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हरियाणा: सरस्वती की धारा के साथ 200 किलोमीटर तक बनेगी पगडंडी, श्रद्धालु कर सकेंगे पैदल यात्रा
Mon, 23 May 2022 02:22 AM IST
भूपेंद्र सिंह
सुरेश सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा)
सुरेश सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 23 May 2022 02:22 AM IST
सार
आदिबद्री से कैथल के साथ घग्गर पंजाब बॉर्डर तक 200 किलोमीटर तक पगडंडी बनेगी। पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालक भी चल इसका प्रयोग कर सकेंगे। हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड ने इसका सुंदरीकरण करने का बीड़ा उठाया है।
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सरस्वती नदी के प्रवाह होने से पूर्व पगडंडी के लिए जेसीबी से भूमि को समतल करते हुए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
जहां-जहां से सरस्वती नदी की धारा प्रवाहित होगी, वहां-वहां पगडंडी (पक्की पटरी) बनाई जाएगी। ऐसे में भगवान बलराम की तरह आमजन भी पैदल सरस्वती की यात्रा कर सकेंगे। इस दिशा में कार्य शुरू हो चुका है। प्रथम चरण में कैथल और कुरुक्षेत्र में पगडंडी बनाने का कार्य शुरू को चुका है। अब दूसरे चरण में सोमवार से यमुनानगर में यह कार्य शुरू हो जाएगा।
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वहीं हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड की देखरेख में पगडंडी बनाने का कार्य किया जा रहा है। वहीं इसके बनने से श्रद्धालुओं को यात्रा करने में काफी राहत मिलेगी। बाकायदा पगडंडी के किनारे अलग-अलग प्रजातियों के खुशबूदार पौधे भी लगाए जाएंगे। बता दें यमुनानगर व दूसरे जिलों से गुजरने वाली सरस्वती नदी की धारा को भूमि पर प्रवाहित करने का कार्य तेजी से चल रहा है।
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200 किलोमीटर तक बनाई जाएगी पगडंडी
हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने बताया कि यह पगडंडी यमुनानगर के आदिबद्री से जिला कैथल के साथ घग्गर पंजाब बॉर्डर तक बनाई जाएगी। जगह के हिसाब से इसे चौड़ा (पांच से 10 फीट तक) किया जाएगा। प्रथम चरण में 50 से 55 किलोमीटर तक कार्य कवर कर लिया गया है तथा मानसून सीजन तक जितना कार्य हो सकेगा किया जाएगा। बाकी इसके बाद दोबारा से शुरू होगा।
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पगडंडी को बनाने के पीछे पौराणिक महाभारत की कथा
धुमन सिंह किरमच बताते हैं इस पगडंडी को बनाने के पीछे पौराणिक महाभारत की कथा भी है। जब महाभारत का युद्ध होने वाला था। तब भगवान बलराम ने श्रीकृष्ण से कहा था वह इस युद्ध में न तो शामिल होंगे और न ही किसी का पक्ष लेंगे। तब कृष्ण जी ने कहा फिर आप क्या करोगे? इस पर बलराम जी ने उत्तर दिया था वे आदिबद्री जाकर सरस्वती नदी की यात्रा करेंगे।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रख अब सरस्वती नदी की जलधारा के साथ-साथ पक्की पगडंडी बनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उनके पास महाराष्ट्र से एक सज्जन ने फोन कर सरस्वती नदी की यात्रा करने की इच्छा जाहिर की थी। पगडंडी बनने के बाद अब वे सरस्वती नदी की यात्रा करेंगे।