{"_id":"5d0933ac8ebc3e0594555e6c","slug":"156088412613-yamuna-nagar-news86","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेल टिकट आरक्षण के लिए रोज बनाते थे नई फर्जी आईडी, कंफर्म टिकट निकाल करते थे कालाबाजारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेल टिकट आरक्षण के लिए रोज बनाते थे नई फर्जी आईडी, कंफर्म टिकट निकाल करते थे कालाबाजारी
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गैरकानूनी तरीकों से ट्रेन का कंफर्म टिकट बेचने वाले दो दलालों को आरपीएफ ने काबू किया है। आरपीएफ ने दोनों के पास से 24 आरक्षित टिकट बरामद किए हैं। आरपीएफ ने रेलवे रोड स्थित जवाहर मार्केट में फोटो स्टेट व पुराना छछरौली रोड पर एक टूर एंड ट्रेवल एजेंसी पर छापामारी की। आरपीएफ ने दोनों के पास दो लैपटॉप सहित अन्य डिवाइस जब्त कर सील कर दिए हैं। दोनों अब तक लोगों को सैकड़ों टिकट इसी तरीके से बेच चुके हैं। उनके पास से दो तत्काल टिकट व 22 आरक्षित टिकट मिली। आरोपी दलालों की पहचान जगाधरी की काली माता मंदिर निवासी राहुल गुप्ता व यमुना गली निवासी राहुल ढल के रूप में हुई। आरपीएफ ने राहुल गुप्ता के पास से छह हजार रुपये की 10 आरक्षित टिकट बरामद की है, जबकि राहुल ढल के पास से सामान्य आरक्षण की 12 व तत्काल की दो टिकट मिली हैैैं। जिसकी कीमत 30 हजार रुपये है। इस रेड में आरपीएफ थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कुमार, एसआई वीरेंद्र चौधरी, एएसआई योगेंद्र तोमर, सिपाही गुलाब सिंह शामिल रहे। आरपीएफ ने पकड़ी गई टिकटें कैंसिल करवा दी हैं। दोनों पर रेलवे एक्ट के तहत केस दर्ज कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया। दोनों के लैपटॉप एक्सपर्ट द्वारा खंगाले जायेंगे। ताकि पता चल सके कि अब तक कितनी टिकटें इस तरीके से बेची जा चुकी हैं।
ऑपरेशन का नाम ‘थंडर’
रेलवे को काफी समय से टिकट आरक्षण प्रणाली में धांधली व दलालों की घुसपैठ की सूचनाएं मिल रही थी। इसी पर रेलवे सुरक्षा बल ने राष्ट्रव्यापी ऑपरेशन थंडर चलाया। रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार के नेतृत्व में यह ऑपरेशन चलाया गया। इस गोपनीय अभियान की जानकारी रेलवे के मंडल अधिकारियों व आरपीएफ के आलाधिकारियों के अलावा किसी को नहीं थी।
इस तरह बुक किए जाते थे टिकट
यमुनानगर-जगाधरी थाना आरपीएफ प्रभारी इंस्पेक्टर रमेश कुमार ने बताया कि यात्रियों को टिकट बुकिंग के लिए रेलवे की ओर से ऑउट एजेंसी व आईआरसीटीसी की वेबसाइट की सुविधा दी गई है। वहीं आईआरसीटीसी की ओर से इसके लिए लो कमीशन पर एजेंट को भी इसकी अनुमित दी गई है। इसके लिए आईआरसीटीसी की ओर से एजेंट्स को यूजर आईडी व की (चाबी) दी जाती है। आमजन के लिए वेबसाइट सुबह 10 बजे एसी क्लास व सुबह 11 बजे स्पीलर क्लास की टिकट बुकिंग के लिए खुल जाती है, जबकि एजेंट्स के लिए 15 मिनट बाद सुबह 10 व सवा 11 बजे साइट ओपन होती है। ऐसे में यह एजेंट रोजाना नई फर्जी पर्सनल आईडी बना लेते थे। ओटीपी प्राप्त करने के लिए यात्री के मोबाइल नंबर का प्रयोग किया जाता। एजेंट्स इस पंद्रह मिनट के खेल के लिए कई नकली पर्सनल आईडी बनाकर रखते थे। इसके लिए हाईस्पीड इंटरनेट का प्रयोग किया जाता। जब तक आमजन का कर्सर घूमता, तब तक यह दर्जनों टिकट निकाल लेते। इसी कारण आम लोगों की उनकी पर्सनल आईडी से टिकट बुक नहीं हो पाती थी।
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पकड़ने से पहले की गई मॉनिटरिंग
एजेंट्स को मिलने वाली यूजर्स आईडी व की(चाबी) की आईआरसीटीसी के कंट्रोल रूम में मॉनिटरिंग की जाती है। कई दिनों से मॉनिटरिंग टीम को दो जगहों से कईं टिकटें निकलवाने का पता चला। जब जांच की गई तो हर टिकट बुकिंग की लोकेशन व आईपी एड्रेस एक ही था। जो पकड़े गए आरोपियों की डिवाइस से मिला। इस तरह दोनों पकड़े गए।
गर्मियों की छुट्टियों व मैरिज सीजन के कारण बढ़ी मांग
अंबाला मंडल के डीएससी सी रघुबीर ने बताया कि स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां तथा शादी-विवाह का सीजन के कारण ट्रेनों में आरक्षण के लिए अत्याधिक मारामारी चल रही है। ऐसे में एजेंट यात्रियों को कंफर्म सीट दिलवाने का आश्वासन देते हैं। दलालों के इस तरीके कारण बहुत से लोगों को काउंटर व ई-टिकटिंग की सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता। वहीं दलाल ऊंचे दामों में टिकट की कालाबाजारी करते हैं।
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ऑपरेशन का नाम ‘थंडर’
रेलवे को काफी समय से टिकट आरक्षण प्रणाली में धांधली व दलालों की घुसपैठ की सूचनाएं मिल रही थी। इसी पर रेलवे सुरक्षा बल ने राष्ट्रव्यापी ऑपरेशन थंडर चलाया। रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार के नेतृत्व में यह ऑपरेशन चलाया गया। इस गोपनीय अभियान की जानकारी रेलवे के मंडल अधिकारियों व आरपीएफ के आलाधिकारियों के अलावा किसी को नहीं थी।
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इस तरह बुक किए जाते थे टिकट
यमुनानगर-जगाधरी थाना आरपीएफ प्रभारी इंस्पेक्टर रमेश कुमार ने बताया कि यात्रियों को टिकट बुकिंग के लिए रेलवे की ओर से ऑउट एजेंसी व आईआरसीटीसी की वेबसाइट की सुविधा दी गई है। वहीं आईआरसीटीसी की ओर से इसके लिए लो कमीशन पर एजेंट को भी इसकी अनुमित दी गई है। इसके लिए आईआरसीटीसी की ओर से एजेंट्स को यूजर आईडी व की (चाबी) दी जाती है। आमजन के लिए वेबसाइट सुबह 10 बजे एसी क्लास व सुबह 11 बजे स्पीलर क्लास की टिकट बुकिंग के लिए खुल जाती है, जबकि एजेंट्स के लिए 15 मिनट बाद सुबह 10 व सवा 11 बजे साइट ओपन होती है। ऐसे में यह एजेंट रोजाना नई फर्जी पर्सनल आईडी बना लेते थे। ओटीपी प्राप्त करने के लिए यात्री के मोबाइल नंबर का प्रयोग किया जाता। एजेंट्स इस पंद्रह मिनट के खेल के लिए कई नकली पर्सनल आईडी बनाकर रखते थे। इसके लिए हाईस्पीड इंटरनेट का प्रयोग किया जाता। जब तक आमजन का कर्सर घूमता, तब तक यह दर्जनों टिकट निकाल लेते। इसी कारण आम लोगों की उनकी पर्सनल आईडी से टिकट बुक नहीं हो पाती थी।
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पकड़ने से पहले की गई मॉनिटरिंग
एजेंट्स को मिलने वाली यूजर्स आईडी व की(चाबी) की आईआरसीटीसी के कंट्रोल रूम में मॉनिटरिंग की जाती है। कई दिनों से मॉनिटरिंग टीम को दो जगहों से कईं टिकटें निकलवाने का पता चला। जब जांच की गई तो हर टिकट बुकिंग की लोकेशन व आईपी एड्रेस एक ही था। जो पकड़े गए आरोपियों की डिवाइस से मिला। इस तरह दोनों पकड़े गए।
गर्मियों की छुट्टियों व मैरिज सीजन के कारण बढ़ी मांग
अंबाला मंडल के डीएससी सी रघुबीर ने बताया कि स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां तथा शादी-विवाह का सीजन के कारण ट्रेनों में आरक्षण के लिए अत्याधिक मारामारी चल रही है। ऐसे में एजेंट यात्रियों को कंफर्म सीट दिलवाने का आश्वासन देते हैं। दलालों के इस तरीके कारण बहुत से लोगों को काउंटर व ई-टिकटिंग की सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता। वहीं दलाल ऊंचे दामों में टिकट की कालाबाजारी करते हैं।