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जिला में स्वाइन फ्लू का कहर जारी, एक और केस आया सामने, विभाग अलर्ट
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स्वाइन फ्लू का एक और केस आया सामने, विभाग अलर्ट
-तीन कैटेगिरी है स्वाइन फ्लू की, बचाव ही उपाय
यमुनानगर। जिला में स्वाइन फ्लू का कहर जारी है। स्वास्थ्य विभाग के लाख प्रबंध करने के बाद भी इसका प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं स्वाइन फ्लू फैलने के डर से पब्लिक भी भय में है। बुधवार को भंभौल सीएचसी एरिया का एक और केस सामने आने से विभाग के कान खड़े हो गए। विभाग ने तुरंत उस एरिया में टीम को भेजी। वहीं अब तक स्वाइन फ्लू से सात की मौत हो चुकी है। और एक दर्जन से अधिक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें से एक पब्लिक हेल्थ कर्मचारी था। उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव थी और उसका कई दिन से पीजीआई में इलाज चल रहा था। हालांकि उसे टीबी की भी दिक्कत थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इनकी मौत की मुख्य वजह स्वाइन फ्लू नहीं मान रहा है। क्योंकि इन लोगों को कोई न कोई बीमारी थी। बाद में वे स्वाइन फ्लू की चपेट में आए थे।
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इतने की हो चुकी मौत
आंकड़ों के अनुसार 2015 में 16 केस स्वाइन फ्लू के सामने आए थे। इस दौरान एक मरीज की मौत हुई थी। 2016 में पांच व 2017 में नौ केस सामने आ चुके हैं। बीते दो साल में फ्लू से कोई मौत नहीं हुई। 2018-19 में स्वाइन फ्लू से तीन की मौत हो चुकी है।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण
एमएस डॉ. विजय दहिया के अनुसार स्वाइन फ्लू ए, बी और सी कैटेगरी होती है। ए और बी में सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार शामिल हैं। सी में गंभीर मरीजों को रखा जाता है। यदि बुखार, खांसी, उल्टी आना, दस्त और सांस लेने में दिक्कत है तो यह स्वाइन फ्लू हो सकता है। इससे बचाव के लिए खांसते, छींकते समय मुंह पर कपड़ा या रुमाल रखें। आंख, कान, मुंह को छूने से पहले हाथ साबुन से धोएं, बुखार, गला खराब, जुकाम या खांसी वाले मरीज कम से कम एक-एक बाजू की दूरी रखें। यदि फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो ठीक होने तक घर पर ही रहें और अधिक लोगों से मिले। यदि बच्चा बीमार हो, तो उसे स्कूल में न भेजे।
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वर्जन
भंभौली सीएचसी एरिया की लेडिज स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मिली है। जिसका इलाज चंडीगढ़ पीजीआई में चल रहा है। विभाग की तरफ से एरिया में डॉक्टर टीम को भेजकर वहां लोगों की जांच करवाई जा रही है और उन्हें दवाई भी दी जारी है।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ
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-तीन कैटेगिरी है स्वाइन फ्लू की, बचाव ही उपाय
यमुनानगर। जिला में स्वाइन फ्लू का कहर जारी है। स्वास्थ्य विभाग के लाख प्रबंध करने के बाद भी इसका प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं स्वाइन फ्लू फैलने के डर से पब्लिक भी भय में है। बुधवार को भंभौल सीएचसी एरिया का एक और केस सामने आने से विभाग के कान खड़े हो गए। विभाग ने तुरंत उस एरिया में टीम को भेजी। वहीं अब तक स्वाइन फ्लू से सात की मौत हो चुकी है। और एक दर्जन से अधिक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें से एक पब्लिक हेल्थ कर्मचारी था। उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव थी और उसका कई दिन से पीजीआई में इलाज चल रहा था। हालांकि उसे टीबी की भी दिक्कत थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इनकी मौत की मुख्य वजह स्वाइन फ्लू नहीं मान रहा है। क्योंकि इन लोगों को कोई न कोई बीमारी थी। बाद में वे स्वाइन फ्लू की चपेट में आए थे।
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इतने की हो चुकी मौत
आंकड़ों के अनुसार 2015 में 16 केस स्वाइन फ्लू के सामने आए थे। इस दौरान एक मरीज की मौत हुई थी। 2016 में पांच व 2017 में नौ केस सामने आ चुके हैं। बीते दो साल में फ्लू से कोई मौत नहीं हुई। 2018-19 में स्वाइन फ्लू से तीन की मौत हो चुकी है।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण
एमएस डॉ. विजय दहिया के अनुसार स्वाइन फ्लू ए, बी और सी कैटेगरी होती है। ए और बी में सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार शामिल हैं। सी में गंभीर मरीजों को रखा जाता है। यदि बुखार, खांसी, उल्टी आना, दस्त और सांस लेने में दिक्कत है तो यह स्वाइन फ्लू हो सकता है। इससे बचाव के लिए खांसते, छींकते समय मुंह पर कपड़ा या रुमाल रखें। आंख, कान, मुंह को छूने से पहले हाथ साबुन से धोएं, बुखार, गला खराब, जुकाम या खांसी वाले मरीज कम से कम एक-एक बाजू की दूरी रखें। यदि फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो ठीक होने तक घर पर ही रहें और अधिक लोगों से मिले। यदि बच्चा बीमार हो, तो उसे स्कूल में न भेजे।
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भंभौली सीएचसी एरिया की लेडिज स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मिली है। जिसका इलाज चंडीगढ़ पीजीआई में चल रहा है। विभाग की तरफ से एरिया में डॉक्टर टीम को भेजकर वहां लोगों की जांच करवाई जा रही है और उन्हें दवाई भी दी जारी है।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ