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धन से नहीं खरीदा जा सकता सत्संग में मिलने वाला सुख : अश्वनी
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यमुनानगर। सत्संग में आकर हमें वो सुख मिलता है, जो किसी धन दौलत से नहीं खरीदा जा सकता। इसलिए हमें पूर्ण सतगुरु की सत्संग अवश्य करनी चाहिए। सत्संग में आकर हमें तन, मन व धन तीनों प्रकार के सुख मिल जाते हैं। यह बात शहजादपुर स्थित संत निरंकारी भवन ब्रांच बुड़िया में आयोजित सत्संग में मुखी महात्मा अश्वनी कुमार ने कहीं। उन्होंने प्रवचनों कर संगत का एकता, भाईचारा व मिलवर्तन बनाए रखने का संदेश दिया। मंच संचालन महात्मा सुरेश कुमार ने किया। सत्संग के दौरान अनेक वक्ताओं ने भजन, कविताओं व विचारों से मिशन का सत्य संदेश दिया।
महात्मा अश्वनी कुमार ने दुनिया का हर प्राणी सुख चाहता है। वह हर प्रकार से दुख से बचने का प्रयत्न करता है, लेकिन उसके कर्म ही उसके दुख-सुख का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी हम करते हैं, हमारा कर्म बन जाता है और उसका फल हमें अवश्य मिलता है। हम कुछ भी करें पहले सोच ले। उन्होंने सुख को पाने का रास्ता बताते हुए कहा कि जो सुख को चाहे सदा शरण राम की ले। अगर मनुष्य तु सुख लेना चाहता है तो इस परम पिता परमात्मा का ज्ञान हासिल करे, इसको अंग-संग जानकर, हर कर्म परमात्मा को अर्पण कर जो भी कार्य करता है अपने हर कार्य का कर्ता परमात्मा को मानकर करता है तो कर्मों के फल से बच सकता है और सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रेम की भाषा की सर्वोच्च भाषा है। इस भाषा से हम सभी का दिल जीत सकते है। जो कोई व्यक्ति नाराज हो, प्रेम की भाषा से उसकी भी नाराजगी दूर हो सकता है। आज सत्गुरु माता सुदीक्षा सविंद्र हरदेव महाराज लोगों को सभी से प्रेम, मिलवर्तन व भाईचारा स्थापित करने का संदेश दे रही है। मौके पर सोमप्रकाश, शिक्षक धर्मपाल, सहायक शिक्षक बाल किशन, तेजपाल, राजपाल, शिवानी, गीता, आरती, विश्वास, अशोक समेत सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
फोटो : 31 व 32
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महात्मा अश्वनी कुमार ने दुनिया का हर प्राणी सुख चाहता है। वह हर प्रकार से दुख से बचने का प्रयत्न करता है, लेकिन उसके कर्म ही उसके दुख-सुख का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी हम करते हैं, हमारा कर्म बन जाता है और उसका फल हमें अवश्य मिलता है। हम कुछ भी करें पहले सोच ले। उन्होंने सुख को पाने का रास्ता बताते हुए कहा कि जो सुख को चाहे सदा शरण राम की ले। अगर मनुष्य तु सुख लेना चाहता है तो इस परम पिता परमात्मा का ज्ञान हासिल करे, इसको अंग-संग जानकर, हर कर्म परमात्मा को अर्पण कर जो भी कार्य करता है अपने हर कार्य का कर्ता परमात्मा को मानकर करता है तो कर्मों के फल से बच सकता है और सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रेम की भाषा की सर्वोच्च भाषा है। इस भाषा से हम सभी का दिल जीत सकते है। जो कोई व्यक्ति नाराज हो, प्रेम की भाषा से उसकी भी नाराजगी दूर हो सकता है। आज सत्गुरु माता सुदीक्षा सविंद्र हरदेव महाराज लोगों को सभी से प्रेम, मिलवर्तन व भाईचारा स्थापित करने का संदेश दे रही है। मौके पर सोमप्रकाश, शिक्षक धर्मपाल, सहायक शिक्षक बाल किशन, तेजपाल, राजपाल, शिवानी, गीता, आरती, विश्वास, अशोक समेत सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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फोटो : 31 व 32