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शहीद का परिवार चाहता है प्रतिशोध, पुलवामा में गई 44 जवानों की जिंदगी, रॉकी ने अपनी कुर्बानी देकर बचाई थी 44 साथियों की जान
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शहीद का परिवार चाहता है प्रतिशोध
पुलवामा में गई 40 जवानों की जिंदगी, रॉकी ने अपनी कुर्बानी देकर बचाई थी 44 साथियों की जान
-इसी तरह के हमले में हुए थे शहीद
यमुनानगर
पुलवामा हमले से जहां आमजन गुस्से में हैं, वहीं शहीदों के परिजन भी प्रतिशोध की मांग कर रहे हैं। पांच अगस्त 2015 को जम्मू के उधमपुर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए रॉकी के माता-पिता और भाई ने कहा कि इसका जवाब पाकिस्तान के अंदर घुसकर देना चाहिए। पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब देना चाहिए ताकि वह इस तरह की हरकतें करने की ना सोच सके।
बॉक्स
रॉकी ने बचाई थी 44 साथियों की जान
पुलवामा हमले में जहां 40 जवानों की मौत हुई है। वहीं यमुनानगर के बीएसएफ के जवान रॉकी ने अपनी जान कुर्बान कर 44 अन्य साथियों की जान बचाई थी। दरअसल बीएसएफ के 44 जवान बस में सवार होकर जम्मू से कश्मीर जा रहे थे। जम्मू से करीब 50 किमी दूर पहुंचने पर अचानक एक आतंकवादी बस के सामने आ गया और बस पर फायरिंग शुरू कर दी। रॉकी चालक के बगल की सीट पर बैठा हुआ था। एक गोली रॉकी को भी लगी, लेकिन उसने जख्मी होते हुए भी बस में चढ़ने का प्रयास कर रहे आतंकवादी को गोली मार के मौत के घाट उतार दिया। अगर वह बस में चढ़ने में सफल हो जाता तो बड़ा विस्फोट कर देता, क्योंकि उसके पास काफी मात्रा में विस्फोटक और ग्रेनेड थे।
बॉक्स
अपनों को खोने का दर्द
उसके छोटे भाई रोहित ने कहा कि मैंने भाई खोया है, कोई चीज उसकी भरपायी नहीं कर सकती। नेताओं को खूब सुरक्षा मिलती है जबकि सैनिक मोर्चे पर रखे जाते हैं। उनके हाथ बंधे हुए होते हैं। उन्हें ऐसी घटनाओं की जवाबी कार्रवाई के लिए आदेश का इंतजार करना पड़ता है।
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पिता प्रीतपाल का कहना है कि हर शहीद मेरा बेटा है और अपने बेटों पर हमें गर्व है, जिसने देश के लिए जीवन कुर्बान किया लेकिन सरकार को पाकिस्तान को जल्द से जल्द करारा जवाब देना चाहिए। कार्रवाई इतनी कड़ी होनी चाहिए कि पाकिस्तान कभी भी हमारी जमीन पर घुसपैठ कर हमारे सैनिकों को मारने की हिम्मत ना करने पाये। उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों पर अंकुश लगाने के लिए खोखली बयानबाजी और राजनीतिक सर्जिकल हमलों के बजाय कड़े कदम उठाने चाहिए। अपने दुश्मनों या विरोधियों का मुकाबला कर रहे हैं तो आपको शतप्रतिशत प्रतिघात के लिए तैयार रहना चाहिए।
रॉकी की मां अंग्रेजों देवी ने कहा कि सख्त कदम उठाने का समय आ गया है। भारत देश का जो व्यक्ति आतंकवादी का पक्ष ले उसे भी गोली मार दो, अब बस यही एक रास्ता है। मेरा लाल भी जब तिरंगे में लिपटकर आया था तो तब भी आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब कार्रवाई होनी ही चाहिए।
फोटो नंबर 39, 40
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पुलवामा में गई 40 जवानों की जिंदगी, रॉकी ने अपनी कुर्बानी देकर बचाई थी 44 साथियों की जान
-इसी तरह के हमले में हुए थे शहीद
यमुनानगर
पुलवामा हमले से जहां आमजन गुस्से में हैं, वहीं शहीदों के परिजन भी प्रतिशोध की मांग कर रहे हैं। पांच अगस्त 2015 को जम्मू के उधमपुर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए रॉकी के माता-पिता और भाई ने कहा कि इसका जवाब पाकिस्तान के अंदर घुसकर देना चाहिए। पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब देना चाहिए ताकि वह इस तरह की हरकतें करने की ना सोच सके।
बॉक्स
रॉकी ने बचाई थी 44 साथियों की जान
पुलवामा हमले में जहां 40 जवानों की मौत हुई है। वहीं यमुनानगर के बीएसएफ के जवान रॉकी ने अपनी जान कुर्बान कर 44 अन्य साथियों की जान बचाई थी। दरअसल बीएसएफ के 44 जवान बस में सवार होकर जम्मू से कश्मीर जा रहे थे। जम्मू से करीब 50 किमी दूर पहुंचने पर अचानक एक आतंकवादी बस के सामने आ गया और बस पर फायरिंग शुरू कर दी। रॉकी चालक के बगल की सीट पर बैठा हुआ था। एक गोली रॉकी को भी लगी, लेकिन उसने जख्मी होते हुए भी बस में चढ़ने का प्रयास कर रहे आतंकवादी को गोली मार के मौत के घाट उतार दिया। अगर वह बस में चढ़ने में सफल हो जाता तो बड़ा विस्फोट कर देता, क्योंकि उसके पास काफी मात्रा में विस्फोटक और ग्रेनेड थे।
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अपनों को खोने का दर्द
उसके छोटे भाई रोहित ने कहा कि मैंने भाई खोया है, कोई चीज उसकी भरपायी नहीं कर सकती। नेताओं को खूब सुरक्षा मिलती है जबकि सैनिक मोर्चे पर रखे जाते हैं। उनके हाथ बंधे हुए होते हैं। उन्हें ऐसी घटनाओं की जवाबी कार्रवाई के लिए आदेश का इंतजार करना पड़ता है।
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पिता प्रीतपाल का कहना है कि हर शहीद मेरा बेटा है और अपने बेटों पर हमें गर्व है, जिसने देश के लिए जीवन कुर्बान किया लेकिन सरकार को पाकिस्तान को जल्द से जल्द करारा जवाब देना चाहिए। कार्रवाई इतनी कड़ी होनी चाहिए कि पाकिस्तान कभी भी हमारी जमीन पर घुसपैठ कर हमारे सैनिकों को मारने की हिम्मत ना करने पाये। उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों पर अंकुश लगाने के लिए खोखली बयानबाजी और राजनीतिक सर्जिकल हमलों के बजाय कड़े कदम उठाने चाहिए। अपने दुश्मनों या विरोधियों का मुकाबला कर रहे हैं तो आपको शतप्रतिशत प्रतिघात के लिए तैयार रहना चाहिए।
रॉकी की मां अंग्रेजों देवी ने कहा कि सख्त कदम उठाने का समय आ गया है। भारत देश का जो व्यक्ति आतंकवादी का पक्ष ले उसे भी गोली मार दो, अब बस यही एक रास्ता है। मेरा लाल भी जब तिरंगे में लिपटकर आया था तो तब भी आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब कार्रवाई होनी ही चाहिए।
फोटो नंबर 39, 40