांग, ओंकार सिंह, ओंकार नाथ, विजेंद्र चौहान और महेश गोयल के अनुसार शहर और छावनी में जो भी निर्माण गलत ढंग से हैं, वो सभी निगम कर्मियों की मिलीभगत से हुए हैं। वरना किसी भी व्यक्ति में इतना हौसला नहीं, वो रातोंरात अपना भवन खड़ा कर लें। उन्होंने कहा कि पब्लिक की बात भी ठीक है, जब लोगों के समय पर नक्शे पास नहीं होंगे तो लोग क्या करेगा? किसी ने बैंक से लोन लेना है, किसी ने जल्द ही अपना भवन खड़ा करना है, मगर निगम के अफसर नक्शे पास कराने के लिए ही लोगों को धक्के खाने के लिए मजबूर करते रहते हैं। इसे लेकर लोगों में भारी रोष व्याप्त है। इसलिए लोगों की ये मांग है कि डीसी महोदय ये सुनिश्चित कराए कि सही नक्शे दो माह के भीतर जरूर पास किए जाए।
सामने आए थे 354 अवैध कब्जे
नगर निगम छावनी सीमा में पहले भी 354 अवैध कब्जों का मामला सामने आ चुका है। इस मामले में तो हाईकोर्ट में एक एडवोकेट द्वारा जनहित याचिका डाली गई थी। उनमें से हाईकोर्ट के आदेश में निगम ने कुछ कब्जे तो हटाए, मगर कई कब्जे ज्यों के त्यों काबिज है। लेकिन इसके अलावा कैंट और सिटी के 288 अवैध निर्माण और अवैध कब्जों के और मामले सामने आ गए हैं।
गलत निर्माण ढहाए जाएंगे : डीसी
डीसी अंबाला और निगम आयुक्त शेखर विद्यार्थी ने कहा कि उन्होंने शहर और छावनी में अवैध कब्जों को चिह्नित कराएं हैं, जिन्हें नोटिस दिया जा रहा है। ये करीबन 288 के आसपास है। जिन्हें निगम में बुलाकर उनकी पर्सनल सुनवाई करवाई जाएगी। जो व्यक्ति अपनी जमीन के मालिकाना हक के तमाम कागज और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर दस्तावेज दिखा देगा, उससे डेवलपमेंट फीस और पेनल्टी लेकर उसका नक्शा पास कर उसके अवैध निर्माण को वैध करार दे दिया जाएगा। मगर यदि कोई व्यक्ति जमीन का मालिकाना हक पेश न कर पाया, तो उसका निर्माण अवैध ही रहेगा। साथ ही जो निर्माण सड़क और नाले की हद पर है, वो भी गलत है और अवैध कब्जों व निर्माणों को ढहाया जाएगा। उनके अनुसार कैंट के एक्साइज एरिया में भी बड़ी प्राब्लम है, यहां जमीन की मालिक आज भी हरियाणा सरकार ही है, इसलिए यहां भवनों के नक्शे पास करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, इसलिए करीब 70 फाइलों वे पहले ही रिजेक्ट कर सरकार को रिपोर्ट भेज चुके हैं। वहां के नक्शे तभी पास होंगे, जब सरकार एक्साइज एरिया के बारे में कोई पॉलिसी तय करेगी।
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इसके चलते नगर निगम ने पिछले कुछ दिनों में ऐसे लोगों व कारोबारियों को चिह्नित किया है, जिन्होंने बिना निगम की अनुमति के ही अवैध रूप से भवन खड़े कर लिए। निगम ने ऐसे 288 अवैध कब्जे चिह्नित किए हैं, जिन्हें अब डोर-टू-डोर जाकर निगम कर्मियों द्वारा नोटिस थमाया जा रहा है।
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इन लोगों को पर्सनल सुनवाई के लिए अलग-अलग तिथियों पर निगम में बुलाया जाएगा और खुद ज्वाइंट कमिश्नर, एसडीएम और ईओ इनको सुनकर अवैध निर्माणों और कब्जों का भविष्य तय करेंगे।
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लापरवाही से हो रहे कब्जे
ट्विनसिटी में 288 लोगों ने बिना नक्शा पास कराए न केवल अवैध रिहायशी और व्यवसायिक प्रतिष्ठान कर लिए, बल्कि सरकारी जमीनों और नालों पर भी कब्जे कर लिए। जबकि नगर निगम के तमाम सफाईकर्मी, रिकवरी स्टाफ और खुद अफसर भी कार्य दिवस में से काफी समय फील्ड में भी गुजरते हैं। जब ये अवैध निर्माण हो रहे थे तो निगम के अफसरों ने उसी वक्त इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया। अब जब इतने ज्यादा अवैध कब्जे हो गए हैं, तो यही कब्जे अब सरकार के लिए सिरदर्द बन चुके हैं।
सरकार को करोड़ों की चपत
शहर और छावनी में अवैध भवन खडे़ हो गए, इन अवैध भवनों में कई अवैध भवन तो बहुमंजिला है। लेकिन अब जब निगम ने इन्हें चिह्नित किया तो पाया कि 288 के करीब कब्जे ऐसे हैं, जिन्होंने बिना नक्शा पास कराए अपने भवन खड़े कर लिए या फिर सरकारी जमीन (सड़कों और नालों) तक अपने पक्के कब्जे कर लिए। इनमें से जो भवन लोगों व कारोबारियों ने अपनी जमीनों पर खड़े किए हैं, उन्हें निगम द्वारा बाकायदा विकास शुल्क लेकर पूरे नियमानुसार बनवाया जाता तो विकास शुल्क के रूप में ही निगम एवं सरकार को करोड़ों की आमदनी नहीं होती।
लोगों में रोष
उधर, सांझा मोर्चा के सदस्यों ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। समाज सेवी कमल किशोर जैन, सुरेश गर्ग, गगन डांग, ओंकार सिंह, ओंकार नाथ, विजेंद्र चौहान और महेश गोयल के अनुसार शहर और छावनी में जो भी निर्माण गलत ढंग से हैं, वो सभी निगम कर्मियों की मिलीभगत से हुए हैं। वरना किसी भी व्यक्ति में इतना हौसला नहीं, वो रातोंरात अपना भवन खड़ा कर लें। उन्होंने कहा कि पब्लिक की बात भी ठीक है, जब लोगों के समय पर नक्शे पास नहीं होंगे तो लोग क्या करेगा? किसी ने बैंक से लोन लेना है, किसी ने जल्द ही अपना भवन खड़ा करना है, मगर निगम के अफसर नक्शे पास कराने के लिए ही लोगों को धक्के खाने के लिए मजबूर करते रहते हैं। इसे लेकर लोगों में भारी रोष व्याप्त है। इसलिए लोगों की ये मांग है कि डीसी महोदय ये सुनिश्चित कराए कि सही नक्शे दो माह के भीतर जरूर पास किए जाए।
सामने आए थे 354 अवैध कब्जे
नगर निगम छावनी सीमा में पहले भी 354 अवैध कब्जों का मामला सामने आ चुका है। इस मामले में तो हाईकोर्ट में एक एडवोकेट द्वारा जनहित याचिका डाली गई थी। उनमें से हाईकोर्ट के आदेश में निगम ने कुछ कब्जे तो हटाए, मगर कई कब्जे ज्यों के त्यों काबिज है। लेकिन इसके अलावा कैंट और सिटी के 288 अवैध निर्माण और अवैध कब्जों के और मामले सामने आ गए हैं।
गलत निर्माण ढहाए जाएंगे : डीसी
डीसी अंबाला और निगम आयुक्त शेखर विद्यार्थी ने कहा कि उन्होंने शहर और छावनी में अवैध कब्जों को चिह्नित कराएं हैं, जिन्हें नोटिस दिया जा रहा है। ये करीबन 288 के आसपास है। जिन्हें निगम में बुलाकर उनकी पर्सनल सुनवाई करवाई जाएगी। जो व्यक्ति अपनी जमीन के मालिकाना हक के तमाम कागज और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर दस्तावेज दिखा देगा, उससे डेवलपमेंट फीस और पेनल्टी लेकर उसका नक्शा पास कर उसके अवैध निर्माण को वैध करार दे दिया जाएगा। मगर यदि कोई व्यक्ति जमीन का मालिकाना हक पेश न कर पाया, तो उसका निर्माण अवैध ही रहेगा। साथ ही जो निर्माण सड़क और नाले की हद पर है, वो भी गलत है और अवैध कब्जों व निर्माणों को ढहाया जाएगा। उनके अनुसार कैंट के एक्साइज एरिया में भी बड़ी प्राब्लम है, यहां जमीन की मालिक आज भी हरियाणा सरकार ही है, इसलिए यहां भवनों के नक्शे पास करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, इसलिए करीब 70 फाइलों वे पहले ही रिजेक्ट कर सरकार को रिपोर्ट भेज चुके हैं। वहां के नक्शे तभी पास होंगे, जब सरकार एक्साइज एरिया के बारे में कोई पॉलिसी तय करेगी।