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रिम्पा के तबले की गूंज से हुआ नई जागृति का सृजन तो कश्यम के सुरीले गायन से ब्रह्मनांद की हुई उत्पति

Tue, 19 Feb 2019 12:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 19 Feb 2019 12:51 AM IST
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रिम्पा के तबले की गूंज से हुआ नई जागृति का सृजन तो कश्यम के सुरीले गायन से ब्रह्मनांद की हुई उत्पति

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रिंपा के तबले की गूंज से हुआ नई जागृति का सृजन तो कश्यप के सुरीले गायन से ब्रह्मनांद की हुई उत्पत्ति
पंचायत भवन में चले चार दिवसीय विश्वास संगीत महोत्सव का हुआ समापन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला एवं विश्वास संगीत समिति के तत्वाधान में चार दिवसीय विश्वास संगीत महोत्सव का समापन कश्यप बंधु के गायन से हुआ। जहां इसमें तीन दिवसीय अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता करवाई गई, वहीं दूसरी ओर इसमें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया। 14 फरवरी यानि प्रतियोगिता के पहले दिन जूनियर वर्ग की प्रतियोगिताएं कराई गई, जिसमें गायन तंत्र वाद्य, ताल वाद्य, सुगम संगीत तथा नृत्य की प्रतियोगिताएं कराई गई। इसी तरह दूसरे दिन सीनियर तीसरे दिन सुपर सीनियर प्रतियोगिताएं कराई गई थी। इन प्रतियोगिताओं में देश के अलग-अलग राज्यों से आए कुल 86 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन फाइनल राउंड में लगभग 25 विजेताओं ने पुन: अपनी प्रस्तुतियां दी। 11 हजार के नगद पुरस्कार के लिए गायन में दिल्ली से आए प्रणव कुमार पंडित अयोध्या प्रकाश पाठक संगीत अवार्ड के लिए, तंत्र वाद्य में बनारस से आए प्रशांत मिश्रा, बलराज गुप्ता संगीत अवार्ड के लिए, ताल वाद्य में पुणे से पधारे भागवत चमन लाला शांति स्वरूप गुप्ता संगीत अवार्ड के लिए, नृत्य के लिए कुरुक्षेत्र के सन्नी कुमार पुरुषोत्तम संतोष डांग संगीत अवार्ड के लिए तथा सुगम संगीत में बनारस की स्वाति तिवारी, डॉ. संत कुमार गर्ग संगीत अवार्ड के लिए नवाजा गया।

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रिम्पा सिवा के तबले ने किया नई जागृति का सृजन
शामकालीन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे हरियाणा कला परिषद अंबाला के निदेशक संजय भसीन पहुंचे। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना की और विश्वास दिलाया कि आगे भी राज्य सरकार द्वारा इस तरह के कार्यक्रम के लिए सहयोग दिया जाएगा। वहीं कलकत्ता से आई रिम्पा सिवा ने अपने तबले की गूंज से पूरे पंडाल में नई जागृति का सृजन किया। उनके बाद कश्यम बंधू के सुरीले गायन से ब्रह्मनांद की उत्पत्ति हुई। इस मौके पर जितेंद्र राय, विमल कश्यप, सुनील वोहरा, डॉ. अमूल्य अग्रवाल, डॉ. अंबिका, इंदु गर्ग, नरेश कंबोज, डॉ. कंवल नयन कपूर, डॉ. मीनाक्षी कंबोज व हरिंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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फोटो- 44 से 46 तक
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