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स्वास्थ्य विभाग की छह साल पुरानी एंबुलेंस की डिमांड हुई पूरी, पहुंची सात नई टाटा विंगर्स एंबुलेंस
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स्वास्थ्य विभाग की छह साल पुरानी डिमांड पूरी, अब जाकर मिलीं सात एंबुलेंस
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले के स्वास्थ्य विभाग को अब पुरानी एंबुलेंस से मरीज को लाने की दिक्कत अब दूर हो चुकी है। दरअसल बजट के आभाव में लटकी स्वास्थ्य विभाग की छह साल पुरानी एंबुलेंस की डिमांड आखिरकार पूरी हो गई। एनएचएम ने जिलेभर के लिए एंबुलेंस टाटा कंपनी के राजस्थान प्लांट से 150 एंबुलेंस खरीदी हैं। अलग-अलग जिले में डिमांड के हिसाब से यमुनानगर के हिस्से में डिमांड के अनुसार 7 एंबुलेंस आई हैं। सोमवार देर शाम सात नई टाटा विंगर्स एंबुलेंस वैन यमुनागनर सिविल अस्पताल में पहुंच गई। हालांकि इन एंबुलेंसों में वेंटीलेटर को छोड़ बाकी सुविधाएं मौजूद होगी। आरटीए से पास करवाने के बाद इनका रजिस्ट्रेशन होगा, उसके बाद ही इन्हें रोड पर उतारा जाएगा। दरअसल, विभाग में एंबुलेंस की संख्या कम होने से काफी दिक्कत होती थी, संख्या बढ़ाने के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को डिमांड लेटर भी भेजे गए थे। लेकिन बजट के अभाव के कारण इनकी खरीद नहीं हो पाई। वहीं, सीएमओ ने बताया कि अभी चडीगढ़ मुख्यालय को 200 एंबुलेंस के लिए भी डिमांड भेज दिया है।
इनमें यह होगी सुविधाएं
नई टाटा विंगर्स एंबुलेंस में 19 सुविधाएं होगी। इनमें ओटोमेटिक कोलाएपसिबल स्ट्रेक्चर, स्पाइन बोर्ड विद स्ट्रेप्स, एससी/डीसी सेक्शन पंप पोर्टेबल, एंबुलेंस बैग एडल्ट, एंबुलेंस बैग चाइल्ड एंड न्यूटल, माउथ टू माउथ वेंटीलेशन डिवाइस, मल्टी पारा मोनिटर, ऐड, मल्टी स्टीफ नेक एडजेस्टेबल कॉलर, प्न्यूमेटिक स्पलाइंट, इमरजेंसी किट, स्प्राग्लोटिक डिवाइस (एलएमए), लॉयंगस्कॉप (वीडियो लॉयंगस्कॉप), निडल एंड स्प्रींग डस्ट्रोएरर, नेबूलाइजर (मेडीकल एक्यूपमेंट), हैंड हेड ग्लूकोमीटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, बॉयोमेट्रिक मशीन और एक्सट्रा टूल आदि शामिल हैं।
मियाद पूरी होने के बाद चलाई जा रहीं कंडम एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सर्विस में लगी आधे से ज्यादा गाड़ियां कंडम की श्रेणी में आ चुकी हैं। इनमें अधिकतर तो अपने किलोमीटर की मियाद पूरी करने के बाद भी चलाई जा रही हैं। सरकारी नियम के मुताबिक एक एंबुलेंस एक लाख 80 हजार लाख किलोमीटर चलने के बाद कंडम की श्रेणी में आ जाती है। लेकिन अधिकतर गाड़ियां चार लाख किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय कर चुकी हैं। जिससे साफ होता है कि नियमों को ताक पर रखकर इन एंबुलेंसों को चलाया जा रहा है।
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आपातकाल में बुलाई जाती थीं पीएचसी-सीएचसी एंबुलेंस
जिले में एंबुलेंस सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से टोल फ्री 102 नंबर है। जिसका कंट्रोल रूम ट्रॉमा सेंटर में ही बनाया गया है। लेकिन कंट्रोल रूम में करीब चार गाड़ियां ही होती है। जिनमें से 1-2 खराब रहती है। एक से दो गाड़ियां किलकारी योजना (गर्भवती महिला को लाने और ले जाने में) में लगी रहती है। ऐसे में आपातकाल में पीएचसी या सीएचसी से गाड़ियों को बुलाया जाता है।
एंबुलेंस मरीज की डॉक्टर अस्पताल में ही बैठ कर सकेंगे मॉनिटरिंग
एंबुलेंस में सबसे बड़ी खास बात यह होगी कि रेफर के दौरान भी डॉक्टर अस्पताल में बैठे ही मॉनिटरिंग कर सकेंगे। क्योंकि इसमें दो हाई क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरा लगे हैं जिनका कंट्रोल रूम ट्रॉमा सेंटर में बना है। यदि रेफर के दौरान बीच रास्ते में मरीज को कोई दिक्कत आ जाती है तो डीलिंग डॉक्टर अस्पताल से ही उसे कैमरे द्वारा अटेंडेंट के जरीए इलाज किया जा सकेगा।
किलोमीटर पूरे होने के बाद भी दौड़ रही थी एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सर्विस में लगी आधे से ज्यादा गाड़ियां कंडम की श्रेणी में आ चुकी हैं। इनमें अधिकतर तो किलोमीटर पूरे करने के बाद भी चलाई जा रही थी। सरकारी नियम के मुताबिक 1.80 लाख किलोमीटर तय करने के बाद गाड़ी कंडम की श्रेणी में आ जाती है। लेकिन अधिकतर गाड़ियां चार लाख किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय कर चुकी थी। जिन्हें अब पूरी तरह से कंडम घोषित कर दिया जाएगा।
सोमवार देर शाम को सात नई टाटा विंगर्स एंबुलेंस आ गई हैं। इनमें पहले की एंबुलेंस से ज्यादा सुविधा हैं। नई एंबुलेंस मिलने के बाद काफी राहत मिलेगी। क्योंकि कई गाड़ियां तो ऐसी हैं जोकि अपने किलोमीटर पूरे करने के बाद भी चलाई जा रही थी।
-दिनेश कुमार, फ्लीट मैनेजर, कंट्रोल रूम।
विभाग में पिछले काफी समय से एंबुलेंस का टोटा रहा है। सात नई एंबुलेंस आई हैं। नई एंबुलेंस की डिमांड काफी समय से थी। जिसके लिए कई बार हेड क्वार्टर डिमांड लेटर भेजे गए थे। लेकिन इनके आने से अब काफी राहत हो जाएगी।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले के स्वास्थ्य विभाग को अब पुरानी एंबुलेंस से मरीज को लाने की दिक्कत अब दूर हो चुकी है। दरअसल बजट के आभाव में लटकी स्वास्थ्य विभाग की छह साल पुरानी एंबुलेंस की डिमांड आखिरकार पूरी हो गई। एनएचएम ने जिलेभर के लिए एंबुलेंस टाटा कंपनी के राजस्थान प्लांट से 150 एंबुलेंस खरीदी हैं। अलग-अलग जिले में डिमांड के हिसाब से यमुनानगर के हिस्से में डिमांड के अनुसार 7 एंबुलेंस आई हैं। सोमवार देर शाम सात नई टाटा विंगर्स एंबुलेंस वैन यमुनागनर सिविल अस्पताल में पहुंच गई। हालांकि इन एंबुलेंसों में वेंटीलेटर को छोड़ बाकी सुविधाएं मौजूद होगी। आरटीए से पास करवाने के बाद इनका रजिस्ट्रेशन होगा, उसके बाद ही इन्हें रोड पर उतारा जाएगा। दरअसल, विभाग में एंबुलेंस की संख्या कम होने से काफी दिक्कत होती थी, संख्या बढ़ाने के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को डिमांड लेटर भी भेजे गए थे। लेकिन बजट के अभाव के कारण इनकी खरीद नहीं हो पाई। वहीं, सीएमओ ने बताया कि अभी चडीगढ़ मुख्यालय को 200 एंबुलेंस के लिए भी डिमांड भेज दिया है।
इनमें यह होगी सुविधाएं
नई टाटा विंगर्स एंबुलेंस में 19 सुविधाएं होगी। इनमें ओटोमेटिक कोलाएपसिबल स्ट्रेक्चर, स्पाइन बोर्ड विद स्ट्रेप्स, एससी/डीसी सेक्शन पंप पोर्टेबल, एंबुलेंस बैग एडल्ट, एंबुलेंस बैग चाइल्ड एंड न्यूटल, माउथ टू माउथ वेंटीलेशन डिवाइस, मल्टी पारा मोनिटर, ऐड, मल्टी स्टीफ नेक एडजेस्टेबल कॉलर, प्न्यूमेटिक स्पलाइंट, इमरजेंसी किट, स्प्राग्लोटिक डिवाइस (एलएमए), लॉयंगस्कॉप (वीडियो लॉयंगस्कॉप), निडल एंड स्प्रींग डस्ट्रोएरर, नेबूलाइजर (मेडीकल एक्यूपमेंट), हैंड हेड ग्लूकोमीटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, बॉयोमेट्रिक मशीन और एक्सट्रा टूल आदि शामिल हैं।
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मियाद पूरी होने के बाद चलाई जा रहीं कंडम एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सर्विस में लगी आधे से ज्यादा गाड़ियां कंडम की श्रेणी में आ चुकी हैं। इनमें अधिकतर तो अपने किलोमीटर की मियाद पूरी करने के बाद भी चलाई जा रही हैं। सरकारी नियम के मुताबिक एक एंबुलेंस एक लाख 80 हजार लाख किलोमीटर चलने के बाद कंडम की श्रेणी में आ जाती है। लेकिन अधिकतर गाड़ियां चार लाख किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय कर चुकी हैं। जिससे साफ होता है कि नियमों को ताक पर रखकर इन एंबुलेंसों को चलाया जा रहा है।
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आपातकाल में बुलाई जाती थीं पीएचसी-सीएचसी एंबुलेंस
जिले में एंबुलेंस सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से टोल फ्री 102 नंबर है। जिसका कंट्रोल रूम ट्रॉमा सेंटर में ही बनाया गया है। लेकिन कंट्रोल रूम में करीब चार गाड़ियां ही होती है। जिनमें से 1-2 खराब रहती है। एक से दो गाड़ियां किलकारी योजना (गर्भवती महिला को लाने और ले जाने में) में लगी रहती है। ऐसे में आपातकाल में पीएचसी या सीएचसी से गाड़ियों को बुलाया जाता है।
एंबुलेंस मरीज की डॉक्टर अस्पताल में ही बैठ कर सकेंगे मॉनिटरिंग
एंबुलेंस में सबसे बड़ी खास बात यह होगी कि रेफर के दौरान भी डॉक्टर अस्पताल में बैठे ही मॉनिटरिंग कर सकेंगे। क्योंकि इसमें दो हाई क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरा लगे हैं जिनका कंट्रोल रूम ट्रॉमा सेंटर में बना है। यदि रेफर के दौरान बीच रास्ते में मरीज को कोई दिक्कत आ जाती है तो डीलिंग डॉक्टर अस्पताल से ही उसे कैमरे द्वारा अटेंडेंट के जरीए इलाज किया जा सकेगा।
किलोमीटर पूरे होने के बाद भी दौड़ रही थी एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सर्विस में लगी आधे से ज्यादा गाड़ियां कंडम की श्रेणी में आ चुकी हैं। इनमें अधिकतर तो किलोमीटर पूरे करने के बाद भी चलाई जा रही थी। सरकारी नियम के मुताबिक 1.80 लाख किलोमीटर तय करने के बाद गाड़ी कंडम की श्रेणी में आ जाती है। लेकिन अधिकतर गाड़ियां चार लाख किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय कर चुकी थी। जिन्हें अब पूरी तरह से कंडम घोषित कर दिया जाएगा।
सोमवार देर शाम को सात नई टाटा विंगर्स एंबुलेंस आ गई हैं। इनमें पहले की एंबुलेंस से ज्यादा सुविधा हैं। नई एंबुलेंस मिलने के बाद काफी राहत मिलेगी। क्योंकि कई गाड़ियां तो ऐसी हैं जोकि अपने किलोमीटर पूरे करने के बाद भी चलाई जा रही थी।
-दिनेश कुमार, फ्लीट मैनेजर, कंट्रोल रूम।
विभाग में पिछले काफी समय से एंबुलेंस का टोटा रहा है। सात नई एंबुलेंस आई हैं। नई एंबुलेंस की डिमांड काफी समय से थी। जिसके लिए कई बार हेड क्वार्टर डिमांड लेटर भेजे गए थे। लेकिन इनके आने से अब काफी राहत हो जाएगी।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ।