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नीम कोटेड खाद की तलाश में कृषि अधिकारियों ने प्लाईवुड फैक्ट्रियों को खंगाला
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यमुनानगर। शहर की प्लाईवुड इंडस्ट्री में नीम कोटेड यूरिया के इस्तेमाल की सूचना पर मंगलवार दोपहर कृषि विभाग की टीम ने कई फैक्ट्रियों पर छापे मारे। क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर बलबीर सिंह भान की अगुवाई में एसडीओ सतबीर सिंह और सहायक पौधा सरंक्षण अधिकारी डॉ. राकेश कुमार की टीम ने सात फैक्ट्रियों को खंगाला। छापामार टीम ने रासायनिक खाद के इनवॉइस से स्टॉक का मिलान किया और सैंपलिंग की। टीम ने नीम कोटेड खाद के प्रयोग के शक में सभी फैक्ट्रियों का बारीकी से निरीक्षण किया। वहीं छापे की सूचना से फैक्ट्री संचालकों में हड़कंप मच गया। साथ ही कई फैक्ट्रियों में स्टाफ सदस्य रिकार्ड दुरुस्त करने में जुटे रहे।
टीम के आने के पहले से ही प्लाईवुड फैक्टरी संचालकों को पता चल चुका था। इससे वे सतर्क हो गए। कुछ ने तो आनन-फानन में रिकॉर्ड को ठीक कर लिया। बताया जा रहा है कि जो नीम कोटेड खाद फैक्ट्री में था उसे तुरंत गला दिया गया और आने वाले स्टॉक को रोक दिया गया। जिसके चलते छापामार टीम को कुछ हाथ नहीं लगा। अधिकारियों को शक है कि विभाग के ही किसी व्यक्ति ने छापे की सूचना प्लाईवुड इंडस्ट्री में भिजवा दी।
वहीं जांच के नाम पर छापामार टीम ने खानापूर्ति की। ये भी कहा जा रहा है कि अधिकारियों ने गिनी चुनी फैक्ट्रियों में निरीक्षण किया और उन जगहों तक पहुंचे ही नहीं, जहां पर नीम कोटेड यूरिया का भारी स्टॉक मौजूद था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा है कि जिस वक्त फैक्ट्रियों की जांच चल रही थी। उसी वक्त जठलाना रोड की एक फैक्ट्री में पिकअप से खाद उतर रहा था और कुछ लोगों ने इसका विडियो बनाकर वायरल कर दिया।
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प्लाईवुड इंडस्ट्री में नीम कोटेड यूरिया के प्रयोग के विडियो कई दिन से वायरल हो रहे हैं। जिनकी छानबीन करने पर पता चला कि कई इंडस्ट्री में रासायनिक यूरिया से ग्लू बनाई जाती है। जो प्लाईवुड चिपकाने के काम में आती है। नीम कोटेड यूरिया को सरकार सब्सिडी पर किसानों को उपलब्ध कराती है, लेकिन प्लाईवुड इंडस्ट्री के लोग बड़े पैमाने पर इसे प्रयोग कर रहे हैं। इस गोरखधंधे को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिस पर कृषि विभाग के अधिकारियों की नींद टूटी और वे निरीक्षण करने पहुंचे।
जयदुर्गा प्लाईवुड, अनमोल प्लाईवुड, महाबीर प्लाईवुड, गणपति वुड प्रॉडक्ट, हरगुन इंडस्ट्रीज, शिवम प्लाईवुड, सरस्वती प्लाईवुड में जांच की गई। जहां से कृषि विभाग की टीम को कुछ गलत नहीं मिला।
-भाकियू के जिलाध्यक्ष संजू गुंदयाना का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ये गोरखधंधा चल रहा है। जिसमें कई बड़े नेता भी शामिल हैं। इनकी जड़े काफी गहरी हैं। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हरियाणा में जितने खाद के डीलर हैं, उनमें से 80 फीसदी केवल यमुनानगर जिले में हैं।
-नगला शेखां गांव के बड़े किसान जंगशेर का कहना है कि किसान जागरूक हैं और खाद का प्रयोग ज्यादा नहीं कर सकें, लेकिन फैक्ट्रियों में जो खाद भेजा जा रहा है, वह जिले के किसानों के रिकार्ड में चढ़ रहा है। इस मामले की जांच की जानी बहुत जरूरी है। पीओएस और आधार कार्ड को सख्ती से लागू किया जाना जरूरी है। इसी की कमी के चलते खाद की कालाबाजारी हो रही है।
कुछ फैक्टरी संचालक किसानों के छूट वाले खाद का इस्तेमाल प्लाईवुड इंडस्ट्री में कर रहे हैं। नियम के मुताबिक सब्सिडी वाला खाद इंडस्ट्री में प्रयोग नही हो सकता। यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। हमने सात फैक्ट्रियों की जांच की है और मौके पर मिले खाद के सैम्पल भरें। जिन्हें जांच के लिए लैब में भिजवा दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ होगी।
-बलबीर सिंह भान, क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर, कृषि विभाग
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टीम के आने के पहले से ही प्लाईवुड फैक्टरी संचालकों को पता चल चुका था। इससे वे सतर्क हो गए। कुछ ने तो आनन-फानन में रिकॉर्ड को ठीक कर लिया। बताया जा रहा है कि जो नीम कोटेड खाद फैक्ट्री में था उसे तुरंत गला दिया गया और आने वाले स्टॉक को रोक दिया गया। जिसके चलते छापामार टीम को कुछ हाथ नहीं लगा। अधिकारियों को शक है कि विभाग के ही किसी व्यक्ति ने छापे की सूचना प्लाईवुड इंडस्ट्री में भिजवा दी।
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वहीं जांच के नाम पर छापामार टीम ने खानापूर्ति की। ये भी कहा जा रहा है कि अधिकारियों ने गिनी चुनी फैक्ट्रियों में निरीक्षण किया और उन जगहों तक पहुंचे ही नहीं, जहां पर नीम कोटेड यूरिया का भारी स्टॉक मौजूद था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा है कि जिस वक्त फैक्ट्रियों की जांच चल रही थी। उसी वक्त जठलाना रोड की एक फैक्ट्री में पिकअप से खाद उतर रहा था और कुछ लोगों ने इसका विडियो बनाकर वायरल कर दिया।
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प्लाईवुड इंडस्ट्री में नीम कोटेड यूरिया के प्रयोग के विडियो कई दिन से वायरल हो रहे हैं। जिनकी छानबीन करने पर पता चला कि कई इंडस्ट्री में रासायनिक यूरिया से ग्लू बनाई जाती है। जो प्लाईवुड चिपकाने के काम में आती है। नीम कोटेड यूरिया को सरकार सब्सिडी पर किसानों को उपलब्ध कराती है, लेकिन प्लाईवुड इंडस्ट्री के लोग बड़े पैमाने पर इसे प्रयोग कर रहे हैं। इस गोरखधंधे को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिस पर कृषि विभाग के अधिकारियों की नींद टूटी और वे निरीक्षण करने पहुंचे।
जयदुर्गा प्लाईवुड, अनमोल प्लाईवुड, महाबीर प्लाईवुड, गणपति वुड प्रॉडक्ट, हरगुन इंडस्ट्रीज, शिवम प्लाईवुड, सरस्वती प्लाईवुड में जांच की गई। जहां से कृषि विभाग की टीम को कुछ गलत नहीं मिला।
-भाकियू के जिलाध्यक्ष संजू गुंदयाना का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ये गोरखधंधा चल रहा है। जिसमें कई बड़े नेता भी शामिल हैं। इनकी जड़े काफी गहरी हैं। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हरियाणा में जितने खाद के डीलर हैं, उनमें से 80 फीसदी केवल यमुनानगर जिले में हैं।
-नगला शेखां गांव के बड़े किसान जंगशेर का कहना है कि किसान जागरूक हैं और खाद का प्रयोग ज्यादा नहीं कर सकें, लेकिन फैक्ट्रियों में जो खाद भेजा जा रहा है, वह जिले के किसानों के रिकार्ड में चढ़ रहा है। इस मामले की जांच की जानी बहुत जरूरी है। पीओएस और आधार कार्ड को सख्ती से लागू किया जाना जरूरी है। इसी की कमी के चलते खाद की कालाबाजारी हो रही है।
कुछ फैक्टरी संचालक किसानों के छूट वाले खाद का इस्तेमाल प्लाईवुड इंडस्ट्री में कर रहे हैं। नियम के मुताबिक सब्सिडी वाला खाद इंडस्ट्री में प्रयोग नही हो सकता। यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। हमने सात फैक्ट्रियों की जांच की है और मौके पर मिले खाद के सैम्पल भरें। जिन्हें जांच के लिए लैब में भिजवा दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ होगी।
-बलबीर सिंह भान, क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर, कृषि विभाग