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कर्णम मल्लेश्वरी की खेल अकादमी के निर्माण में 24.70 लाख की हेराफेरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग की कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी की ओर से जगाधरी के गांव चाहड़ों में बनवाई जा रही खेल अकादमी के निर्माण में बिल्डर और उसके पार्टनरों पर 24.70 लाख रुपये की हेराफेरी का आरोप लगा है। आरोप है कि बिल्डर ने अकादमी को जो निर्माण कार्य किया वह जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा और आरोपी नेकर्णम मल्लेश्वरी फाउंडेशन से 24 लाख 69883 रुपये अधिक प्राप्त किए। पुलिस ने कर्णम मल्लेश्वरी की शिकायत पर आरोपी बिल्डर व उसके दो पार्टनरों पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
सेक्टर 17 निवासी कर्णम मल्लेश्वरी ने थाना सदर जगाधरी पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गांव चाहड़ों में कर्णम मल्लेश्वरी नेशनल वेट लिफ्टिंग एंड पावर लिफ्टिंग हाई परफार्मेंस ट्रेनिंग एंड कोचिंग सेंटर बनाया जाना है। इसके लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय की तरफ से उसकी कर्णम मल्लेश्वरी फाउंडेशन को पांच करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी थी। इसका निर्माण कार्य भी खेल मंत्रालय की देखरेख में ही किया जाना था। फरवरी 2019 में अकादमी के कंस्ट्रक्शन के लिए टेंडर लगाया गया था। जिसके लिए मेसर्स पिरामिड बिल्डर्स कंपनी द्वारा पांच करोड़ 76 लाख 36075 रुपये की बिड लगाई गई। शर्तों के अनुसार अकादमी का निर्माण 10 माह में पूरा करना था। निर्माण में देरी होने की सूरत में कंपनसेशन ऑफ डिले का भी प्रावधान था।
पिरामिड बिल्डर्स कंपनी ने शुरू से ही धीमी गति से कार्य किया। वहां पर हमेशा लेबर की कमी रहती थी। कंपनी ने किसी तरह का कोई क्वालिटी रिकार्ड भी मेंटेन नहीं किया। बिल्डर को सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त किसी स्ट्रक्चर इंजीनियर से उनके द्वारा किए गए कार्य को टेस्ट कराकर क्वालिटी स्ट्रेंथ प्रमाण पत्र देने को कहा गया परंतु उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद उनकी फाउंडेशन की तरफ से श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल रिसर्च दिल्ली को निर्माण के टेस्ट के लिए नियुक्त किया गया। जांच में कार्य नियमानुसार नहीं होना पाया गया। इतना ही नहीं एनआईटी कुरुक्षेत्र व डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ऑफ हरियाणा जगाधरी की जांच में भी भवन की मजबूती व क्वालिटी फेल पाई गई।
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फाउंडेशन की तरफ से इस कार्य की देखरेख के लिए संजय गुप्ता को मैनेजर नियुक्त किया गया था। तब तक जो काम हुआ था पिरामिड बिल्डर्स कंपनी के बिल संजय गुप्ता के पास ही आते थे। इसके बाद ही कंपनी को पेमेंट दिया जाता थ। पिरामिड बिल्डर्स कंपनी ने कर्णम मल्लेश्वरी फाउंडेशन के हक में 32 लाख 27620 रुपये की जो बैंक गारंटी बनवाई गई थी, वह भी 31 मार्च 2020 को खत्म हो गई थी जिसे रिन्यु नहीं कराया गया। अकादमी के काम को दोबारा शुरू करने के लिए खेल मंत्रालय से दोबारा मंजूरी ली जानी थी। इसके लिए मंत्रालय ने साईं एनआरसी सोनीपत के डिप्टी डायरेक्टर से चेक कराया, जिन्होंने पैमाइश के आधार पर रिपोर्ट तैयार की, जिसमें बताया गया कि पिरामिड बिल्डर्स कंपनी ने अब तक जो काम किया है, उसकी पूरी कीमत 20365488 रुपये बनती है।
वहीं बिल्डर उनसे 22835371 रुपये प्राप्त कर चुका था। इस तरह उनसे धोखाधड़ी कर 2469883 रुपये अधिक प्राप्त किए। टेंडर की शर्तों के मुताबिक निर्माण सामग्री पर 12 फीसदी ही जीएसटी चार्ज लगाया जा सकता था, परंतु बिल्डर ने उनसे 18 फीसदी चार्ज वसूला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिरामिड बिल्डर्स के पार्टनर ने गलत पैमाइश के बिल या तो उनके मैनेजर संजय गुप्ता को गुमराह करके पास करवाए हैं या फिर उन्होंने संजय गुप्ता के साथ मिलीभगत करके गलत पैमाइश के बिलों को पास कराया है। कर्णम मल्लेश्वरी की इस शिकायत पर पुलिस ने बिल्डर अनुज अग्रवाल, उसके पार्टनर निकुल अग्रवाल व नितिन अग्रवाल पर केस दर्ज कर लिया है।
शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। अभी तकनीकी रिपोर्टों की जांच की जानी है। जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- सुभाष चंद्र, थाना प्रभारी सदर जगाधरी
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यमुनानगर। ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग की कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी की ओर से जगाधरी के गांव चाहड़ों में बनवाई जा रही खेल अकादमी के निर्माण में बिल्डर और उसके पार्टनरों पर 24.70 लाख रुपये की हेराफेरी का आरोप लगा है। आरोप है कि बिल्डर ने अकादमी को जो निर्माण कार्य किया वह जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा और आरोपी नेकर्णम मल्लेश्वरी फाउंडेशन से 24 लाख 69883 रुपये अधिक प्राप्त किए। पुलिस ने कर्णम मल्लेश्वरी की शिकायत पर आरोपी बिल्डर व उसके दो पार्टनरों पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
सेक्टर 17 निवासी कर्णम मल्लेश्वरी ने थाना सदर जगाधरी पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गांव चाहड़ों में कर्णम मल्लेश्वरी नेशनल वेट लिफ्टिंग एंड पावर लिफ्टिंग हाई परफार्मेंस ट्रेनिंग एंड कोचिंग सेंटर बनाया जाना है। इसके लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय की तरफ से उसकी कर्णम मल्लेश्वरी फाउंडेशन को पांच करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी थी। इसका निर्माण कार्य भी खेल मंत्रालय की देखरेख में ही किया जाना था। फरवरी 2019 में अकादमी के कंस्ट्रक्शन के लिए टेंडर लगाया गया था। जिसके लिए मेसर्स पिरामिड बिल्डर्स कंपनी द्वारा पांच करोड़ 76 लाख 36075 रुपये की बिड लगाई गई। शर्तों के अनुसार अकादमी का निर्माण 10 माह में पूरा करना था। निर्माण में देरी होने की सूरत में कंपनसेशन ऑफ डिले का भी प्रावधान था।
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पिरामिड बिल्डर्स कंपनी ने शुरू से ही धीमी गति से कार्य किया। वहां पर हमेशा लेबर की कमी रहती थी। कंपनी ने किसी तरह का कोई क्वालिटी रिकार्ड भी मेंटेन नहीं किया। बिल्डर को सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त किसी स्ट्रक्चर इंजीनियर से उनके द्वारा किए गए कार्य को टेस्ट कराकर क्वालिटी स्ट्रेंथ प्रमाण पत्र देने को कहा गया परंतु उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद उनकी फाउंडेशन की तरफ से श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल रिसर्च दिल्ली को निर्माण के टेस्ट के लिए नियुक्त किया गया। जांच में कार्य नियमानुसार नहीं होना पाया गया। इतना ही नहीं एनआईटी कुरुक्षेत्र व डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ऑफ हरियाणा जगाधरी की जांच में भी भवन की मजबूती व क्वालिटी फेल पाई गई।
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वहीं बिल्डर उनसे 22835371 रुपये प्राप्त कर चुका था। इस तरह उनसे धोखाधड़ी कर 2469883 रुपये अधिक प्राप्त किए। टेंडर की शर्तों के मुताबिक निर्माण सामग्री पर 12 फीसदी ही जीएसटी चार्ज लगाया जा सकता था, परंतु बिल्डर ने उनसे 18 फीसदी चार्ज वसूला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिरामिड बिल्डर्स के पार्टनर ने गलत पैमाइश के बिल या तो उनके मैनेजर संजय गुप्ता को गुमराह करके पास करवाए हैं या फिर उन्होंने संजय गुप्ता के साथ मिलीभगत करके गलत पैमाइश के बिलों को पास कराया है। कर्णम मल्लेश्वरी की इस शिकायत पर पुलिस ने बिल्डर अनुज अग्रवाल, उसके पार्टनर निकुल अग्रवाल व नितिन अग्रवाल पर केस दर्ज कर लिया है।
शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। अभी तकनीकी रिपोर्टों की जांच की जानी है। जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- सुभाष चंद्र, थाना प्रभारी सदर जगाधरी