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बिना पौधा लगाए पास नहीं होगा घर का नक्शा
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अगर आपको नगर निगम से बिल्डिंग प्लान पास करवाना है तो अपने घर में कम से कम एक पौधा लगाना होगा। 100 गज से ऊपर की बिल्डिंग प्लान के लिए दो पौधे की शर्त रखी गई है। बिल्डिंग का नक्शा तभी पास होगा, जब अन्य जरूरी कागजात के साथ-साथ पौधे लगाने का शपथ पत्र भी नगर निगम की प्लानिंग विंग में जमा कराएंगे। इतना ही नहीं, इमारत का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उसका कंप्लीशन सर्टिफिकेट तब दिया जाएगा, जब उस घर या इमारत में छायादार पौधा मिलेगा। निगम की टीम द्वारा कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने से पहले पौधे लगे हैं या नहीं, इसकी मौके पर जांच होगी। यह नया नियम नगर निगम सदन की बैठक में एक प्रस्ताव पास कर लागू कर दिया गया है। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक अब एक भी बिल्डिंग प्लान बिना शपथ पत्र लिए पास नहीं किया जाएगा।
प्रदूषित शहरों में शुमार है ट्विनसिटी
पिछले दिनों जारी हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक यमुनानगर-जगाधरी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो चुका है। इसका मुख्य कारण जगाधरी की मेटल और यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री और तेजी से आबादी का बढ़ना है। इसके अतिरिक्त पेड़ों की कटाई भी अहम वजह है। कंक्रीट का जंगल खड़ा करने के नाम पर अंधाधुंध तरीके से हरियाली को उजाड़ा गया है। अगर नए पौधे लगाकर उनकी देखभाल की जाएगी तो अगले दस से पंद्रह साल में शहर को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है।
घरों में पौधे लगाना चुनौतीपूर्ण
इस संबंध में कुछ मकान ठेकेदारों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह फरमान व्यवहारिक नहीं है। क्योंकि शहरों में अमूमन कवर्ड मकान बनाएं जाते हैं। ऐसे में छायादार पेड़ नहीं लगाया जा सकता। वहीं कॉमर्शियल बिल्डिंग में इतना जगह नहीं होता कि वहां बड़े पेड़ लगाएं जा सकें। शहर में छोटे प्लॉट धारक ज्यादा हैं। उसमें खाली जगह ही नहीं बचती। ऐसे में छायादार बड़ा पेड़ लगाना मुश्किल है। निगम इसमें संशोधन करे और बौने साइज के पौधे और उनके गमले लोगों को खुद ही उपलब्ध करवाए. ताकि लोगों का इस ओर रुझान बने।
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इन प्रजातियों के पौधे लगाएं
नीम, जामुन, अमरूद, अनार, आम, मोलसरी, लीची, बेलपत्र, हार सिंगार, सीता अशोक, कटहल, हाइकफ, अंजीर व आंवला के पेड़ घर में सकता है।
हरियाणा इंवायरमेंटल सोसायटी के अध्यक्ष एसएल सैनी का कहना है कि ये जो प्रस्ताव पास किया गया है, उसे ईमानदारी से लागू करें। उन्होंने बताया कि नगर निगम के अधिकारी पर्यावरण संरक्षण के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे। पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया जाता। सोसायटी की तरफ से कोर्ट में पीआईएल डाली गई थी। इसके बाद कोर्ट ने फटकार लगाई और निगम क्षेत्र के पेड़ों की कुल संख्या तलब की। हमारे के बाद ही निगम इस तरह के प्रस्ताव पास कर रहा है।
पौधे लगाने की शर्त बिल्डिंग प्लान लगाने के लिए लागू कर दी गई है। ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी तभी जारी किया जाएगा, जब कम से कम एक पौधा घर में लगा मिलेगा। शहर में बढ़ते कंकरीट के जंगल और घटती हरियाली को रोकने के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया है। हरियाली को बढ़ावा देने के लिए अब घर बनाने से पहले आपको जमीन में पेड़ लगाना होगा।
मदन चौहान, मेयर।
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प्रदूषित शहरों में शुमार है ट्विनसिटी
पिछले दिनों जारी हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक यमुनानगर-जगाधरी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो चुका है। इसका मुख्य कारण जगाधरी की मेटल और यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री और तेजी से आबादी का बढ़ना है। इसके अतिरिक्त पेड़ों की कटाई भी अहम वजह है। कंक्रीट का जंगल खड़ा करने के नाम पर अंधाधुंध तरीके से हरियाली को उजाड़ा गया है। अगर नए पौधे लगाकर उनकी देखभाल की जाएगी तो अगले दस से पंद्रह साल में शहर को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है।
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घरों में पौधे लगाना चुनौतीपूर्ण
इस संबंध में कुछ मकान ठेकेदारों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह फरमान व्यवहारिक नहीं है। क्योंकि शहरों में अमूमन कवर्ड मकान बनाएं जाते हैं। ऐसे में छायादार पेड़ नहीं लगाया जा सकता। वहीं कॉमर्शियल बिल्डिंग में इतना जगह नहीं होता कि वहां बड़े पेड़ लगाएं जा सकें। शहर में छोटे प्लॉट धारक ज्यादा हैं। उसमें खाली जगह ही नहीं बचती। ऐसे में छायादार बड़ा पेड़ लगाना मुश्किल है। निगम इसमें संशोधन करे और बौने साइज के पौधे और उनके गमले लोगों को खुद ही उपलब्ध करवाए. ताकि लोगों का इस ओर रुझान बने।
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इन प्रजातियों के पौधे लगाएं
नीम, जामुन, अमरूद, अनार, आम, मोलसरी, लीची, बेलपत्र, हार सिंगार, सीता अशोक, कटहल, हाइकफ, अंजीर व आंवला के पेड़ घर में सकता है।
हरियाणा इंवायरमेंटल सोसायटी के अध्यक्ष एसएल सैनी का कहना है कि ये जो प्रस्ताव पास किया गया है, उसे ईमानदारी से लागू करें। उन्होंने बताया कि नगर निगम के अधिकारी पर्यावरण संरक्षण के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे। पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया जाता। सोसायटी की तरफ से कोर्ट में पीआईएल डाली गई थी। इसके बाद कोर्ट ने फटकार लगाई और निगम क्षेत्र के पेड़ों की कुल संख्या तलब की। हमारे के बाद ही निगम इस तरह के प्रस्ताव पास कर रहा है।
पौधे लगाने की शर्त बिल्डिंग प्लान लगाने के लिए लागू कर दी गई है। ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी तभी जारी किया जाएगा, जब कम से कम एक पौधा घर में लगा मिलेगा। शहर में बढ़ते कंकरीट के जंगल और घटती हरियाली को रोकने के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया है। हरियाली को बढ़ावा देने के लिए अब घर बनाने से पहले आपको जमीन में पेड़ लगाना होगा।
मदन चौहान, मेयर।