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राग विहाग, ठुमरी व वाद्य यंत्रों की धुन पर झूमे श्रोता
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राग विहाग, ठुमरी व वाद्य यंत्रों की धुन पर झूमे श्रोता
यमुनानगर स्थानीय मुकंद लाल नेशनल कॉलेज में संगीत विभाग की ओर से एक दिवसीय लेक्चर-कम-डेमोस्ट्रेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. रमाशंकर ने विशेष प्रस्तुति दी। इन्होंने राग विहाग और ठुमरी का मनमोहक प्रदर्शन किया। मंच पर शास्त्रीय व उप शास्त्रीय संगीत की अगल अगल विधाओं में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति के जरिए फनकारों ने समारोह को यादगार बना दिया। इस अवसर पर तनुश्री और दिनेश ने इनका विशेष सहयोग किया। उनका गायन धीर-गंभीर था। उसमें एक शास्त्रीय धड़कन थी। ख्याल हो या ठुमरी या फ्यूजन उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय गायन की वे सभी खूबियां मौजूद थीं, जिनसे गायन प्रभावी बनता जा रहा था। चाहे सुरों का लगाओ हो या ठहराव, कलाकारों ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत कर स्टूडेंट्स का मन जीत लिया। इस अवसर पर तबले के मंजे हुए कलाकार सुशील जैन ने भी अपनी प्रस्तुति दी।
विभिन्न कलाकारों ने गोविंद जय जय गोपाल जय, याद पिया की आई, जैसे राग से मदहोश कर दिया। लगातार कार्यक्रम में उन्होंने मोरे पिया मोसे बोलत नाही..., गजल में ऐ मोहब्बत तेरे अंदाज पे रोना आया, सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कॉलेज प्राचार्य डॉ. शैलेश कपूर ने कहा कि संगीत हृदय की भावनाओं को व्यक्त करने का सर्वोत्तम माध्यम है तथा इस तरह के आयोजन शास्त्रीय संगीत के बारे में हमारी जानकारी बढ़ाने में मददगार हैं। आज के तनावग्रस्त समय में संगीत एक दवा की तरह काम करता है। इस तरह के आयोजन प्रशंसनीय है। इस मौके पर संगीत विभाग की प्रो. विधू अजमानी समेत तमाम शिक्षक मौजूद रहे।
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फोटो नंबर 03, 04
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यमुनानगर स्थानीय मुकंद लाल नेशनल कॉलेज में संगीत विभाग की ओर से एक दिवसीय लेक्चर-कम-डेमोस्ट्रेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. रमाशंकर ने विशेष प्रस्तुति दी। इन्होंने राग विहाग और ठुमरी का मनमोहक प्रदर्शन किया। मंच पर शास्त्रीय व उप शास्त्रीय संगीत की अगल अगल विधाओं में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति के जरिए फनकारों ने समारोह को यादगार बना दिया। इस अवसर पर तनुश्री और दिनेश ने इनका विशेष सहयोग किया। उनका गायन धीर-गंभीर था। उसमें एक शास्त्रीय धड़कन थी। ख्याल हो या ठुमरी या फ्यूजन उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय गायन की वे सभी खूबियां मौजूद थीं, जिनसे गायन प्रभावी बनता जा रहा था। चाहे सुरों का लगाओ हो या ठहराव, कलाकारों ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत कर स्टूडेंट्स का मन जीत लिया। इस अवसर पर तबले के मंजे हुए कलाकार सुशील जैन ने भी अपनी प्रस्तुति दी।
विभिन्न कलाकारों ने गोविंद जय जय गोपाल जय, याद पिया की आई, जैसे राग से मदहोश कर दिया। लगातार कार्यक्रम में उन्होंने मोरे पिया मोसे बोलत नाही..., गजल में ऐ मोहब्बत तेरे अंदाज पे रोना आया, सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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कॉलेज प्राचार्य डॉ. शैलेश कपूर ने कहा कि संगीत हृदय की भावनाओं को व्यक्त करने का सर्वोत्तम माध्यम है तथा इस तरह के आयोजन शास्त्रीय संगीत के बारे में हमारी जानकारी बढ़ाने में मददगार हैं। आज के तनावग्रस्त समय में संगीत एक दवा की तरह काम करता है। इस तरह के आयोजन प्रशंसनीय है। इस मौके पर संगीत विभाग की प्रो. विधू अजमानी समेत तमाम शिक्षक मौजूद रहे।
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