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शहर में लगेंगी 400 सेनेटरी नेपकीन वेंडर मशीनें, दो रुपये में मिलेगा पैड
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जीएनजी गर्ल्स कॉलेज में सेनिटरी नेपकिन वेंडर मशीन को समर्पित करते विधायक घनश्याम दास अरोड़ा
- फोटो : Yamuna Nagar
मनेस्ट्रल हाईजीन अवेयरनेस कार्यक्रम के तहत शहर में विभिन्न जगहों पर 400 सेनेटरी नेपकीन वेंडर मशीनें लगाई जाएंगी। जहां गर्ल्स स्टूडेंट्स और महिलाओं को दो रुपये में सेनेटरी पैड उपलब्ध रहेगा। सर्व जागरूक संगठन की ओर से सखी प्रोजेक्ट के तहत जीएनजी गर्ल्स कॉलेज से मशीन लगाकर इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया गया।
विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने रिबन काट कर मशीन गर्ल्स स्टूडेंट्स को समर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पायल ने की। विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि यह एक अच्छी पहल है और इससे निसंदेह महिलाओं को काफी फायदा पहुंचेगा। कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ-साथ गांव से शहर में आने वाली महिलाएं भी इस मशीन के जरिए सेनेटरी पैड्स लेने में आसानी होगी। इस मौके पर संगठन की सचिव राजेश्वरी चटर्जी, राजेश गोयल, विशाल बख्शी, पूर्व पार्षद संगीता सिंघल, उमा पराशर, आरएस शर्मा, गुरमीत चावला जूनियर जसपाल भट्टी, प्रीति हांडा, महिमा शर्मा, संध्या शर्मा, गौरव भाटिया, जनक सिंह, विनोद राणा, संजय बख़्शी, सत्यम नागपाल, नेहा अरोड़ा व अजय शर्मा मौजूद रहे।
दोनों बस स्टैंड, दोनों रेलवे स्टेशन, सभी मार्केट, सभी गर्ल्स कॉलेज व स्कूल, सार्वजनिक शौचालय, मॉल्स, बड़े पार्क, सामुदायिक केंद्र, सिविल अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र के अलावा उन जगहों पर ये मशीनें लगाई जाएंगी, जहां पर महिलाओं का आना जाना लगा रहता है।
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जिन जिन जगहों पर ये मशीनें लगायी जाएंगी, वहां पर सहायक के रूप में एक महिला की नियुक्ति की जाएगी। किसी महिला को इस मशीन से नेपकिन नहीं मिलता है या फिर ड्यूटी पर कर्मचारी नहीं मिलती है तो इसकी सूचना तुरंत मशीन पर अंकित टोल फ्री नंबर पर की जा सकती है। इसके अलावा भी महिलाएँ अपने स्वास्थ्य से सम्बंधी किसी भी प्रकार के रोग की समस्या है तो वह भी टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकती हैं। संगठन की ओर से महिला के रोग की जांच व इलाज निशुल्क करवाया जाएगा।
इस मशीन से महिलाएं मात्र 10 रुपये में पांच नैपकिन ले सकेंगी। अगर मशीन के पास कोई महिला नहीं है तो कोई भी महिला व युवती जरूरत पड़ने पर मशीन में मात्र पांच रुपये का सिक्का डालकर मशीन पर लगे बटन को घुमाकर एक पेड ले सकती है।
महिलाएं जरूरी दिनों में अत्यंत दूषित विधियां अपनाती हैं। कागज व गंदे कपड़ों का प्रयोग करती हैं। जो कि स्वास्थ्य मानकों से हानिकारक है और गर्भाशय कैंसर का कारण बनता है। 65 फीसदी महिलाएं माहवारी के समय में कष्टों को सह रही है व गंभीर बीमारियों से जूझ रही है। यूरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन से अभी भी देश की 80 प्रतिशत महिलाएं पीड़ित है जो कि पूरे विश्व में सर्वाधिक हैं।-डॉ. पायल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्व जागरूक संगठन
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विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने रिबन काट कर मशीन गर्ल्स स्टूडेंट्स को समर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पायल ने की। विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि यह एक अच्छी पहल है और इससे निसंदेह महिलाओं को काफी फायदा पहुंचेगा। कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ-साथ गांव से शहर में आने वाली महिलाएं भी इस मशीन के जरिए सेनेटरी पैड्स लेने में आसानी होगी। इस मौके पर संगठन की सचिव राजेश्वरी चटर्जी, राजेश गोयल, विशाल बख्शी, पूर्व पार्षद संगीता सिंघल, उमा पराशर, आरएस शर्मा, गुरमीत चावला जूनियर जसपाल भट्टी, प्रीति हांडा, महिमा शर्मा, संध्या शर्मा, गौरव भाटिया, जनक सिंह, विनोद राणा, संजय बख़्शी, सत्यम नागपाल, नेहा अरोड़ा व अजय शर्मा मौजूद रहे।
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दोनों बस स्टैंड, दोनों रेलवे स्टेशन, सभी मार्केट, सभी गर्ल्स कॉलेज व स्कूल, सार्वजनिक शौचालय, मॉल्स, बड़े पार्क, सामुदायिक केंद्र, सिविल अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र के अलावा उन जगहों पर ये मशीनें लगाई जाएंगी, जहां पर महिलाओं का आना जाना लगा रहता है।
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जिन जिन जगहों पर ये मशीनें लगायी जाएंगी, वहां पर सहायक के रूप में एक महिला की नियुक्ति की जाएगी। किसी महिला को इस मशीन से नेपकिन नहीं मिलता है या फिर ड्यूटी पर कर्मचारी नहीं मिलती है तो इसकी सूचना तुरंत मशीन पर अंकित टोल फ्री नंबर पर की जा सकती है। इसके अलावा भी महिलाएँ अपने स्वास्थ्य से सम्बंधी किसी भी प्रकार के रोग की समस्या है तो वह भी टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकती हैं। संगठन की ओर से महिला के रोग की जांच व इलाज निशुल्क करवाया जाएगा।
इस मशीन से महिलाएं मात्र 10 रुपये में पांच नैपकिन ले सकेंगी। अगर मशीन के पास कोई महिला नहीं है तो कोई भी महिला व युवती जरूरत पड़ने पर मशीन में मात्र पांच रुपये का सिक्का डालकर मशीन पर लगे बटन को घुमाकर एक पेड ले सकती है।
महिलाएं जरूरी दिनों में अत्यंत दूषित विधियां अपनाती हैं। कागज व गंदे कपड़ों का प्रयोग करती हैं। जो कि स्वास्थ्य मानकों से हानिकारक है और गर्भाशय कैंसर का कारण बनता है। 65 फीसदी महिलाएं माहवारी के समय में कष्टों को सह रही है व गंभीर बीमारियों से जूझ रही है। यूरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन से अभी भी देश की 80 प्रतिशत महिलाएं पीड़ित है जो कि पूरे विश्व में सर्वाधिक हैं।-डॉ. पायल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्व जागरूक संगठन