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देश के सबसे बड़े अशोक चक्र का आज होगा अनावरण, मंगल पाठ के बाद 500 से अधिक बच्चे छोड़ेंगे 300 गुबारे व 12 फहराए जाएंगे राष्ट्रीय

Sat, 05 Jan 2019 12:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jan 2019 12:16 AM IST
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देश के सबसे बड़े अशोक चक्र का आज होगा अनावरण, मंगल पाठ के बाद 500 से अधिक बच्चे छोड़ेंगे 300 गुबारे व 12 फहराए जाएंगे राष्ट्रीय

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देश के सबसे बड़े अशोक चक्र का आज होगा अनावरण, मंगल पाठ के बाद 500 से अधिक बच्चे छोड़ेंगे 300 गुबारे और 12 फहराए जाएंगे राष्ट्रीय ध्वज
राज्य सभा सदस्य डॉ. सुभाष चंद्र होंगे मुख्यातिथि व रादौर विधायक भी होंगे साथ
अशोक चक्र 12 कारीगरों ने 6 महीने में हुआ तैयार, इसमें 6 टन लोहा और 3 टन अन्य सामग्री लगी।
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। टोपरा कलां गांव में बने देश का सबसे बड़े अशोक चक्र का शनिवार यानी आज अनावरण होगा। इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। बर्मा व तिब्बत से आने वाले बौद्धिस्ट मंत्रोच्चारण के साथ मंगल पाठ करेंगे। उसके बाद 500 से अधिक स्कूली बच्चे एक साथ 300 गुबारे आसमान में छोड़ेंगे तथा 12 राष्ट्रीय ध्वज भी फहराए जाएंगे।मुख्यातिथि के तौर पर राज्यसभा सदस्य डॉ. सुभाष चंद्र पहुंचेंगे उनके साथ रादौर विधायक श्याम सिंह राणा भी मौजूद होंगे। बता दें कि टोपरा कलां में स्थापित अशोक चक्र के निर्माण में 45 लाख रुपये का खर्च आया है। इसे 12 कारीगरों ने 6 माह में तैयार किया है और इसमें छह टन लोहा व तीन टन अन्य सामग्री लगी है। यह जानकारी बौद्धिस्ट फोरम के अध्यक्ष सिद्धार्थ गौरी ने दी। सरपंच मनीष कुमार ने बताया कि अशोक चक्र के निर्माण पर पर 45 लाख खर्चा आया है। 30 फीट ऊंचा सुनहरे रंग का यह चक्र अशोका इडिक्ट पार्क में आठ फीट ऊंचे प्लेटफार्म पर स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस स्थान को विकसित करने में ग्राम पंचायत तथा दि बौद्धिष्ट फोरम ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पत्र लिखा है। इससे जहां यह स्थल अंतरराष्ट्रीय हो जाएगा। वहीं पर्यटन के रूप में भी इसका फायदा होगा। उन्होंने बताया कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने की कवायद तेज हो चुकी है और उम्मीद ही नहीं यकीन भी है यह दर्ज हो जाएगा।

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स्तंभ को ले जाने के लिए 42 पहियों की गाड़ी की गई थी तैयार
बता दें अशोक स्तंभ को फिरोजशाह तुगलक यमुनानगर से उठाकर दिल्ली ले गया था। स्तंभ को टोपरा से यमुना नदी तक इसे ले जाने के लिए 42 पहियों की गाड़ी तैयार की गई थी, जिसे आठ हजार लोगों ने खींचा था। 18वीं शताब्दी में सबसे पहले एलेग्जेंडर नघम ने साबित किया था कि यह स्तंभ टोपरा कलां से लाया गया है। उसके सहकर्मी जेम्स प्रिंसेप ने पहली बार ब्रहमी लिपी में लिखे संदेश को पढ़ा था।
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फोटो- 12 व 13
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